February 24, 2026 2:34 am
ब्रेकिंग
Ramadan 2026- साल में दो बार आएगा रमजान का महीना? जानिए कब बनेगा ऐसा दुर्लभ संयोग और क्या है इसके पी... Paneer Shimla Mirch Recipe: शेफ कुनाल कपूर स्टाइल में बनाएं पनीर-शिमला मिर्च की सब्जी, उंगलियां चाटत... Kashmir Encounter News: घाटी में आतंक का अंत! 'ऑपरेशन त्रासी' के तहत सैफुल्ला सहित 7 दहशतगर्द मारे ग... Jabalpur News: जबलपुर के पास नेशनल हाईवे के पुल का हिस्सा ढहा, NHAI ने पल्ला झाड़ा; कहा- यह हमारे अध... बड़ा खुलासा: शंकराचार्य पर FIR कराने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी का खौफनाक अतीत! रेप और मर्डर जैसे संगीन ... Crime News Bihar: एक क्लिक पर बुक होती थीं लड़कियां, बिहार पुलिस ने उजागर किया मानव तस्करी का 'मामी-... Namo Bharat New Routes: दिल्ली-मेरठ के बाद अब इन 3 रूटों पर चलेगी नमो भारत, जानें नए कॉरिडोर और स्टे... Haryana News: पंचायतों के राडार पर सिंगर मासूम शर्मा, विवादित बयान/गाने को लेकर मचा बवाल, जानें क्या... बड़ी खबर: बिहार के IG सुनील नायक को आंध्र पुलिस ने पटना में किया गिरफ्तार! पूर्व सांसद को टॉर्चर करन... NCP-SP vs Ajit Pawar: पायलट सुमित कपूर की भूमिका पर उठे सवाल, विधायक ने अजीत पवार विमान हादसे को बता...
व्यापार

रूस से सस्ता तेल खरीदना हुआ कम? खाड़ी देशों की ओर फिर मुड़ा भारत, समझें मोदी सरकार का नया मास्टरप्लान

अमेरिकी राष्ट्रपति के रूसी ऑयल टैरिफ के बाद भारत ने अपने ऑयल गेम को पूरी तरह से बदल दिया है. अगर इस बात को यूं कहें कि भारत का रूसी तेल से ब्रेकअप और खाड़ी देशों के तेल के पैचअप हो गया है, तो गलत नहीं होगा. वास्तव में रूसी तेल की सप्लाई में लगातार कमी देखने को मिल रही है. वहीं खाड़ी देशों के कच्चे तेल की सप्लाई में इजाफा देखने को मिल रहा है. भारत के इस ऑयल गेम से पूरी दुनिया चौंक गई है. वहीं दूसरी ओर भारत ने हाल के दिनों में कुछ नए देशों के साथ ऑयल सप्लाई की डील की है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर आंकड़े किस तरह की कहानी बयां कर रहे हैं?

कैसे बढ़ रही खाड़ी देशों की सप्लाई?

भारत ने कच्चे तेल के आयात की रणनीति में बदलाव करते हुए कम जोखिम वाली सप्लाई पर जोर दिया है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस से सप्लाई भी बनी हुई है. विश्लेषण फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार जनवरी के पहले तीन हफ्तों में रूसी कच्चे तेल का आयात गिरकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया, जो पिछले महीने औसतन 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन और मिड 2025 में 20 लाख बैरल प्रतिदिन से थोड़ा अधिक था.

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों को पूरा करने के लिए लगभग 90 प्रतिशत आयात पर निर्भर है. केप्लर के आंकड़ों के अनुसार इराक अब रूस के बराबर मात्रा में सप्लाई कर रहा है, जबकि दिसंबर 2025 में यह औसतन 9,04,000 बैरल प्रतिदिन था. सऊदी अरब से आने वाली मात्रा भी इस महीने बढ़कर 9,24,000 बैरल प्रतिदिन हो गई है, जो दिसंबर में 7,10,000 बैरल प्रतिदिन और अप्रैल 2025 में 5,39,000 बैरल प्रतिदिन थी.

2022 ने रूस ने छोड़ा था इराक को पीछे

रूस 2022 में इराक को पीछे छोड़कर भारत का टॉप सप्लायर बन गया था, जब भारतीय रिफाइनरी ने भारी छूट वाले रूसी तेल को खरीदने के लिए तेजी दिखाई थी. दरअसल यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण के बाद यूरोप और अन्य पश्चिमी देशों ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया था. केप्लर के शोध विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि जनवरी 2026 में भारत की कच्चे तेल की खरीद कम जोखिम वाली और अधिक विश्वसनीय आपूर्ति की ओर एक स्पष्ट बदलाव दिखाती है. इसमें पश्चिम एशिया की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जबकि सीमित मात्रा में रूस का प्रवाह भी बना हुआ है.

Related Articles

Back to top button