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Korba Fertilizer Crisis: दावों की खुली पोल! कोरबा में DAP और NPK खाद की भारी किल्लत, लक्ष्य से आधा भी नहीं हुआ वितरण

कोरबा। शासन-प्रशासन के तमाम दावों के विपरीत कोरबा जिले में खरीफ सीजन के दौरान खाद की भारी किल्लत बनी हुई है। कृषि विभाग द्वारा जारी स्वयं के आधिकारिक आंकड़े ही इस बात की गवाही दे रहे हैं। जिले के किसानों को फसल के लिए अत्यंत आवश्यक डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) जैसे मुख्य उर्वरक समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। स्थिति यह है कि विभाग द्वारा तय किए गए लक्ष्य का आधा भंडारण भी नहीं किया जा सका है, जिसके चलते किसानों को जरूरत से काफी कम मात्रा में खाद का वितरण हुआ है। खाद के कम भंडारण और वितरण से जुड़ी यह रिपोर्ट हाल ही में संपन्न हुई जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में पेश की गई।

📊 लक्ष्य के मुकाबले आधे से भी कम हुआ एनपीके खाद का वितरण: बुवाई के सीजन में किसान परेशान

कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 के खरीफ सीजन के लिए कोरबा जिले के किसानों को कुल 1,500 मीट्रिक टन एनपीके खाद वितरित करने का लक्ष्य रखा गया था।

इसके विपरीत, अभी तक महज 877 मीट्रिक टन एनपीके खाद ही किसानों तक पहुँचाया जा सका है। निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध अब तक सिर्फ 64 फीसदी एनपीके का ही भंडारण हो सका है। नतीजतन ऐन बुवाई और फसलों के शुरुआती विकास के दौर में किसानों को खाद के लिए सोसाइटियों और दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

📉 डीएपी की स्थिति भी दयनीय: 3500 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले महज 59% भंडारण

एनपीके की तरह ही डीएपी खाद की उपलब्धता की स्थिति भी काफी चिंताजनक बनी हुई है।

वर्ष 2026 में जिले के लिए 3,500 मीट्रिक टन डीएपी का भंडारण करने का लक्ष्य तय किया गया था। इसके विरुद्ध महज 2,084 मीट्रिक टन का ही भंडारण संभव हो पाया है, जबकि अब तक सिर्फ 1,951 मीट्रिक टन खाद ही किसानों तक पहुँचाया गया है। कुल लक्ष्य के मुकाबले महज 59 फ़ीसदी ही भंडारण होने से किसान डीएपी जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण खाद की किल्लत से बुरी तरह जूझ रहे हैं।

🥀 फसलों की सेहत और पैदावार पर पड़ेगा गंभीर असर: कृषि विशेषज्ञों ने जताई बड़ी चिंता

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई या फसल की शुरुआती बढ़त के नाजुक समय पर यदि फसलों को डीएपी या एनपीके न मिले, तो पौधों में फास्फोरस की भारी कमी हो जाती है।

इसके परिणामस्वरूप पौधों की जड़ें अविकसित और कमजोर रह जाती हैं, तना पतला हो जाता है और पौधों की सामान्य वृद्धि रुक जाती है। जरूरी पोषक तत्वों के अभाव में पौधों में फूल और फल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ जाती है, जिससे कुल उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है और किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

🏦 संपन्न किसान खुले बाजार से खरीदने को मजबूर: कृषि अधिकारियों की ढुलमुल सफाई

खाद की सरकारी किल्लत के बीच जो किसान आर्थिक रूप से थोड़े संपन्न हैं, वे सरकारी समितियों पर निर्भर न रहकर खुले बाजार से महंगे दामों पर खाद खरीदकर अपनी फसलों की सिंचाई कर रहे हैं।

वहीं, मामले पर सफाई देते हुए कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है— “निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप खाद के भंडारण का लगातार प्रयास किया जा रहा है और यह प्रक्रिया जारी है। किसानों को वैकल्पिक उपायों की भी जानकारी दी जा रही है। हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द पर्याप्त मात्रा में खाद का वितरण सुनिश्चित किया जाए ताकि पैदावार प्रभावित न हो।”

🏛️ कलेक्टर कुणाल दुदावत का बयान: “स्थिति नियंत्रण में, कृषि विभाग से ली जाएगी जानकारी”

इधर, पूरे मामले पर कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत का कहना है कि जिले में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी किसान को परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

कलेक्टर ने कहा कि किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराने और अच्छी फसल पैदावार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खाद के कम भंडारण और वितरण के आंकड़ों को लेकर उन्होंने कहा कि मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है और इस संबंध में कृषि विभाग के अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की जाएगी।

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