RIMS की जमीन पर फर्जीवाड़ा, बाबूलाल मरांडी ने सीएम को पत्र लिखकर रखी ये मांग!

रांचीः झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी रिम्स की DIG ग्राउंड के नाम से चर्चत जमीन से कब्जा हटाए जाने का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने बेघर हुए लोगों की आवाज बुलंद कर दी है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम खुला पत्र जारी किया है.
जिसमें लिखा है कि जरुरतमंदों को अलग से जमीन मुहैया कराया जाना चाहिए. साथ उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. जिनकी वजह से संबंधित जमीन पर वर्षों से बड़े बड़े भवन तैयार हो गये.
‘कैसे बने रिम्स की जमीन के फर्जी कागजात’
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूछा है कि संबंधित जमीन पर अवैध कब्जा जिला प्रशासन द्वारा कैसे होने दिया गया? रिम्स की उक्त जमीन का कुछ भाग फर्जी कागज बनाकर कैसे बाजार में बेच दिया गया. बिल्डरों ने उक्त जमीन पर अपार्टमेन्ट बनाकर आम नागरिकों के हाथों फ्लैट कैसे बेच दिया. बाबूलाल मरांडी ने लिखा है कि कोई आम नागरिक फ्लैट या जमीन खरीदता है तो यह उनकी जिम्मेवारी नहीं होती है कि जमीन की जांच करें कि जमीन सरकारी या निजी है. आम नागरिक के पास न इतनी समझ होती है और न ही इतने संसाधन कि हर स्तर पर कानूनी जांच पड़ताल कर सके. यह जिम्मेवारी सरकार के सिस्टम की होती है.
बाबूलाल मरांडी ने सीएम से पूछे कुछ सवाल
बाबूलाल मरांडी ने लिखा है कि दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन करते वक्त जांच-पड़ताल की जाती है. इससे साफ है कि तत्कालीन रजिस्ट्रार ने रिश्वत लेकर जमीन की रजिस्ट्री कर दी. आखिर CO ने कैसे म्यूटेशन कर दिया. गौर करने वाली बात है कि अवैध रूप से रजिस्ट्री और म्यूटेशन के बाद रांची नगर निगम ने अपार्टमेन्ट निर्माण के नक्शा पास कर दिया जबकि नक्शा पास करते समय जमीन का पूरा ब्यौरा और दस्तावेज की जांच की जाती है. नक्शा पास करने के बाद RERA की जिम्मेवारी बनती है कि जांच-पड़ताल कर ही प्रोजेक्ट को अप्रूव करे. फिर प्रोजेक्ट कैसे अप्रूव कर दिए गये.
बाबूलाल मरांडी की मुख्यमंत्री से मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण में शामिल संबंधित रजिस्ट्रार, अंचल अधिकारी और रांची नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाए और उन्हें तुरंत निलंबित किया जाए. जिन निर्दोष लोगों ने उक्त अवैध तरीके से निर्मित अपार्टमेन्ट में फ्लैट खरीदे हैं, उन्हें सरकार तत्काल वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराए. यदि सरकार वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हो तो फ्लैट खरीददारों को क्रय मूल्य सरकार वहन करें क्योंकि यह नुकसान सरकार के भ्रष्ट सिस्टम की वजह से हुआ है.





