Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
गांदरबल में बड़ा हादसा! अमरनाथ श्रद्धालुओं से भरी बस खाई में गिरी, 39 यात्री घायल; सेना ने चलाया रेस... लखनऊ में दरोगा ने काटा बिजली कर्मी का ₹6000 का चालान, गुस्साए कर्मचारियों ने थाने-चौकी की काटी बिजली... श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान! रवींद्र जडेजा की वापसी, सारांश जैन को मिला ... थलपति विजय की 'जन नेता' ने मंडे टेस्ट किया पास! 5वें दिन की इतनी कमाई, 300 करोड़ क्लब से बस इतनी दूर अमेरिका और ईरान की जंग से दहला मध्य पूर्व, अमेरिकी हथियारों की खपत के बीच ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क स... BHIM ऐप की मार्केट में धमाकेदार वापसी! 2 सालों में 10 गुना बढ़े मंथली ट्रांजैक्शन, PhonePe-GPay को च... स्मार्टफोन में गूगल मैप्स इस्तेमाल करते हैं? ऑन करें ये 4 सीक्रेट सेटिंग्स, बचेगा पेट्रोल और नहीं कट... मंगलवार को करें हनुमान जी के 5 शक्तिशाली मंत्रों का जप; दूर होंगे रोग, दोष और भय, मिलेगी सुख-समृद्धि नाश्ते की ये गलतियां बढ़ा सकती हैं 'बैड कोलेस्ट्रॉल'! कार्डियोलॉजिस्ट से जानिए दिल को सेहतमंद रखने क... सीजेपी के 'संसद चलो' मार्च में शामिल 1,000 लोगों का निकला आपराधिक रिकॉर्ड; दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट म...

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: दुष्कर्म और POCSO के झूठे मामले में फंसे बेगुनाह युवक की FIR रद्द

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और पेचीदा कानूनी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दुष्कर्म और POCSO एक्ट के झूठे आरोपों में फंसे एक बेगुनाह युवक के खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) को पूरी तरह निरस्त कर दिया है। जस्टिस राकेश कैंथला की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि जब वैज्ञानिक साक्ष्यों ने आरोपी को पूरी तरह बेगुनाह साबित कर दिया है, तो उसे आपराधिक मुकदमे की मानसिक और कानूनी प्रताड़ना झेलने के लिए विवश नहीं किया जा सकता।

📝 क्या था पूरा मामला और कैसे दर्ज हुआ था केस?

इस मामले की शुरुआत साल 2023 में बिलासपुर जिले के महिला पुलिस स्टेशन से हुई थी। नाबालिग पीड़िता के बयानों के आधार पर आयुष नाम के युवक पर आईपीसी की धारा 376, 506 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया गया था। आरोप लगाया गया था कि आयुष ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया, जिससे पीड़िता गर्भवती हुई और उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

🧬 फॉरेंसिक लैब की डीएनए (DNA) जांच में निकला सच

अदालत में मामले का रुख तब पूरी तरह बदल गया जब वैज्ञानिक साक्ष्य सामने आए। पुलिस जांच के दौरान जब पीड़िता, नवजात शिशु और आरोपी आयुष के सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजे गए, तो आयुष का DNA बच्चे से बिल्कुल मैच नहीं हुआ। इसके बाद जब अन्य संदिग्धों के DNA सैंपल की जांच की गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पीड़िता का सगा भाई ही उस नवजात शिशु का जैविक (बायोलॉजिकल) पिता निकला।

🔍 पीड़िता का पूरक बयान और अदालत का आदेश

एफएसएल (FSL) रिपोर्ट सामने आने के बाद पीड़िता ने पुलिस के समक्ष अपना पूरक बयान दर्ज कराया और स्वीकार किया कि उसके सगे भाई ने ही उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। इन पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाणों और पीड़िता के बदले बयानों के आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि आरोपी आयुष पर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार थे, जिसके बाद अदालत ने उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज कर दिया।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.