February 23, 2026 11:12 am
ब्रेकिंग
Calcutta High Court Decision: कलकत्ता हाई कोर्ट का सख्त आदेश: बीमारी के अलावा नहीं मिलेगी छुट्टी, जज... Trump Resort Intrusion: डोनाल्ड ट्रंप के रिसॉर्ट में घुसपैठ की कोशिश, सीक्रेट सर्विस ने 20 साल के सं... Business News: होली फेस्टिवल पर इकोनॉमी में उछाल: 80,000 करोड़ रुपये के कारोबार से झूम उठेंगे कारोबा... पंजाब के उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा की उद्योगपति सज्जन जिंदल से मुलाकात; राजपुरा में इस्पात क्षेत्र ... Digital Arrest Awareness: PM मोदी का देश को संदेश, डिजिटल अरेस्ट के फ्रॉड से कैसे बचें? जानें बैंक अ... Security Alert: 8 संदिग्धों की गिरफ्तारी से बड़ा खुलासा, पाकिस्तान-बांग्लादेश से जुड़े तार, कई शहरों... मेरठ वालों की बल्ले-बल्ले! पीएम मोदी ने शुरू की मेरठ मेट्रो, अब दिल्ली पहुंचने में लगेगा एक घंटे से ... Maharashtra Politics: राज्यसभा चुनाव से पहले आदित्य ठाकरे ने क्यों छेड़ा NCP विलय का मुद्दा? MVA के ... Crime News: गले पर चाकू और बेटी पर छोड़ा कुत्ता, मां को बचाने थाने पहुंची मासूम बच्ची; पुलिस ने ऐसे ... बड़ी खबर: अदालत के आदेश के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ कड़ा एक्शन, पुलिस ने शुरू की घटनास्...
मध्यप्रदेश

India-Pakistan Border: अनजाने में सीमा पार करने की मिली 7 साल की सजा, पाकिस्तानी जेल से छूटे भारतीय युवक ने खोले बड़े राज

प्रसन्नजीत रंगारी 7 साल बाद पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर अपने घर पहुंच गए हैं. वह 6 फरवरी को अपने परिजनों से मिले. 2015 से लापता प्रसन्नजीत 2021 में पाकिस्तान की जेल पहुंच गए थे. वह मानसिक रूप से बीमार था. सात साल बाद उनकी रिहाई हुई. उन्होंने पूरी आपबीती बताई. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान की जेल में भारतीय कैदियों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है

वह जबलपुर से बी.फार्मेसी की पढ़ाई करने के बाद घर आए थे और फिर 2015 में एक दिन अचानक से लापता हो गए. वह मानसिक रूप से बीमार थे. 2021 में परिजनों को पता चला कि वह पाकिस्तान की जेल में हैं. उसके बाद परिजनों ने केंद्र सरकार से उनकी रिहाई की गुहार लगाई और 7 साल बाद उनकी वतन वापसी हुई. वह एमपी के बालाघाट के रहने वाले हैं.

अब नौकरी करना चाहते हैं प्रसन्नजीत

प्रसन्नजीत के पिता काफी उम्रदराज थे. आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, लेकिन वह पढ़ाई में तेज था. ऐसे में उनके पिता ने जबलपुर के रामदास खालसा इंस्ट्यूट में उन्हें बी. फार्मेसी की पढ़ाई के लिए भेजा. इस दौरान आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण जमीन तक बेचनी पड़ी. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई मास्टर कोर्स में दाखिला लिया, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थित अच्छी नहीं होने के कारण एक सेमेस्टर के बाद उनकी पढ़ाई छूट गई.

इस दौरान फार्मेसी लाइसेंस के लिए रजिस्ट्रेशन कराया और नौकरी की तलाश में इंदौर चले गए, लेकिन नौकरी नहीं मिली. सफलता न मिलने पर वह डिप्रेशन का शिकार हो गए और मानसिक संतुलन बिगड़ने लगा. प्रसन्नजीत का कहना है कि अब वह आगे नहीं पढ़ने चाहते, लेकिन नौकरी करना चाहते हैं.

