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बेंगलुरु के होटलों में महंगी हुई चाय, कॉफी, इडली और डोसा— दूध और चावल के दाम बढ़ने से होटल मालिकों ने बढ़ाए दाम

बेंगलुरु: दूध, चावल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्रियों के दाम लगातार बढ़ने का असर अब दक्षिण भारत के प्रमुख शहर बेंगलुरु के होटल और रेस्तरां उद्योग पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। उत्पादन लागत में भारी इजाफा होने के चलते शहर के कई होटलों ने अपने मेन्यू में शामिल विभिन्न खाद्य पदार्थों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी कर दी है। इसके तहत आम लोगों की रोजमर्रा की पसंद बनने वाली चाय और कॉफी के साथ-साथ इडली और डोसा जैसी लोकप्रिय खाने-पीने की चीजें भी कुछ जगहों पर महंगी हो गई हैं। होटल संचालकों का कहना है कि स्वादिष्ट और गुणवत्तापूर्ण भोजन तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके कारण यह कदम उठाना पड़ा है।

बृहत बेंगलुरु होटलियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव ने बताया, चावल और दालों के दाम बढ़ने से उठाना पड़ रहा है आर्थिक नुकसान

बढ़ती लागत के चलते व्यवसाय को घाटे से बचाने के लिए मेन्यू की कीमतों में संशोधन करना मजबूरी बन गया है। बृहत बेंगलुरु होटलियर्स एसोसिएशन (BBHA) के अध्यक्ष पीसी राव ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने के भीतर ही खुले बाजार में चावल की कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर कुछ स्थानों पर सीधे 95 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच चुकी है। उन्होंने आगे यह भी रेखांकित किया कि केवल चावल ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की दालों की थोक और खुदरा कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिससे होटल चलाना महंगा हो गया है।

दूध और दही के दाम बढ़ने से होटल उद्योग पर बढ़ा वित्तीय बोझ, उत्तरी बेंगलुरु के कारोबारियों ने भी साझा की अपनी समस्याएं

एसोसिएशन के अध्यक्ष पीसी राव ने बताया कि इसके अलावा दूध और दही के मूल्यों में हुई बढ़ोतरी ने पहले से ही दबाव झेल रहे होटल उद्योग की कमर तोड़ दी है। उत्तरी बेंगलुरु के एक होटल व्यवसायी महेश केके के अनुसार, जब बाजार में बुनियादी चीजों के दाम बेकाबू होते हैं, तो होटलों के लिए अपने खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ाना अनिवार्य हो जाता है। कारोबारियों का यह भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्पन्न परिस्थितियों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण भी कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है। हालांकि, सभी होटल एक समान दर से दाम नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि कुछ छोटे और मध्यम श्रेणी के होटलों ने केवल चाय और कॉफी जैसी बुनियादी वस्तुओं के दाम ही संशोधित किए हैं।

चाय और कॉफी की कीमतों में 3 से 5 रुपये की हुई बढ़ोतरी, डोसा जैसे लोकप्रिय व्यंजन भी हुए महंगे

मौजूदा हालात को देखें तो शहर के कई होटलों में ग्राहकों को एक कप चाय या कॉफी के लिए औसतन 3 से 5 रुपये अधिक चुकाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ाने का पैमाना अलग-अलग रेस्तरां में अलग है। उदाहरण के तौर पर, जो डोसा पहले लगभग 100 रुपये में आसानी से मिल जाता था, उसकी कीमत बढ़कर अब कुछ जगहों पर 110 से 115 रुपये तक पहुंच गई है। दूसरी ओर, आम ग्राहकों ने इस मूल्य वृद्धि को अत्यधिक और अनुचित बताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है।

ग्राहकों का तर्क— दूध के दाम मामूली बढ़ने पर चाय-कॉफी पर भारी बढ़ोतरी करना उचित नहीं, राहत देने की मांग

आम जनता और नियमित ग्राहकों का मानना है कि यदि बाजार में एक लीटर दूध की कीमत में आंशिक वृद्धि हुई है, तो इसका यह अर्थ नहीं होना चाहिए कि हर एक कप चाय या कॉफी के दाम सीधे 5 रुपये बढ़ा दिए जाएं। उपभोक्ताओं ने शहर के होटल मालिकों और प्रबंधकों से पुरजोर आग्रह किया है कि वे दूध या चावल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का बहाना बनाकर हर छोटे-बड़े मेन्यू आइटम के दाम न बढ़ाएं, ताकि आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कुछ हद तक कम किया जा सके।

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