US Midterm Elections 2026: अमेरिका के नस्लवादी इतिहास वाले फोरसिथ काउंटी में उतरीं भारतीय मूल की शुचिता पटेल, डेमोक्रेटिक पार्टी से लड़ रही हैं चुनाव
अटलांटा: अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के अंतर्गत आने वाला फोरसिथ काउंटी अपने दौर के गंभीर नस्लवाद और हिंसक अतीत के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका में होने जा रहे आगामी मिडटर्म चुनावों के मद्देनजर, इस पुराने और रूढ़िवादी इतिहास को पीछे छोड़ते हुए भारतीय मूल की एक सशक्त महिला शुचिता पटेल डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से काउंटी कमिश्नर के स्थानीय पद के लिए चुनावी मैदान में उतरी हैं। उनका यह कदम अमेरिकी राजनीति में प्रवासियों की बढ़ती भागीदारी और साहस का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
16 साल से बिना किसी विरोध के जीत रहे शक्तिशाली रिपब्लिकन नेता को मिल रही कड़ी टक्कर, डर के माहौल को खत्म करना है मकसद
चुनावी मैदान में शुचिता पटेल का मुकाबला एक ऐसे बेहद प्रभावशाली और कद्दावर रिपब्लिकन नेता से है, जो पिछले 16 वर्षों से लगातार बिना किसी प्रतिरोध के चुनाव जीतता आ रहा है और स्थानीय स्तर पर जिसका दबदबा माना जाता है। शुचिता पटेल का मुख्य उद्देश्य इस क्षेत्र से डर और संकोच के माहौल को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके साथ ही, उनका यह भी लक्ष्य है कि वे अपने प्रवासी (विशेषकर भारतीय) समुदाय की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करें और आने वाली पीढ़ियों तथा बच्चों के भविष्य के लिए एक अधिक सुंदर, समावेशी और सुरक्षित समाज का निर्माण करें।
डेट्रॉइट में जन्मीं और नॉर्थ जॉर्जिया को बनाया अपना घर, वित्त क्षेत्र की अनुभवी प्रोफेशनल हैं शुचिता पटेल
मूल रूप से भारत से ताल्लुक रखने वाले माता-पिता की संतान शुचिता पटेल का जन्म अमेरिका के डेट्रॉइट शहर में हुआ था। वर्ष 1993 में वे नॉर्थ जॉर्जिया आ गईं और तब से यहीं स्थाई रूप से बस गईं। उन्होंने अपनी संपूर्ण शिक्षा यहीं पूरी की, अपने पेशेवर करियर को संवारा और उनके तीन बच्चे भी हैं। शुचिता का कहना है कि यह क्षेत्र उनके लिए सिर्फ कोई राजनीतिक कैंपेन स्टॉप नहीं है, बल्कि यह उनका अपना घर है। फाइनेंशियल सेक्टर की एक अनुभवी प्रोफेशनल के तौर पर शुचिता के पास एफपीएंडए (FP&A), कंट्रोलरशिप और कंप्लायंस के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का लंबा अनुभव है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कंसल्टिंग फर्मों से लेकर विभिन्न स्थानीय व्यवसायों तक कई प्रतिष्ठित कंपनियों में अपनी सेवाएं दी हैं। बजट संचालन की गहरी समझ रखने वाली शुचिता का यह स्पष्ट मानना है कि वे वित्तीय मामलों की उन बारीक परतों को भी आसानी से पकड़ सकती हैं जिन्हें कोई छिपाना चाहता हो, और वे सही सार्वजनिक निवेश तथा दिखावे वाली निजी डीलों के बीच के अंतर को बहुत स्पष्ट रूप से समझती हैं।
‘दूसरों को साथ लेकर चलना ही असली सफलता है’, यही है शुचिता पटेल के जीवन का मूल मंत्र
अपने जीवन के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए शुचिता बताती हैं कि वे उन प्रवासियों की पहली पीढ़ी की बेटी हैं, जिन्होंने उन्हें यह सिखाया कि यदि आप आगे बढ़ते वक्त दूसरों को अपने साथ लेकर नहीं चलते, तो आपकी व्यक्तिगत सफलता का कोई विशेष अर्थ नहीं रह जाता। उनका यह विचार महज कोई चुनावी टैगलाइन नहीं है, बल्कि इसी सोच के साथ उनकी परवरिश हुई है—चाहे वह एक माता-पिता की भूमिका हो, एक जिम्मेदार पड़ोसी का दायित्व हो, या फिर अब एक राजनीतिक उम्मीदवार का सफर हो, वे इसी मूल मंत्र के साथ आगे बढ़ रही हैं।
फोरसिथ काउंटी से चुनाव लड़ने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बनीं शुचिता, काले और हिंसक इतिहास को पीछे छोड़ने की कोशिश
खास बात यह है कि शुचिता पटेल फोरसिथ काउंटी के इतिहास में चुनाव लड़ने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला बन चुकी हैं। इस काउंटी का अतीत काफी काला और कलंकित रहा है, जहां पूर्व में नस्लीय हिंसा और भीड़ द्वारा हत्या (लिंचिंग) जैसी अमानवीय घटनाएं हुई थीं। वर्ष 1912 के दौरान यहां के बहुसंख्यक गोरों और कुख्यात कट्टरपंथी समूहों (जैसे KKK) ने लगभग सभी अश्वेत नागरिकों को जबरन इस क्षेत्र से खदेड़ दिया था, जिसके बाद कई दशकों तक यह इलाका केवल श्वेत लोगों का क्षेत्र बनकर रह गया था। अब उस पुराने और डरावने इतिहास की पृष्ठभूमि वाले क्षेत्र में शुचिता पटेल का यह चुनावी कदम बदलाव की एक नई इबारत लिख रहा है।
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