पाकिस्तान जेल में चाय के साथ मिलती थी रोटी

प्रसन्नजीत ने बताया कि उन्हें सुबह सात बजे उठाया जाता था फिर चाय के साथ रोटी दी जाती थी. इसके बाद साढ़े सात बजे से काम करवाते थे. वह पाक की जेल में पत्ते चुनने का काम करते थे. सफाई का काम भी कराया जाता था. दोपहर में मटन और चावल खाने में दिया जाता था. वहीं, शाम के समय टीवी देखने की इजाजत थी और फिर रात का खाना खिलाकर रात में बैरक में भेजा जाता था. वह रात 9 बजे सो जाते थे.

कैसे हुई वतन वापसी?

31 दिसंबर 2021 को जब बहन संघमित्रा को पता चला कि उनका भाई पाकिस्तान की जेल में बंद है. तब से लेकर 14 महीने तक कलेक्टर कार्यालय और भोपाल के दफ्तरों के चक्कर लगाती रहीं. वहीं बालाघाट के क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन सांसद से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन वहां से भी सिर्फ आश्वासन ही मिला.

एक दिन वह पड़ोस के रहने वाले ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और अधिवक्ता कपिल फूले के पास वह पहुंची. उन्होंने प्रसन्नजीत की घर वापसी के लिए मानव अधिकार आयोग में एक याचिका लगाई. इससे पहले उन्होंने तथ्य जुटाए और फिर 21 फरवरी को एक याचिका लगाई. इसमें तीन आधार थे. चार साल से प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बिना ट्रायल और कानूनी मदद के बंद हैं.

मानसिक रूप से बीमार होने के आधार पर भेदभाव की आशंका जताई और इसे मानव अधिकार का उल्लंघन बताया. इसके अलावा उनकी बहन ने प्रशासन से गुहार लगाई और उन्होंने कोई एक्शन नहीं लिया. इन तीन आधार पर प्रसन्नजीत की रिहाई और स्वदेश वापसी के अधिकार को प्रोटेक्ट करने की मांग की.

यह याचिका 2 फरवरी 2024 को लगाई. महज 8 दिन के भीतर आयोग ने मामला रजिस्टर्ड किया और 4 मार्च को प्रसन्नजीत की घर वापसी की कार्रवाई तेज कर दी. अगले महीने ही पाकिस्तान ने प्रसन्नजीत की सारी जानकारी भारत को भेजी और 30 अप्रैल को संघमित्रा से पुष्टि कराई और नागरिकता साबित करने के दस्तावेज मंगवाए. आखिरकार दो साल के भीतर ही प्रसन्नजीत पाकिस्तान की कैद से आजाद हो गए.

कैसे चला पता.. पाक जेल में हैं प्रसन्नजीत?

प्रसन्नजीत को अपनी पुरानी जिंदगी की लगभग सारी बातें याद है. 2015 के बाद उनकी मानसिक स्थिति खराब होने लगी थी. ऐसे में वह कई बार घर से भागे थे. एक बार वह घर से कहीं चले गए थे और करीब 8 महीने बाद उन्होंने अपनी बहन को बिहार से फोन किया था और फिर लौट कर घर आ गए गए थे. वापस आने के कुछ दिनों के फिर से घर से लापता हो गए थे.

इसके बाद वह कभी लौट कर नहीं आए. एक समय तक उनकी बहन संघमित्रा और जीजा राजेश खोब्रागड़े ने खोजने की कोशिश की, लेकिन नहीं मिलने पर उन्होंने प्रसन्नजीत को मरा हुआ मान लिया. 2021 के आखिरी दिन 29 साल बाद पाकिस्तान की जेल से छूटे कुलजीत सिंह कछवाहा ने परिजनों को उनके पाकिस्तान की जेल में बंद होने की जानकारी दी.

Related Articles

Back to top button