MP News: मध्य प्रदेश में नहीं बिकेगी कोई सरकारी संपत्ति, वित्त मंत्री ने विधानसभा में दिया साफ जवाब

जबलपुर: मध्य प्रदेश की कोई भी संपत्ति बिकाऊ नहीं है. कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल ने विधानसभा में मध्य प्रदेश की संपत्तियों को लेकर सवाल पूछा था. जिसके जवाब में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया है कि मध्य प्रदेश में फिलहाल सरकारी संपत्तियों का वितरण रुका हुआ है. जबलपुर की एक समाजसेवी संस्था ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका लगाई थी. जिसमें सरकारी संपत्तियों के बिक्री को चुनौती दी गई थी.
नागरिक उपभोक्ता मंच ने लगाई याचिका
जबलपुर में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच नाम की एक सामाजिक संस्था है. इस संस्था ने जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 500 से ज्यादा जनहित याचिकाएं लगाई हैं, जिनमें कई बड़े फैसले भी सामने आए. नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पदाधिकारी मनीष शर्मा ने बताया कि “2022 में सरकार ने उज्जैन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति को नीलाम किया. जिसे बाजार से कम कीमत में किसी नेता के परिचित बिल्डर को दे दिया गया था. इसके बाद सबसे ज्यादा संपत्तियों को बेचने के लिए एक निविदा निकाली गई थी.”
मनीष शर्मा ने जब इस मामले की पड़ताल की तो पता लगा की सरकार ने लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का 2016 में गठन किया था. जिसका काम ही खाली पड़े हुए सरकारी संपत्तियों को बेचने का था. दरअसल सरकार की कई योजनाओं में या तो निजी संपत्तियों का अधिग्रहण किया जाता है या फिर सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य किए जाते हैं.
जिस तरह की सड़क परिवहन विभाग लंबे समय तक सरकारी बसों को चलाता था, इसलिए सभी शहरों में सड़क परिवहन विभाग के बस स्टैंड थे, लेकिन जब सरकारी बसें चलना बंद हो गई, तो हर शहर के बीच में बस स्टैंड की जमीन भी खाली हो गई. इसी तरह सिंचाई विभाग और कई ऐसे विभाग हैं, जिनकी संपत्तियां योजनाएं खत्म होने के बाद लावारिस हालत में पड़ी हुई है.
साल 2022 तक बेची गई 500 करोड़ की संपत्ति
सरकार ने ऐसी ही पड़ी वेश कीमती जमीनों को बेचने के लिए लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग बनाया था. विभाग अपने गठन के बाद से 2022 तक लगभग 500 करोड़ की संपत्तियां बेच चुका था. मनीष शर्मा ने नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से अपनी आपत्ति दर्ज करवाई कि सरकार को जमीन बेचनी नहीं चाहिए बल्कि इसका कोई दूसरा प्रबंध करना चाहिए. जब सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया, तब मनीष शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में इस मामले में एक जनहित याचिका दायर की.

जनहित याचिका में भी 2022 से लेकर अब तक कोई जवाब नहीं आया था. हालांकि सरकार ने इस बीच में कोई संपत्ति नहीं बेची. विभाग की ओर से अंतिम बार संपत्ति बेचने का प्रयास 2024 में किया गया था. उस समय भी पूरे प्रदेश की कई संपत्तियों को बेचने की तैयारी थी. इन संपत्तियों में जबलपुर के सड़क परिवहन विभाग के एक बड़े डिपो को भी बेचा जा रहा था.
बीते 4 सालों में नहीं बेची गई कोई सरकारी संपत्ति
जनहित याचिका की सुनवाई चलती रही, लेकिन सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं आया. अभी बजट सत्र की सुनवाई के दौरान 2026 में कांग्रेस विधायक देवेंद्र पटेल ने मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री से सवाल किया था कि मध्य प्रदेश में फिलहाल कितनी सरकारी संपत्तियों बेची जा रही हैं. इसके जवाब में मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि “बीते 4 सालों से मध्य प्रदेश की कोई भी सरकारी संपत्ति नहीं बेची गई है. फिलहाल भी ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है.”
मनीष शर्मा का कहना है कि “भले ही सरकार ने जनहित याचिका में अपना जवाब नहीं दिया है, लेकिन विधानसभा में आए मंत्री के जवाब नहीं है. स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल मध्य प्रदेश की कोई सरकारी संपत्ति बिकाऊ नहीं है.”




