Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Rahul Gandhi on CEC: 'ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा, PM करवाएंगे इस्तीफा', CWC बैठक में राहुल गांधी ... 'मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश', धर्मवार आंकड़े मांगने पर भड़के ओवैसी Delhi Pollution GRAP 2026: सर्दियों से पहले CAQM का बड़ा फैसला, BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल गाड़ियो... चुनाव प्रक्रिया पर फिर उठे गंभीर सवाल: महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की चिट्ठी से मचा सियासी ... BJP State Incharges Meeting: बीजेपी मुख्यालय में 4 घंटे चली मैराथन बैठक, नितिन नबीन ने प्रभारियों को... Smriti Irani on Congress: हार की बौखलाहट में चुनाव आयोग पर हमला कर रही कांग्रेस, स्मृति ईरानी का तीख... Delhi Police Drug Bust: लेडी डॉन पार्वती के घर से सोना, नकदी और 4 संपत्तियों के कागजात जब्त; अंतरराज... Ketan Agarwal Murder Case: पुणे में रूह कंपाने वाली साजिश, 5,053 पन्नों की चार्जशीट में 'डेथ कैप मशर... Agra-Lucknow Expressway Accident: फिरोजाबाद में भीषण सड़क हादसा, इटावा DFO विकास नायक और उनके ड्राइव... Former IAS Divya Mittal: पूर्व IAS दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, बिना किसी दल के बनाएंगी अपना...

MP Financial Burden: सितंबर माह में तीसरी बार लोन ले रही मोहन सरकार, कांग्रेस ने वित्तीय प्रबंधन और फिजूलखर्जी पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से बड़ी आर्थिक खबर सामने आ रही है। राज्य सरकार आगामी अनुपूरक बजट पेश करने से ठीक पहले एक बार फिर ओपन मार्केट से 1500 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज लेने जा रही है। सरकार द्वारा यह नया लोन सड़क निर्माण और बुनियादी विकास से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए लिया जा रहा है। खुले बाजार से लिए जा रहे इस कर्ज को राज्य सरकार दो अलग-अलग किस्तों में ले रही है, जिसे आगामी 18 और 30 साल की लंबी अवधि में चुकाया जाएगा। इस नए लोन के जुड़ने के साथ ही मध्य प्रदेश की जनता पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर अब सीधे 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इससे पहले राज्य सरकार ने इसी महीने 16 सितंबर को भी 2500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

💰 वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए सितंबर माह में तीसरी बार लोन ले रही सरकार, लगातार बढ़ रहा देनदारियों का ग्राफ

राज्य की अपनी वित्तीय जरूरतों और विकास कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार को लगातार कर्ज लेना पड़ रहा है। मौजूदा सितंबर महीने में ही राज्य सरकार द्वारा तीसरी बार कर्ज लेने की यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यह लोन मुख्य रूप से राज्य में सड़कों के निर्माण और अन्य आधारभूत विकास कार्यों के लिए उठाया जा रहा है। इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी राज्य सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय के माध्यम से दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटीज की नीलामी के जरिए 3600 करोड़ रुपए का भारी कर्ज लिया था। उस दौरान 1600 करोड़ का कर्ज 18 साल के लिए और 2000 करोड़ का कर्ज 30 साल की परिपक्वता अवधि के लिए लिया गया था।

📊 16 सितंबर को लिया गया था 2500 करोड़ का कर्ज, अब 1500 करोड़ की दो नई किस्तों के जरिए होगी उधारी

महज कुछ ही हफ्तों पहले यानी 16 सितंबर को सरकार ने 2500 करोड़ रुपए का कर्ज उठाया था, जिसे तीन अलग-अलग किस्तों में 8, 12 और 22 वर्षों की अवधि में चुकाया जाना है। अब एक बार फिर राज्य सरकार 1500 करोड़ रुपए का नया लोन लेने की तैयारी में है। यह ताजा कर्ज सरकार दो अलग-अलग हिस्सों यानी 800 करोड़ और 700 करोड़ रुपए के रूप में ले रही है। इसमें से पहला 800 करोड़ रुपए का कर्ज 18 वर्षों के लिए लिया जा रहा है, जबकि बाकी बचे 700 करोड़ रुपए का लोन 30 साल की लंबी अवधि के लिए लिया गया है।

📈 वित्तीय वर्ष के शुरुआती छह महीनों में ही 54 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज ले चुकी है सरकार

लगातार लिए जा रहे इन तमाम कर्जों की वजह से मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर देनदारियों का बोझ तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा अब 5 लाख 42 हजार करोड़ रुपए के स्तर को पार कर चुका है। वित्तीय वर्ष की शुरुआत में यानी 31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए था। लेकिन पिछले महज छह महीनों के भीतर ही राज्य सरकार 54 हजार करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त कर्ज ले चुकी है। सरकार द्वारा बार-बार लिए जा रहे इस भारी-भरकम कर्ज को लेकर अब विपक्षी दल यानी कांग्रेस ने राज्य की वित्तीय व्यवस्था और आर्थिक प्रबंधन पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।

🏛️ कांग्रेस प्रवक्ता अविनीश बुंदेला बोले- सरकार के पास वित्तीय प्रबंधन नहीं, कर्ज के पैसों को फिजूलखर्जी और आयोजनों में उड़ाया जा रहा

सरकार की कर्ज लेने की इस नीतियों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अविनीश बुंदेला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बयान देते हुए कहा कि, ”मौजूदा सरकार के पास किसी भी प्रकार का उचित वित्तीय प्रबंधन नहीं बचा है। सरकार लगातार भारी-भरकम कर्ज लेकर केवल फिजूलखर्जी को बढ़ावा दे रही है। वीआईपी सुख-सुविधाओं और सरकारी विज्ञापनों व आयोजनों में कर्ज के पैसों को पानी की तरह बहाया जा रहा है। सरकार को जनता के सामने आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि पिछले इन तमाम वर्षों में उनकी तरफ से लिया गया हजारों करोड़ रुपए का कर्ज आखिर किन-किन मदों और योजनाओं पर खर्च किया गया है।”

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.