Bihar Hospital Fire: मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में भीषण आग; 3 मरीजों की मौत, स्टाफ पर लगा मरीजों को छोड़कर भागने का आरोप
बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल में लगी भीषण आग के बाद पीड़ित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिजनों ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सुबह जब आईसीयू (ICU) में आग लगी, तो पूरा स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर मौके से फरार हो गया। एक पीड़ित परिवार ने रोते हुए दावा किया कि हादसे में उनके पिता की मौत हो गई है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन उनके पिता का शव तक उन्हें नहीं सौंप रहा है। घटना के बाद से ही कई स्टाफ सदस्य अस्पताल परिसर से गायब हैं, जिससे परिजनों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
🔥 सुरक्षा मानकों की धज्जियां: 13 बेड के वार्ड में 15 मरीज
यह दर्दनाक हादसा ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू वार्ड में तड़के सुबह करीब 3 बजे हुआ। माना जा रहा है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी, जिसने देखते ही देखते पूरे वार्ड को अपनी चपेट में ले लिया। प्रशासनिक जांच में अस्पताल की भारी लापरवाही सामने आई है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने पुष्टि की है कि जिस आईसीयू वार्ड में केवल 13 बेड की क्षमता थी, वहां नियमों को ताक पर रखकर 15 मरीजों को भर्ती किया गया था। इस हादसे में अब तक 3 मरीजों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो चुकी है।
🚒 रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक जांच के घेरे में प्रबंधन
घटना की सूचना मिलने पर दमकल की आधा दर्जन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए करीब 25 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया गया है। स्थानीय लोगों और परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का फायर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से ‘शोपीस’ बना हुआ था, जो जरूरत के समय काम ही नहीं आया। प्रशासन ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिया है।
संपादकीय टिप्पणी: अस्पतालों में आग की घटनाएं सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी को दर्शाती हैं। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को निजी अस्पतालों के फायर ऑडिट और मैनपावर की अचानक जांच को अनिवार्य कर देना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।
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