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Bhojshala Satyagrah Dhar: संत समाज हिंदू आस्था के इस केंद्र के लिए पूरी तरह समर्पित, मां सरस्वती की आराधना पर जोर

धार: ऐतिहासिक भोजशाला सत्याग्रह स्थल पर रविवार को जूना अखाड़ा, बड़ा हनुमान घाट वाराणसी के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सभापति श्री महंत प्रेमगिरि जी महाराज ने एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और संपूर्ण हिंदू समाज की अटूट आस्था से जुड़ा एक अत्यंत पवित्र स्थल है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक भोजशाला के पावन परिसर में मां वाग्देवी की पुनः गरिमामयी स्थापना नहीं हो जाती और हिंदू समाज को उसका पूरा हक व सम्मान नहीं मिल जाता, तब तक वे इस उद्देश्य के लिए पूरी तरह तत्पर रहेंगे और देश का पूरा संत समाज भी इसके लिए समर्पित रहेगा।

🏛️ 11वीं शताब्दी में राजा भोज ने की थी संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना

संत श्री महंत ने अपने संबोधन में कहा कि ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार 11वीं शताब्दी में महान राजा भोज ने इस स्थल पर एक भव्य संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना की थी। यह ऐतिहासिक परिसर प्राचीन काल से ही उच्च संस्कृत अध्ययन और विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। भोजशाला के भीतर स्थित हवनकुंड, कलात्मक मंडप, पत्थरों के नक्काशीदार स्तंभों पर हिंदू संस्कृति से जुड़ी अनूठी आकृतियां और संस्कृत में लिखे गए शिलालेख इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ASI के सर्वे के दौरान भी यहां देवी-देवताओं से जुड़े प्राचीन विग्रह और सनातन धर्म के स्पष्ट प्रतीक मिलने की बात सामने आई है।

🔍 बनावट पूरी तरह मंदिर जैसी, मस्जिद होने का कोई प्रमाण नहीं

समिति के आंकड़ों के अनुसार, भोजशाला का यह वैज्ञानिक सर्वे कुल 98 दिनों तक लगातार चला था। इसी का हवाला देते हुए महंत प्रेमगिरि जी महाराज ने जोर देकर कहा कि भोजशाला की वास्तुकला और पूरी बनावट एक प्राचीन भव्य मंदिर जैसी है और यहां किसी भी प्रकार की मस्जिद होने का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता है। उन्होंने दो टूक कहा कि देश का हिंदू समाज भोजशाला को पूर्ण रूप से केवल पूजा-अर्चना और उपासना के स्थल के रूप में देखना चाहता है, इसलिए इस पवित्र परिसर में किसी भी अन्य गतिविधि या नमाज के लिए उपयोग को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

🕉️ संतों को कराए गए भोजशाला के दर्शन, ज्योति मंदिर में ली अखंड ज्योति की आशीष

इस धार्मिक और महत्वपूर्ण अवसर पर सत्याग्रह समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने महंत प्रेमगिरि जी महाराज और अन्य पधारे हुए संतों को भोजशाला के चप्पे-चप्पे के दर्शन कराए तथा इसके गौरवशाली इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद सभी संतों ने पवित्र ज्योति मंदिर पहुंचकर वहां जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। समिति की ओर से अतिथियों का पारंपरिक रूप से शाल और श्रीफल भेंटकर भव्‍य सम्मान किया गया। इस दौरान समिति के अध्यक्ष सुरेश जलोदिया, महाप्रबंधक हेमंत दोराया, महामंत्री सुमित चौधरी सहित अन्य कई प्रमुख पदाधिकारी, सक्रिय सदस्य, मातृशक्ति और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस पूरे आयोजन की विस्तृत जानकारी समिति के मीडिया प्रमुख मोहन राठौर द्वारा दी गई।

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