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बाढ़ से हाहाकार! UP में 12 की मौत, बिहार में कई गांवों से टूटा संपर्क, हिमाचल में 300 सड़कें बंद

उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिले इन दिनों बाढ़ का दंश झेल रहे हैं. मैदान इलाकों में भारी बारिश के कारण गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है. एमपी से आने वाली सहायक नदियों की वजह से यूपी और बिहार में गंगा- यमुना नदी का जलस्तर लोगों को डरा रहा है. इन नदियों में जलस्तर बढने से इसका असर प्रयागराज से लेकर बंगाल की खाड़ी तक देखने को मिल रहा है.

बाढ़ ने भारत और बांग्लादेश दोनों को प्रभावित किया है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, वाराणसी, मिर्जापुर बलिया और गाजीपुर, वहीं बिहार के भोजपुर, पटना, बक्सर सारण, समस्तीपुर, खगड़िया, वैशाली, बेगूसराय और भागलपुर जिले के लोग बाढ़ का दंश झेल रहे हैं.

गंगा के अपस्ट्रीम क्षेत्रों में स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर हो गई है. गाजीपुर में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 1 मीटर ऊपर है. इतना ही नहीं एक घंटे में गंगा का जलस्तर 1 सेंटीमीटर तक बढ़ रहा हैं. ऐसा ही कुछ, वाराणसी में भी देखने को मिल रहा है. यहां भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और एक घंटे में 3 सेंटीमीटर तक बढ़ रहा है.

यूपी के कई जिलों में बाढ़

मिर्जापुर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है. यहां 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है. प्रयागराज में गंगा और यमुना के संगम पर स्थित इलाहाबाद में जलस्तर मापक केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, जलस्तर 3 सेंटीमीटर प्रति घंटे की दर से बढ़ रहा है. वहीं फाफामऊ और प्रयागराज में भी जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है. वहीं राज्य के बाढ़ प्रभावित जिलों में 12 लोगों की मौत हो गई है.

बिहार के बक्सर में बिगड़े हालात

बिहार के बक्सर जिले में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे जल्द ही ये खतरे के निशान को पार कर सकता है. यहां गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र 2 सेमी नीचे है और 1 सेमी प्रति घंटे की तेजी से बढ़ रहा है. लगातार जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी की वजह से जिला मुख्यालय का रामरेखा घाट को पूरी तरह से जलमग्न हो गया है. वहीं ताड़का नाले के आसपास बने घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है.

गंगा के निचले इलाकों में पानी का का स्तर बढ़ता जा रहा है, जिसे यहां स्थिति और बिगड़ने का अनुमान है. बिहार में भी बाढ़ जैसे हालात बनते जा रहे हैं. वहीं निचले और मैदानी इलाकों में नदी का पानी फैल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों में बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ से राहत मिलने की संभावना अभी नजर नहीं आ रही है.

कब मिलेगी राहत?

हालांकि यमुना की सहायक नदियां केन और बेतवा में जलस्तर का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है. अनुमान लगाया जा रहा है कि यदि एमपी में भारी बारिश नहीं होती है तो दो-तीन दिनों में बिहार और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में पानी के स्तर कम हो सकता है. वहीं अगर अगले 24 से 48 घंटों में केन और बेतवा नदी के आसपास के इलाकों में भारी बारिश होती है, तो बाढ़ की स्थिति भयावह हो सकती है.

स्थानीय प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित बनाए हैं. बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है. बक्सर और अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं. प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों के किनारे न जाने की अपील की है.

मंडी- कुल्लू में 200 से अधिक सड़कें बंद

हिमाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन की वजह से दो राष्ट्रीय राजमार्गों सहित 307 सड़कों पर आवाजाही बंद है. मंडी जिले में सबसे ज्यादा 156 सड़कों पर आवाजाही बंद रही. कुल्ली में 68 सड़कें बंद हैं. स्थानीय मौसम विभाग ने राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों आने वाले दो दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की वजह से अब तक 170 लोगों की मौत हो चुकी है और 36 लापता हैं, जबकि 1,600 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं.

एमपी-राजस्थान और गुजरात में बढ़ा खतरा

मध्य प्रदेश के विदिशा में एसडीआरएफ और होमगार्ड की टीम ने अलर्ट पर हैं. बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों के रेस्क्यू में जुटी हैं. लगातार हो रही तेज बारिश से कई इलाके जलमग्न हुए हैं. इन इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीईआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, धार और अशोकनगर में भी एनडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है.

राजस्थान के अजमेर में भी कई इलाके बाढ़ से प्रभावित हैं. सरकार लोगों को राहत और बचाव के लिए उचित प्रबंध कर रही है. कई बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों का सफलता पूर्वक सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया है. भाजपा नेता वासुदेव देवनानी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया है.

गुजरात में भी बाढ़ से लोगों की मश्किलें बढ़ गई हैं. सरदार सरोवर बांध का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. बांध के 15 गेट खोले गए हैं, जिससे चिंता बढ़ गई है. अहमदाबाद के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है.

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