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Datia News: दतिया के मंदिर में ताजियों की सलामी; 200 साल पुरानी परंपरा से दिखी हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर कस्बे से भाईचारे की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया है। शुक्रवार रात मोहर्रम के मौके पर जब ताजियों का जुलूस निकला, तो भांडेर के प्रसिद्ध चतुर्भुज नारायण मंदिर के सामने रुककर 37 ताजियों ने भगवान को सलामी दी। इस दौरान मंदिर के पुजारियों ने ताजियों पर फूल-मालाएं अर्पित कर उनका भव्य स्वागत किया, जो गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत उदाहरण बना।

🕌 200 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

यह अद्भुत नजारा पिछले 200 वर्षों से अधिक समय से चला आ रहा है। जब जुलूस पारंपरिक मार्ग से गुजरा, तो सभी 37 ताजिए एक-एक कर मंदिर के सामने आकर रुक गए। इस पल को देखने के लिए हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों की भारी भीड़ जमा थी। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच दोनों समुदायों ने एक-दूसरे का सम्मान करते हुए इस परंपरा को निभाया।

📜 मंदिर का इतिहास और हजारी परिवार का योगदान

चतुर्भुज नारायण मंदिर का इतिहास स्वयं हिंदू-मुस्लिम एकता की कहानी कहता है। मान्यताओं के अनुसार, बरसों पहले कस्बे के सोंतलाई तालाब से भगवान चतुर्भुज नारायण की मूर्ति स्थानीय मुस्लिम ‘हजारी परिवार’ को मिली थी। उस परिवार ने न केवल मंदिर की स्थापना कराई, बल्कि उसके रखरखाव के लिए अपनी भूमि भी दान कर दी थी।

👵 परम्परा का अटूट विश्वास

बुजुर्गों के अनुसार, आजादी से पहले की यह परंपरा आज भी कायम है कि कोई भी धार्मिक जुलूस तब तक आगे नहीं बढ़ता जब तक हजारी परिवार का कोई सदस्य वहां उपस्थित न हो। वर्तमान में परिवार की एक बुजुर्ग महिला ही बची हैं, जो स्वास्थ्य कारणों से बीमार रहती हैं। शुक्रवार रात विशेष रूप से उन्हें पालकी में बैठाकर मंदिर लाया गया, और उनके आशीर्वाद के बाद ही ताजियों का काफिला आगे बढ़ा।

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