April 4, 2026 5:20 am
ब्रेकिंग
एसएसपी शशि मोहन सिंह द्वारा लिखित, निर्देशित और अभिनीत बहुप्रतीक्षित शॉर्ट फिल्म "ख़ौफ़ - द डिजिटल व... पुडुचेरी में पीएम मोदी का 'शक्ति प्रदर्शन'! फूलों की बारिश और 'भारत माता की जय' के नारों से गूंजा शह... नारी शक्ति वंदन बिल में इतनी 'जल्दबाजी' क्यों? चुनावी मास्टरस्ट्रोक या कोई बड़ा बदलाव; पर्दे के पीछे... क्या BJP में शामिल होने वाले हैं राघव चड्ढा? आतिशी की 'रहस्यमयी मुस्कान' ने बढ़ा दी सियासी हलचल! छोटी बहन का खौफनाक 'डेथ प्लान'! प्रेमी के साथ मिलकर बड़ी बहन के आशिक को उतारा मौत के घाट; चाकू से गो... Meerut Crime: फौजी पति की हत्या के पीछे निकली अपनी ही पत्नी, प्रेमी के साथ मिलकर रचा था मौत का तांडव Noida Weather Update: नोएडा में बदला मौसम का मिजाज, आंधी-बारिश ने दी दस्तक; किसानों के चेहरे पर छाई ... AAP में खलबली! राघव चड्ढा के समर्थन में उतरे भगवंत मान; बोले— "जेल और जांच से नहीं डरते केजरीवाल के ... नोएडा की सड़कों पर 'मौत' का पहरा! आवारा कुत्तों ने पूर्व अधिकारी को बुरी तरह नोंचा; लहूलुहान हालत मे... बंगाल चुनाव में 'सुरक्षा' पर संग्राम! TMC से जुड़े लोगों के साथ 2100 पुलिसकर्मी तैनात; चुनाव आयोग ने...
देश

“नेताजी की अस्थियां कहां हैं?”—सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार; याचिकाकर्ता से पूछा ऐसा सवाल कि बंद हो गई बोलती!

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियां वापस लाने संबंधी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. ये याचिका नेताजी के रिश्ते में एक पोते द्वारा दायर की गई थी, जिसमें टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से अस्थियों को भारत वापस लाने के निर्देश दिए जाने का अनुरोध किया गया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने जब याचिका पर विचार करने की अनिच्छा जताई तो याचिकाकर्ता आशीष राय की ओर से पेश वकील अभिषेक सिंघवी ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसकी पीठ ने अनुमति दे दी.

इससे पहले सिंघवी ने पीठ से कहा, मैं परिवार के उन सदस्यों की ओर से पेश हो रहा हूं जो अस्थियों का सम्मानपूर्वक विसर्जन करना चाहते हैं. इस पर सीजेआई ने पूछा कि यह मुद्दा न्यायालय के सामने कितनी बार आएगा? पिछले साल ही न्यायालय ने एक याचिका खारिज की थी. सिंघवी ने कहा कि यह वह मुद्दा नहीं था, जो पहले अदालत के समक्ष आया था.

सबसे पहली बात, अस्थियां कहां हैं?

सीजेआई ने कहा, सबसे पहली बात, अस्थियां कहां हैं? इसका क्या सबूत है? बोस हमारे राष्ट्र के महानतम नेताओं में से एक थे और हम सभी उनके बलिदान को नमन करते हैं. सिंघवी ने कहा, यह दर्ज है कि भारत के हर राष्ट्राध्यक्ष ने जापान के रेंकोजी मंदिर में श्रद्धांजलि अर्पित की थी. न्यायालय ने पहले जिस मामले पर विचार किया था, वह यह घोषित करने के बारे में था कि बोस की मृत्यु हुई है या नहीं.

परिवार के कितने सदस्य याचिका के समर्थन में?

पीठ ने कहा, सबसे पहले हम ये जानना चाहेंगे कि परिवार के कितने सदस्य इस याचिका का समर्थन कर रहे हैं? इस पर सिंघवी ने कहा कि बोस की एकमात्र उत्तराधिकारी उनकी 84 साल की बेटी हैं, याचिकाकर्ता उनके रिश्ते के पोते हैं. पीठ ने कहा, बेटी हमारे सामने उपस्थित नहीं हैं. अगर उत्तराधिकारी अस्थियों को देश में लाना चाहती हैं तो उन्हें अदालत के सामने पेश होना होगा.

हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं

सिंघवी ने कहा, बेटी ऑनलाइन माध्यम से अदालत में मौजूद हैं. इस पर पीठ ने कहा कि हम उनकी भावनाओं का सम्मान करते हैं. हम यह तय करेंगे कि उनकी भावनाओं को कानूनी कार्रवाई में बदला जाए लेकिन उन्हें आगे आना होगा. हमारी जानकारी के अनुसार घटना को लेकर परिवार में ही मतभेद हैं.

Related Articles

Back to top button