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Google New Project: अब पुराने स्मार्टफोन बनेंगे सुपर कंप्यूटर! डेटा सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने की तैयारी

नई दिल्ली: हम में से अधिकांश लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल कुछ सालों तक ही करते हैं और फिर उन्हें दराज में बंद कर देते हैं या फेंक देते हैं। लेकिन अब गूगल ई-वेस्ट (E-Waste) कम करने और पुराने उपकरणों को पुनर्जीवित करने के लिए एक क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। कंपनी पुराने स्मार्टफोन को छोटे डेटा सेंटर के रूप में इस्तेमाल करने की तकनीक विकसित कर रही है, जो भविष्य के क्लाउड कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है।

⚙️ कैसे काम करेगा यह कंप्यूटिंग सिस्टम?

गूगल ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो के साथ मिलकर “फोन क्लस्टर कंप्यूटिंग” पर शोध शुरू किया है। इस प्रक्रिया में पुराने फोन के उन हिस्सों को हटा दिया जाता है जिनकी जरूरत नहीं है, जैसे—डिस्प्ले, कैमरा और बैटरी। केवल मदरबोर्ड को सुरक्षित रखा जाता है, जिसमें प्रोसेसर, मेमोरी और स्टोरेज होते हैं। इन्हें आपस में जोड़कर लिनक्स-आधारित एक शक्तिशाली नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।

🖥️ 50 फोन मिलकर करेंगे सर्वर का काम

रिसर्च के अनुसार, मात्र 25 से 50 पुराने स्मार्टफोन मिलकर एक आधुनिक सर्वर जैसी क्षमता देने में सक्षम हैं। यदि हज़ारों डिवाइस को जोड़ दिया जाए, तो ये बड़े क्लाउड सेवाओं के वर्कलोड को आसानी से संभाल सकते हैं। इन ‘फोन क्लस्टर’ को Kubernetes जैसे सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म से मैनेज किया जाता है, जिसका उपयोग आज दुनिया के सबसे बड़े डेटा सेंटर्स में होता है।

🚀 भविष्य का लक्ष्य: 2,000 पिक्सल फोन्स का क्लस्टर

इस प्रोजेक्ट का अगला बड़ा लक्ष्य करीब 2,000 गूगल पिक्सल स्मार्टफोन को जोड़कर एक विशाल कंप्यूटिंग क्लस्टर तैयार करना है। वैज्ञानिक यह देखना चाहते हैं कि उपभोक्ता स्तर के डिवाइस डेटा सेंटर जैसे कठिन माहौल में कैसा प्रदर्शन करते हैं। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए वरदान साबित होगा, बल्कि नए सर्वर हार्डवेयर बनाने की लागत को भी काफी हद तक कम कर देगा।

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