MP High Court: दागदार अधिकारी को नहीं मिल सकता चीफ इंजीनियर का प्रभार; हाईकोर्ट ने PWD को दिए सख्त निर्देश
जबलपुर: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों पर वित्तीय गबन और पुल ढहने जैसे गंभीर आरोप हैं, उन्हें किसी भी स्थिति में चीफ इंजीनियर (Chief Engineer) का अतिरिक्त प्रभार नहीं सौंपा जा सकता। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक अनुशासन के विरुद्ध माना है।
🚧 पुल ढहने और गबन के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता पीसी वर्मा की ओर से दायर याचिका में खुलासा किया गया कि जिस अधिकारी (संजय कुमार) को भोपाल ब्रिज जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, उस पर पहले से ही पुलों के ढहने और 1,000 बिस्तरों वाले अस्पताल प्रोजेक्ट में करोड़ों रुपये के वित्तीय गबन के आरोप हैं। कोर्ट ने कहा कि विभाग ने आरोपी को अपनी ही जांच प्रक्रिया की निगरानी करने की अनुमति दे दी, जो कानूनी रूप से गलत है।
🏛️ “अस्थायी प्रभार का दुरुपयोग नहीं”
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक छूट का इस्तेमाल कानूनी पात्रता शर्तों को दरकिनार करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि:
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चीफ इंजीनियर का अतिरिक्त प्रभार केवल उसी अधिकारी को सौंपा जाए जिसका सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह ‘निष्कलंक’ (बेदाग) हो।
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नियमों को ताक पर रखकर जूनियर अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर बैठाने से विभाग का अनुशासन बिगड़ता है।
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रेगुलर प्रमोशन के लिए बनाए गए ‘जोन ऑफ कंसीडरेशन’ को नजरअंदाज करना अनुचित है।
⚠️ प्रमुख सचिव को सख्त चेतावनी
कोर्ट ने PWD के प्रमुख सचिव को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस आदेश को हल्के में न लें। पूर्व में मांगे गए स्पष्टीकरण के बजाय सामान्य जवाब दाखिल करने पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। भविष्य के लिए निर्देश दिए गए हैं कि उच्च पदों पर किसी भी प्रभार के लिए योग्यता और बेदाग रिकॉर्ड को प्राथमिकता दी जाए। हाईकोर्ट ने अब विभाग को निर्देशित किया है कि वह तत्काल प्रभाव से योग्य और पात्र अधिकारी को भोपाल ब्रिज जोन की जिम्मेदारी सौंपे।
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