March 13, 2026 4:52 am
ब्रेकिंग
"नेताजी की अस्थियां कहां हैं?"—सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; याचिकाकर्ता से पूछा ऐसा सवाल क... Share Market Crash Today 2026: क्यों गिरा आज शेयर बाजार? जानें वे 5 बड़े कारण जिनसे निवेशकों को लगा ... Rahul Gandhi in Lok Sabha: लोकसभा में गूंजा ईरान संकट, राहुल गांधी ने सरकार को घेरा; पूछा— "अमेरिका ... Iran Conflict Update: ईरान में फंसे 9000 भारतीय, विदेश मंत्रालय (MEA) ने बताया वतन वापसी का पूरा प्ल... बड़ी खबर: टेरर फंडिंग केस में शब्बीर शाह को सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत! 7 साल बाद जेल से आएंगे बाहर... LPG Crisis in Rural Areas: ग्रामीण इलाकों में गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बदलाव, अब 45 दिन करना... दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बड़ा अपडेट: अभी इतना काम है बाकी, इन वाहनों को नहीं देना होगा 1 रुपया... संसद में गूंजी थाली-चम्मच की आवाज! LPG संकट पर TMC महिला सांसदों का अनोखा विरोध; सदन में भारी हंगामा... थरूर का मणिशंकर अय्यर को करारा जवाब: "विदेश नीति भाषण देने के लिए नहीं, देश के हित के लिए होती है!" ... फारूक अब्दुल्ला पर हमला? पूर्व CM का खौफनाक खुलासा— "मुझे लगा पटाखा फूटा, बाद में पता चला गोली चली!"...
देश

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: ‘फर्जी आधार की तरह पासपोर्ट भी बन सकता है’, चुनाव आयोग के साथ सुनवाई में जस्टिस ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कल बुधवार को सुनवाई के दौरान इस तर्क पर गहरी आपत्ति जताई कि वोटर लिस्ट के लिए कराई जा रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के दौरान पहचान वेरिफिकेशन के लिए वोटर्स को जिन डॉक्यूमेंट्स का इस्तेमाल करने की अनुमति है, उनमें से आधार कार्ड को हटा देना चाहिए, क्योंकि इन्हें आसानी से नकली बनाया जा सकता है और प्राइवेट एजेंसियों से हासिल किया जा सकता है.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सीनियर एडवोकेट विजय हंसारिया से सवाल किया, क्या आप जानते हैं कि पासपोर्ट भी भारत सरकार की देखरेख में प्राइवेट एजेंसी को आउटसोर्स किया जाता है? ये प्राइवेट सर्विस सेंटर (जिनके जरिए आधार एनरोलमेंट और अपडेट कराए जा सकते हैं) वैधानिक अधिकारियों या खुद सरकार के तहत काम करते हैं. आधार एक पब्लिक डॉक्यूमेंट है. कोई भी डॉक्यूमेंट नकली बनाया जा सकता है. यहां तक ​​कि पासपोर्ट भी जाली बनाए जा सकते हैं, आधार जारी करते समय प्राइवेट सेंटर एक पब्लिक ड्यूटी कर रहे होते हैं.

कोर्ट ने अपने फैसले में आधार को दी मान्यता

पासपोर्ट उन 11 मूल डॉक्यूमेंट्स में से एक है जिसे चुनाव आयोग ने पिछले साल 24 जून को SIR प्रक्रिया की घोषणा करते हुए अपने आदेश में इसकी इजाजत दी थी.

याचिकाकर्ता-वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की ओर से कोर्ट में दलील देते हुए हंसारिया ने कहा कि कोर्ट को आधार को वेरिफिकेशन और पहचान के सबूत के तौर पर 12वें ‘इंडिकेटिव’ डॉक्यूमेंट के रूप में शामिल करने के अपने 8 सितंबर, 2025 के आदेश पर विचार करना चाहिए. यह आदेश कोर्ट ने बिहार में जारी SIR प्रक्रिया के दौरान सुनाया था.

उन्होंने बताया कि करीब 5.72 लाख प्राइवेट कॉमन सर्विस सेंटर आधार एनरोलमेंट या फिर उसे अपडेट करते हैं, और कोई भी व्यक्ति जिसके पास कक्षा 10 की योग्यता, बेसिक कंप्यूटर ज्ञान और एक बायोमेट्रिक मशीन हो, वह इस तरह का सेंटर चला सकता है.

‘आधार नागरिकता साबित नहीं कर सकता’

हंसारिया ने आधार एक्ट 2016 (Targeted Delivery of Financial and Other Subsidies, Benefits and Services) का हवाला देते हुए बताया कि यह डॉक्यूमेंट नागरिकता या पहचान को वेरिफाई करने के लिए नहीं है, बल्कि केवल “सुशासन, कुशल, पारदर्शी और सब्सिडी, लाभ तथा सेवाओं की लक्षित डिलीवरी” को बढ़ावा देने के लिए तैयार किया गया एक डॉक्यूमेंट है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि आधार एक्ट 2016 के अधिनियम की धारा 2(v) में ‘निवासी’ को किसी भी व्यक्ति, जिसमें एक विदेशी भी शामिल है, के रूप में परिभाषित किया गया है, जो आधार के लिए आवेदन की तारीख से पहले कम से कम 182 दिनों तक भारत में रह रहा हो.

सीनियर एडवोकेट हंसारिया ने कहा, “इसलिए, आधार किसी की नागरिकता साबित नहीं कर सकता.” उन्होंने एक्ट की धारा 9 का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान में साफ तौर पर कहा गया कि आधार नंबर को नागरिकता या निवास के सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने दलीलों का जवाब देते हुए कहा, “आधार पहचान का एक माना हुआ डॉक्यूमेंट है. हमने कभी नहीं कहा कि आधार को नागरिकता के आधार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. हमने हमेशा कहा है कि चुनाव आयोग आधार को वेरिफाई कर सकता है.”

Related Articles

Back to top button