Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
भाजपा गुजरात सह प्रभारी गोमती साय ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से की मुलाकात Congress Election Result: अभिषेक चौधरी को मिले सबसे ज्यादा 6.15 लाख वोट, राजस्थान यूथ कांग्रेस अध्यक... Rajasthan Kinnar House Theft: पुरानी रंजिश की आशंका के तहत पुलिस कर रही जांच, अज्ञात आरोपियों की तला... Chimur Ashramshala Controversy: डैंड्रफ की समस्या के नाम पर छात्रों के साथ अजीब सलूक, वायरल तस्वीरों... BJP vs Shinde Sena: नागपुर में बीजेपी के सामने बागी पूर्व विधायक की चुनौती, सीटों के बंटवारे के बाद ... Ulhasnagar Mahayuti Crisis: महाराष्ट्र में महायुति में पड़ी फूट! बीजेपी ने शिंदे सेना से अलग होने का... CM Vishnu Deo Sai Singapore Visit: छत्तीसगढ़-सिंगापुर साझेदारी से खुलेंगे विकास के नए रास्ते, ग्रीन ... Chhattisgarh PMAY Success: छत्तीसगढ़ में बिना सरकारी खर्च के मिली 25,413 आवासों के लिए जमीन, केंद्र ... Kanker Divyang Camp: जगदलपुर में 7 अक्टूबर को लगेगा निःशुल्क दिव्यांग शिविर, कलेक्टर कुन्दन कुमार ने... Raipur Police Reshuffle: मुख्यमंत्री और राजभवन सुरक्षा में बदले गए अधिकारी, गृह विभाग ने जारी किया न...

रिलायंस और 7-Eleven की पार्टनरशिप खत्म: भारत में बंद होने जा रहे हैं कन्वीनियंस स्टोर्स, जानिए क्या रही बड़ी वजह?

देश के रिटेल सेक्टर से एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दिग्गज कारोबारी कंपनी रिलायंस रिटेल ने दुनिया की सबसे बड़ी कन्वीनियंस स्टोर चेन 7-Eleven के साथ अपनी 5 साल पुरानी पार्टनरशिप को खत्म करने का बड़ा फैसला कर लिया है।

इस निर्णय के बाद भारत में चल रहे 7-Eleven के करीब 60 स्टोर्स में से ज्यादातर पर ताला लटकने की तैयारी है। जिन चुनिंदा स्टोर्स में अभी कामकाज चल रहा है, वहां भी बचा हुआ सामान बेचकर उन्हें पूरी तरह बंद किया जा रहा है।

साल 2021 में जब रिलायंस ने इस अमेरिकी-जापानी ब्रांड को भारत में लाने का ऐलान किया था, तब इसे रिटेल बाजार का एक नया और क्रांतिकारी प्रयोग माना गया था, लेकिन महज 5 साल के भीतर ही यह विदेशी मॉडल भारतीय बाजार की जमीनी हकीकत के आगे पूरी तरह दम तोड़ गया।

🛒 किराना दुकानों और क्विक कॉमर्स के बीच कैसे पिस गया यह विदेशी मॉडल?

7-Eleven जैसे ग्लोबल ब्रांड को भारत में किन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • पारंपरिक किराना नेटवर्क: एक तरफ भारत के गली-मोहल्लों में फैली लाखों छोटी किराना दुकानें हैं, जो दशकों से उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतों को बेहद कम खर्च और भरोसे के साथ पूरा करती आ रही हैं।

  • क्विक कॉमर्स की आंधी: दूसरी तरफ ज़ेप्टो (Zepto), ब्लिंकइट (Blinkit) और इंस्टामार्ट (Instamart) जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने पैर पसार लिए हैं, जो चंद मिनटों में स्नैक्स, कोल्ड ड्रिंक और राशन ग्राहकों के दरवाजे पर पहुंचा रही हैं।

  • लागत का बड़ा अंतर: किराना दुकानों का किराया और स्टाफ का खर्च न के बराबर होता है, जबकि 7-Eleven जैसे बड़े कॉर्पोरेट स्टोर्स को प्राइम लोकेशन पर भारी किराया, बिजली बिल और कर्मचारियों का भारी-भरकम खर्च उठाना पड़ता है। ग्राहक एसी स्टोर में चलकर जाने के बजाय घर बैठे मिनटों में सामान पाना ज्यादा पसंद करने लगे।

📉 92 करोड़ की कमाई पर 90 करोड़ का भारी-भरकम घाटा

वित्तीय आंकड़ों और विशेषज्ञों की राय:

  • बैलेंस शीट का सच: इस पार्टनरशिप को संभालने वाली कंपनी ‘7-इंडिया कन्वीनियंस रिटेल’ के आंकड़े इस कड़वे सच को साफ बयां करते हैं। मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कंपनी का कुल रेवेन्यू करीब 92 करोड़ रुपये ($10.6 मिलियन) रहा, लेकिन इसी दौरान कंपनी को लगभग 90 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध घाटा झेलना पड़ा।

  • विशेषज्ञों की राय: कंज्यूमर सेक्टर की कंसल्टेंसी फर्म ‘थर्ड आईसाइट’ के फाउंडर देवांग्शु दत्ता का मानना है कि महामारी के बाद क्विक कॉमर्स के आने से कन्वीनियंस स्टोर्स पर दबाव बहुत बढ़ गया है। जब तक कोई फॉर्मेट किराना से सस्ता या क्विक कॉमर्स से तेज विकल्प न दे, उसका टिकना नामुमकिन है।

  • ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग: 7-Eleven की पेरेंट कंपनी जापान की ‘सेवन एंड आई होल्डिंग्स’ (Seven & i Holdings) दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क्स में से एक है, जिसके पास 85,000 से ज्यादा स्टोर्स हैं। जापान, थाईलैंड जैसे देशों में यह सुपरहिट है, लेकिन भारत जैसे अनूठे बाजार में संगठित कन्वीनियंस स्टोर का फॉर्मूला पहले भी इजीडे और मोर जैसी कंपनियों के लिए असफल साबित हो चुका है।

🔮 अब आगे क्या होगा?

रिलायंस ने 2021 में मुंबई से इस ब्रांड की शुरुआत की थी, लेकिन विशाल रिटेल नेटवर्क के मुकाबले इसका दायरा बहुत छोटा रहा। अब इस समझौते के टूटने के बाद 7-Eleven भारत जैसे विशाल बाजार को पूरी तरह छोड़ने के मूड में नहीं है और वह अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए किसी नए पार्टनर की तलाश कर सकती है, हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.