Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Kabirdham Crime News: गौ सेवा आयोग अध्यक्ष की गाड़ी रोकी; नशे में धुत युवकों ने किया हंगामा, पुलिस ने... Jharkhand T20 League 2026: रांची टाइटंस बनी नई टेबल टॉपर; धनबाद डायमंड्स को हराकर हासिल की शानदार जी... Ranchi RSS Office Attack: रांची में आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला; CCTV में कैद हुई साजिश Simdega News: सिमडेगा में मनरेगा जॉब कार्ड फर्जीवाड़ा; फर्जी तरीके से बदले गए वर्ग और निकाली गई सरका... Jharkhand ATS News: अब सीआईडी के अधीन काम करेगी झारखंड एटीएस; डीजीपी ने जारी किए नए निर्देश Tata Zoo Jamshedpur News: टाटा जू की मशहूर शेरनी 'जोया' का 16 साल की उम्र में निधन; बीमारी के कारण त... Jharkhand Weather Alert: झमाझम बारिश के आसार; मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट, भीषण गर्मी से मिले... Ranchi Crime News: रांची में फिर पेट्रोल बम का कहर; पंडरा में वाइन शॉप को फूंका, CCTV में कैद हुई कर... National Award: रांची का झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय पूरे देश में नंबर 1; स्वच्छ एवं हरित विद्यालय... Jalandhar Firing News: रतन नगर में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग; एक युवक को लगी गोली, इलाके में फैली दहश...

Supreme Court Verdict: विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार; सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी व्यवस्था को किया रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति और अनुकंपा के आधार पर लाइसेंस पाने की पूरी तरह पात्र हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने अपने निर्णय में कहा कि केवल ‘वैवाहिक स्थिति’ के आधार पर किसी पुत्री को कल्याणकारी योजनाओं से वंचित करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन भी है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें विवाहित पुत्री को परिवार की परिभाषा में शामिल नहीं किया गया था।

📜 क्या था मामला?

याचिकाकर्ता एक विवाहित पुत्री थी, जो अपनी मां के साथ रहकर उचित मूल्य की दुकान चलाती थी और अपनी शारीरिक रूप से अक्षम बहन की देखभाल करती थी। मां के निधन के बाद उसने दुकान के लाइसेंस के लिए आवेदन किया, लेकिन उसे विवाहित होने के कारण ‘परिवार’ की परिभाषा से बाहर बताकर आवेदन खारिज कर दिया गया। उसने 2019 के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी, जो विवाहित पुत्रियों को इस अधिकार से वंचित करता था।

💡 अदालती तर्क: विवाह पात्रता में बाधा नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने रंजना मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय को आधार मानते हुए कहा कि वैवाहिक स्थिति किसी पात्र पुत्री को सरकारी लाभ से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकती। कोर्ट ने विमल श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2015) मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें ‘अविवाहित’ शब्द के प्रयोग को ही भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक माना गया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि विवाहित पुत्री यदि सभी शर्तों को पूरा करती है और अपने माता-पिता पर आश्रित है, तो उसे नियुक्ति या लाइसेंस से वंचित नहीं किया जा सकता।

✅ चार सप्ताह के भीतर लाइसेंस जारी करने का आदेश

फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता को चार सप्ताह के भीतर उचित मूल्य की दुकान का लाइसेंस जारी करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलकर्ता का विवाह के बाद भी माता-पिता के साथ रहना और दुकान में सहयोग करना उसे पूरी तरह से आश्रित और योग्य सिद्ध करता है। यह निर्णय देशभर की लाखों विवाहित बेटियों के लिए एक बड़ी राहत और न्याय की जीत है।

संपादकीय टिप्पणी: सर्वोच्च अदालत का यह फैसला लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। क्या आपको लगता है कि इस तरह के न्यायिक हस्तक्षेप के बाद अब सरकारी नियमों में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है? अपने विचार नीचे साझा करें।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.