February 11, 2026 10:22 pm
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महाशिवरात्रि 2026 शुभ मुहूर्त: सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी शिव पूजा, नोट कर लें निशिता काल का समय

रायपुर : 15 फरवरी रविवार के दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. इस बार महाशिवरात्रि में श्रवण नक्षत्र के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि का संयोग बन रहा है.इस दिन भगवान भोलेनाथ की विधि विधान से पूजा की जाती है. हर साल महाशिवरात्रि फागुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान से पूजा आराधना करने के साथ ही व्रत रखने का भी विधान है.

दो दिन पड़ रही है चतुर्दशी

इस साल चतुर्दशी तिथि 2 दिन होने के कारण लोगों में महाशिवरात्रि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, लेकिन ज्योतिष की माने तो 15 फरवरी के दिन ही महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा. महाशिवरात्रि के दिन निशिथ काल में पूजा करना उत्तम माना गया है. वैसे तो महाशिवरात्रि के दिन चार पहर की पूजा होती है. खासतौर पर महाशिवरात्रि के दिन रात्रि कालीन पूजा का फल विशेष रूप से भक्तों को मिलता है.

शिवरात्रि की शुरुआत 15 फरवरी को शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होकर 16 फरवरी की सुबह 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी. शिवरात्रि में श्रवण नक्षत्र एक साधारण सा मामला है, लेकिन श्रवण नक्षत्र के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग लगभग 8 से 16 साल के बीच में आता है. ऐसा रेयर मुहूर्त होता है जो की शिवरात्रि में श्रवण नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग है. शिवरात्रि में यदि हम भगवान की आराधना और उपासना करें तो हमें बहुत आसानी से हमारी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है- पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी,ज्योतिषाचार्य

शिव और पार्वती की विवाह की मान्यता

महाशिवरात्रि के दिन शिव और पार्वती के विवाह को लेकर पंडित प्रिया शरण त्रिपाठी का कहना है कि शिव पुराण स्कंद पुराण और दूसरे ग्रंथों का अध्ययन करें तो अगहन महीने के सोमवार के दिन रोहिणी नक्षत्र था. तब शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. कुछ जगहों पर यह भी लिखा है कि वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को शिव पार्वती का विवाह होता है. लेकिन लोक कथाओं में शिवरात्रि के दिन शिव पार्वती के विवाह का उत्सव मनाया जाता है, तो लोक गाथा और लोक परंपराओं में प्रचलित हुआ. अन्यथा जो अगहन महीने की सोमवार रोहिणी नक्षत्र में भगवान शिव का विवाह हुआ ऐसी मान्यता प्रबल है.

‘थोड़ी पूजा में प्रसन्न हो जाते हैं भोलेनाथ’

पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी के मुताबिक भगवान भोलेनाथ बहुत जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं ऐसे भगवान आशुतोष को प्रसन्न करने के लिए जटिल या कठिन पूजा की आवश्यकता नहीं है. भगवान नीलकंठ हलाहल को धारण करने वाले हैं. महाशिवरात्रि के दिन प्रात काल स्नान करके संकल्प कर लें कि आज हम महाशिवरात्रि का व्रत करेंगे. पूजा की सामग्री बेलपत्र, धतूरा, दूध, दही, शहद, आक का फूल, आक के फल और शमी के फूल एकत्र करके शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव का अभिषेक करें. ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. पंडित या आचार्य मिल जाए तो रुद्राभिषेक करवा लें.

शिवरात्रि के दिन पूजन का समय
शिवरात्रि को शिवरात्रि क्यों कहा जाता है. इस सवाल के जवाब पर उन्होंने कहा कि ऐसे में शिवरात्रि के दिन रात्रि में उपासना करना बहुत अच्छा माना जाता है. शिवरात्रि का पूजन मुहूर्त 15 फरवरी की शाम 5 बजकर 4 मिनट से शुरू होगा. निशीथ काल में पूजनमुहूर्त रात 12 बजकर 09 मिनट से लेकर रात्रि 1 बजे तक है. 15 और 16 फरवरी की मध्यरात्रि. महाशिवरात्रि के दिन पहले पहर की पूजा 15 फरवरी की शाम 6 बजकर 10 से लेकर रात्रि 9 बजकर 23 मिनट तक, दूसरे पहर की पूजा रात को 9 बजकर 23 से लेकर रात्रि 12 बजकर 36 तक, तीसरे पहर की पूजा 12 बजकर 36 से लेकर 3 बजकर 48 तक और चौथे पहर की पूजा सुबह 3 बजकर 48 से लेकर 6 बजकर 59 तक की जा सकती है.

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