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Indian Army Uniform Policy 2026: भारतीय सेना में बड़े बदलाव; गुलामी की निशानियाँ होंगी खत्म, नई गाइडलाइन्स जारी

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अपनी सैन्य परंपराओं और यूनिफॉर्म में बड़े बदलाव करते हुए औपनिवेशिक काल की कई निशानियों को हटाने का निर्णय लिया है। ‘आर्मी यूनिफॉर्म-2026’ के तहत जारी नई गाइडलाइन का उद्देश्य भारतीय सैन्य विरासत को आधुनिक सोच और स्वदेशी पहचान के साथ जोड़ना है। सेना का मानना है कि ये बदलाव देश की बदलती और सशक्त सैन्य छवि को प्रदर्शित करेंगे।

⚔️ परंपराओं में बदलाव: तलवार के इस्तेमाल पर सीमाएं

नई गाइडलाइन के अनुसार, अब परेड के दौरान रिव्यूइंग अफसर के लिए तलवार रखना अनिवार्य नहीं होगा। तलवार का उपयोग केवल कुछ चुनिंदा अधिकारियों (जैसे परेड कमांडर और कंटिंजेंट कमांडर) तक सीमित कर दिया गया है, वह भी केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे विशिष्ट समारोहों में। साथ ही, औपनिवेशिक दौर से चले आ रहे ‘रॉयल’ जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।

👕 नई यूनिफॉर्म और ड्रेस कोड

  • स्वदेशी जैकेट: फॉर्मल सिविल ड्रेस में अब स्वदेशी बंद गले वाली ‘बंदी जैकेट’ को शामिल किया गया है।

  • महिला अधिकारियों के नियम: महिला अधिकारियों के लिए साड़ी, दुपट्टे के साथ कुर्ता-सलवार और स्ट्रेट पैंट पहनने की अनुमति दी गई है। हालांकि, स्लीवलेस कुर्तों और सिगरेट पैंट पर रोक रहेगी।

  • ग्रूमिंग रूल्स: लिपस्टिक, रंगीन नेल पॉलिश, नोज पिन और बिंदी पर प्रतिबंध लगाया गया है। मूंछों की लंबाई 12 सेमी से अधिक नहीं हो सकती। पूजा के पवित्र धागे के अतिरिक्त अन्य कोई धार्मिक चिह्न या ब्रेसलेट पहनने की अनुमति नहीं होगी।

🚫 अनुशासन और व्यवहार संबंधी निर्देश

सेना ने व्यक्तिगत अनुशासन को लेकर भी कड़े नियम तय किए हैं। अब बिना अनुमति के किसी भी निजी, राजनीतिक या धार्मिक कार्यक्रम में यूनिफॉर्म पहनकर जाना वर्जित है। इसके अलावा, बिना अनुमति दाढ़ी रखना, अजीब हेयरस्टाइल, टैटू और दिखने वाले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स पर भी पूरी तरह बैन रहेगा। डिओ या परफ्यूम की जगह केवल आफ्टर-शेव लोशन की अनुमति दी गई है।

🌍 विरासत को सम्मान, नामकरण में बदलाव

यह बदलाव केवल यूनिफॉर्म तक सीमित नहीं है। इससे पहले सेना ने देशभर में मौजूद 246 सैन्य ठिकानों, सड़कों और इमारतों के नाम बदलकर भारतीय वीर सैनिकों के नाम पर रखे हैं। ‘किर्बी प्लेस’ का नाम बदलकर ‘केनुरुसे विहार’ और ‘मॉल रोड’ का ‘अरुण खेत्रपाल मार्ग’ करना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है। सेना का लक्ष्य अपनी गौरवशाली भारतीय विरासत को आधुनिकता के साथ जोड़कर आगे बढ़ना है।

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