कोरबा के अजगरबहार में मिला अब तक का सबसे छोटा 6 फीट का किंग कोबरा, सफल रेस्क्यू के बाद जंगल में किया आजाद
कोरबा (छत्तीसगढ़): अति-विषैले और दुनिया के सबसे लंबे जहरीले सांप ‘किंग कोबरा’ का प्राकृतिक आवास क्षेत्र ऊर्जाधानी कोरबा शहर बन चुका है। बालको फॉरेस्ट रेंज तथा हसदेव अरण्य के सघन आवरण के कारण यहाँ विशालकाय सर्पों की उपस्थिति अत्यधिक पाई जाती है। संपूर्ण मध्य भारत में कोरबा ही एकमात्र ऐसा भौगोलिक क्षेत्र है, जहाँ दुर्लभ किंग कोबरा की प्राकृतिक मौजूदगी स्थापित हुई है। इसके संरक्षण एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग द्वारा अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों को चिह्नित कर विशेष सुरक्षा इंतज़ाम किए गए हैं।
🐍 अजगरबहार में मिला 6 फीट का युवा किंग कोबरा, जंगलों में सफल प्रजनन की हुई पुष्टि
जिले के वनांचल क्षेत्र अजगरबहार में गुरुवार को अब तक के सबसे छोटे किंग कोबरा का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया।
इस किंग कोबरा की लंबाई लगभग 6 फीट तथा संभावित आयु 2 से 3 वर्ष के मध्य आंकी गई है। पूर्व में जितने भी किंग कोबरा जिले से बरामद हुए थे, वे सभी वयस्क थे जिनकी लंबाई 12-13 फीट से लेकर 17-18 फीट तक नापी गई थी। मात्र 6 फीट लंबे इस युवा किंग कोबरा के मिलने से इस बात की प्रत्यक्ष पुष्टि हो गई है कि कोरबा के जंगल किंग कोबरा के अनुकूल हैं और यहाँ इनका सफल प्रजनन हो रहा है।
🏠 देर रात तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, ‘पहाड़ चित्ती’ सुनकर पहुंची वाइल्डलाइफ टीम
बालको वन परिक्षेत्र के गांव अजगरबहार में लवभूषण प्रताप सिंह तंवर के आवास के बाथरूम से इस युवा सांप को रेस्क्यू किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय बोली में ‘पहाड़ चित्ती’ कहा जाने वाला सांप छिपकर बैठा है। नाम सुनते ही सर्पमित्रों को किंग कोबरा की उपस्थिति का आभास हुआ और तत्काल वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम (नोवा नेचर) के सदस्य राजू बर्मन, राकेश मानिकपुरी, कमलेश गोड व नरेश गोड मौके पर पहुंचे। वन अधिकारियों की देखरेख में इसे सुरक्षित थैले में बंद किया गया और तत्पश्चात डिप्टी रेंजर अनिल कंवर ने पंचनामा प्रक्रिया पूर्ण कर इसे घने जंगल में सुरक्षित मुक्त कर दिया।
🌿 “पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है किंग कोबरा का संरक्षण”: सर्पमित्र जितेंद्र सारथी
सर्पमित्र जितेंद्र सारथी ने बताया कि किंग कोबरा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 (Schedule-1) के तहत एक अत्यंत संरक्षित प्रजाति है।
यह पारिस्थितिकी तंत्र की खाद्य श्रृंखला (Food Chain) में ‘अपेक्स स्पीशीज’ का दर्जा रखता है। किंग कोबरा मुख्य रूप से अन्य जहरीले सर्पों का शिकार करता है, जिससे प्राकृतिक रूप से जहरीले सांपों की आबादी संतुलित रहती है और जंगल का पर्यावरण स्वस्थ बना रहता है। कोरबा में छोटे किंग कोबरा का मिलना जैव विविधता की दृष्टि से बेहद शुभ संकेत है।
🌲 वन विभाग की अपील: किंग कोबरा दिखने पर तुरंत दें सूचना, छेड़ने का न करें प्रयास
वन परिक्षेत्र अधिकारी जयंत सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि क्षेत्र में कहीं भी किंग कोबरा दिखाई दे, तो उसे पकड़ने, परेशान करने या चोट पहुँचाने का कदापि प्रयास न करें।
नागरिक तत्काल वन विभाग अथवा रेस्क्यू टीम को सूचित करें ताकि त्वरित पहुंच बनाकर उसका वैज्ञानिक व सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।
📜 वर्ष 2020-21 में हुई थी आधिकारिक पुष्टि, स्थानीय लोग पुकारते हैं ‘पहाड़ चित्ती’
कोरबा जिले में वर्ष 2020-21 के दौरान आधिकारिक तौर पर किंग कोबरा की मौजूदगी दर्ज की गई थी।
यहाँ के ग्रामीण अंचलों में स्थानीय निवासी श्रद्धा एवं भयवश इसे ‘पहाड़ चित्ती’ या ‘राज नाग’ के नाम से संबोधित करते हैं। सर्वेक्षणों से स्पष्ट हुआ है कि पर्याप्त आहार और अनुकूल पारिस्थितिकी के कारण कोरबा के घने जंगल किंग कोबरा का पसंदीदा प्राकृतिक शरणस्थल बन चुके हैं।
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