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उत्तराखंड में SIR प्रक्रिया पर मचा घमासान: रुड़की में 15 हजार वोट काटने का आरोप, 20.27 लाख मतदाताओं को नोटिस

देहरादून/रुड़की (उत्तराखंड): देश भर में विपक्षी राजनीतिक दलों द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर निरंतर प्रश्न उठाए जाते रहे हैं। इसी क्रम में अब उत्तराखंड में भी SIR प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक एवं राजनीतिक घमासान तीव्र हो गया है। रुड़की की चर्चित खानपुर विधानसभा सीट पर SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जहाँ स्थानीय विधायक ने एक साथ लगभग 15 हजार वैध मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित (काटने) करने का गंभीर आरोप लगाया है। सार्वजनिक हुए एक वीडियो संदेश में विधायक ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से 15 हजार से अधिक वोट काटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के सभी बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वे किसी भी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक दबाव में न आएं, अन्यथा उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी और उन्हें जेल जाना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना निष्पक्ष जांच एवं प्रत्यक्ष सुनवाई के एक भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए।

⚖️ फर्जी आपत्तियों पर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी, सत्यापन हेतु आधार और राशन कार्ड भी मान्य

खानपुर विधायक ने सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि कतिपय असामाजिक तत्व फर्जी तरीके से एक ही व्यक्ति के नाम से 27 से 32 आपत्तियां (Objections) दर्ज करा रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस फर्जीवाड़े के आधार पर मतदाताओं के नाम काटे गए, तो वे न्याय हेतु सीधे उच्च न्यायालय (High Court) का द्वार खटखटाएंगे। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने हाल ही में SIR प्रक्रिया में प्रामाणिक सत्यापन हेतु आधार कार्ड, राशन कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे आधिकारिक पहचान पत्रों को भी मान्य घोषित किया है, जिसके पश्चात सत्यापन कार्य में तेजी आई है। यद्यपि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस विशिष्ट विवाद पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है, किंतु समूचे राज्य में SIR अभियान पर लगातार सवाल खड़े हो रहे हैं।

📜 उत्तराखंड में 20.27 लाख मतदाताओं को जारी हुए नोटिस, सीईओ और वरिष्ठ नेताओं के नाम भी शामिल

उत्तराखंड में संचालित इस व्यापक SIR अभियान के अंतर्गत अब तक राज्य निर्वाचन विभाग द्वारा आम नागरिकों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों एवं विधायकों सहित कुल 20.27 लाख मतदाताओं को औपचारिक नोटिस प्रेषित किए जा चुके हैं।

इस वृहद पुनरीक्षण अभियान की जद में आम मतदाताओं के साथ-साथ राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियां भी आ गई हैं। नोटिस प्राप्त करने वाली प्रमुख हस्तियों में स्वयं मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) डॉ. बी. पुरुषोत्तम, कुमाऊं मंडल के आयुक्त दीपक रावत, भाजपा विधायक सरिता आर्य, उमेश शर्मा, सविता कपूर, कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी तथा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के परिजन सम्मिलित हैं।

🏛️ कांग्रेस का सत्तापक्ष पर पक्षपात का आरोप, भाजपा ने बताया नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया

इस मुद्दे को लेकर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सत्तारूढ़ दल पर अपने समर्थकों को चुन-चुनकर निशाना बनाने तथा उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का गंभीर आरोप लगाया है।

इसके विपरीत, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे निर्वाचन आयोग का एक पारदर्शी और नियमित सत्यापन अभियान करार दिया है। कांग्रेस ने आशंका व्यक्त की है कि प्रथम चरण में व्यापक स्तर पर किए जा रहे संशोधनों व विलोपन से कई संवेदनशील विधानसभा क्षेत्रों का राजनीतिक एवं चुनावी संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी के दृष्टिगत पार्टी आलाकमान ने अपने बूथ कार्यकर्ताओं को दावों और आपत्तियों (Claims and Objections) की पूरी प्रक्रिया पर सूक्ष्म दृष्टि रखने के निर्देश दिए हैं।

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