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Ganesh Utsav Vidisha: बंटी नगर में सजी ‘गोकुलधाम सोसाइटी’ की अनोखी झांकी; सिद्ध गणेश मंदिर में लगी भक्तों की कतार

विदिशा। शहर का प्राचीन सिद्ध गणेश मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं और मरीजों की आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। करीब 250 वर्ष पुराने इस स्वयंभू गणपति मंदिर को लेकर स्थानीय निवासियों और क्षेत्रवासियों का दावा है कि यहां धागा या बेलपत्र बांधने तथा भगवान के दर्शन मात्र से मोतीझरा (टाइफाइड), तेज बुखार तथा अन्य असाध्य शारीरिक व्याधियां दूर हो जाती हैं।

रोजाना बड़ी संख्या में लोग न केवल धार्मिक आस्था के चलते, बल्कि बीमारियों से मुक्ति की आस लेकर मंदिर पहुंच रहे हैं।

📜 “स्वयंभू हैं गणेश जी महाराज”: पुजारी बोले— धागा बांधने से मिलता है स्वास्थ्य लाभ

विदिशा स्थित इस प्रसिद्ध गणेश मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है। मंदिर परिसर में सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। विशेष रूप से गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग यहां राहत पाने पहुंचते हैं। मंदिर में भक्त विशेष धागा बंधवाते हैं।

मंदिर के पुजारी पंडित हरि शंकर व्यास का कहना है, “ये गणेश जी महाराज स्वयंभू हैं और प्रतिमा लगभग 250 साल पुरानी है। मंदिर में आने वाले लोगों को भगवान की कृपा से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिलता है। यहां मोतीझरा, टाइफाइड, लंबे समय से आ रहा बुखार, नजर दोष और मानसिक परेशानी हाथ में धागा बांधने से दूर होती है।”

💬 श्रद्धालुओं ने साझा किए अपने अनुभव: “भगवान गणेश के प्रति हमारी अटूट आस्था है”

श्रद्धालु निधि रघुवंशी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया, “मैं और मेरा बच्चा पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार से पीड़ित हैं। हमने डॉक्टर को दिखाया है और दवाइयां भी चल रही हैं, लेकिन इसके साथ ही हम मंदिर में धागा बंधवाने आए हैं। इससे पहले भी जब स्वास्थ्य खराब हुआ था, तब आकर धागा बंधवाया था और हमें बहुत आराम मिला था। हमारे मन में भगवान गणेश के प्रति अटूट आस्था है।”

🩺 “आस्था अपनी जगह, डॉक्टरी इलाज सबसे जरूरी”: जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) की आमजन से अपील

लोगों की इस अटूट आस्था पर विदिशा के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) डॉ. पुनीत माहेश्वरी का कहना है, “धार्मिक आस्था और चिकित्सीय इलाज दो अलग-अलग पहलू हैं। मरीज के बेहतर स्वास्थ्य के लिए सही डॉक्टरी इलाज सर्वोपरि है। लोग टाइफाइड या अन्य बीमारियों के इलाज के लिए मंदिर जाते हैं और धागा बंधवाते हैं, यह पूरी तरह से लोगों की व्यक्तिगत आस्था और विश्वास का विषय है।”

डॉ. माहेश्वरी ने आगे कहा, “एक मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में मेरा यह स्पष्ट मानना है कि यदि किसी को टाइफाइड या कोई अन्य बीमारी है, तो डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का पूरा कोर्स करना अत्यंत आवश्यक है। केवल आस्था के भरोसे रहकर डॉक्टरी इलाज छोड़ देना या दवाइयां बंद कर देना सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है।”

🎪 बंटी नगर में सजी अनोखी झांकी: ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की ‘गोकुलधाम सोसाइटी’ थीम पर स्थापित हुए गणपति

विदिशा शहर में गणेशोत्सव की जबरदस्त धूम देखने को मिल रही है। शहर का बंटी नगर चौराहा अपनी अनूठी और रचनात्मक झांकियों के लिए हमेशा से ही मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा है।

इस वर्ष ‘मां विश्वेश्वरी दरबार श्री गणेश उत्सव समिति’ (बंटी नगर के राजा) द्वारा चर्चित टीवी धारावाहिक ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की प्रसिद्ध ‘गोकुलधाम सोसाइटी’ की थीम पर गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। पंडाल में प्रवेश करते ही टीवी पर दिखने वाली गोकुलधाम सोसाइटी का सजीव अहसास होता है। झांकी समिति के सदस्य जीवन शर्मा ने बताया कि इस अनूठी अवधारणा को धरातल पर आकार देने में कलाकारों को काफी समय और कड़ी मेहनत लगी है।

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