February 22, 2026 1:51 pm
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बियर, बिजनेस और ब्यूटीफुल गर्ल्स, Do You Wanna Partner वेब सीरीज कितनी बिंदास?

“ये मर्दों की दुनिया का बिजनेस है, तुम्हारे जैसी अच्छे घरों की लड़कियों के लिए बियर का स्टार्टअप ठीक नहीं, कुछ और क्यों नहीं करते! एमेज़ॉ़न प्राइम वीडियो की सबसे ताजा वेब सीरीज Do You Wanna Partner में दो सहेलियों को हरेक मोर्चे पर यही सुनना पड़ता है. ये दो सहेलियां हैं- शिखा रॉय चौधरी (तमन्ना भाटिया) और अनाहिता मकुजिना (डायना पेंटी). शिखा को अपने पिता का सपना साकार करना है. उनके साथ हुए धोखे का बदला लेना है और अनाहिता अपनी दोस्त के इस मिशन में साथ है. दोनों लड़कियां सिंगल हैं, खूबसूरत हैं, मॉडर्न हैं और एनसीआर के सबसे पॉश एरिया गुरुग्राम में क्राफ्ट बियर के स्टार्टअप के लिए संघर्ष कर रही हैं. दोनों को सक्सेसफुल बिज़नेसवुमेन बनने का सपना है लेकिन सीड मनी यानी कंपनी शुरू करने की जरूरत भर के पैसे भी नहीं है. अब बिना पैसे स्टार्टअप का सपना साकार कैसे होगा और मर्दों के दबदबे वाले बिज़नेस वर्ल्ड में दो लड़कियों की किस्मत कैसे चमकेगी- सीरीज की कहानी की ये दो सबसे बड़ी समस्या है.

हालांकि सीरीज की कहानी बहुत ही फॉर्मूलाबद्ध है लेकिन इसके ट्रीटमेंट की रेसिपी में स्वाद है, इससे सीरीज का आकर्षण बना रहता है. यह ठीक बियर की तरह अंदर उतरता जाता है. नशा नहीं चढ़ता और टेस्ट भी बना रहता है, साथ ही और पीने की तरह आगे देखने की ख्वाहिश बनी रहती है. बियर बिजनेस की दुनिया में दो ब्यूटीफुल गर्ल्स का स्ट्रगल देखना आंखों को सुहाता है. वैसे अर्जित कुमार और कॉलिन डी’कुन्हा के निर्देशन में बनी यह सीरीज कॉमेडी जॉनर की है लेकिन सीन दर सीन इमोशंस भरे हुए हैं. अगर दर्शकों को इसका इंतजार हो कि दोनों लड़कियां कब अपनी डिग्निटी खो देंगी, तो यकीनन उस मोर्चे पर निराशा होगी. इसे बहुत ही खूबसूरती के साथ मेंटेन किया गया है. लिहाजा करन जोहर की प्रोडक्शन कंपनी धर्माटिक एंटरटेनमेंट की यह पेशकश एक मायने में हस्तक्षेप है. करन के अलावा इसके प्रोड्यूसर्स हैं- अदार पूनावाला और अपूर्व मेहता.

तमन्ना और डायना की क्या है जुगाड़ू कहानी?

सीरीज में शिखा और अनाहिता बनीं तमन्ना और डायना ने दिल जीतने वाला अभिनय किया है. दोनों की कैमेस्ट्री और टाइमिंग खूब फबती है. सीरीज में दोनों के किरदारों की अपनी-अपनी बैकस्टोरी है. दोनों पिछले करीब दो दशक से गहरी दोस्त हैं. दोनों अलग-अलग कंपनी में काम करती हैं. लेकिन एक समय ऐसा आता है जब दोनों के पास नौकरी नहीं होती. शिखा जिस बियर कंपनी में काम कर रही थी, उसे दूसरी कंपनी टेकओवर कर लेती है इस कारण उसकी नौकरी चली जाती है. वहीं अनाहिता के साथ उसकी कंपनी में धोखा होता है. कंपनी के कारोबार में उसका बेहतर योगदान होकर भी उसे प्रमोशन नहीं मिल पाता. इस कारण वह नौकरी छोड़ देती है. सड़क पर आ चुकी दोनों लड़कियों में इसके बाद खुद का स्टार्टअप शुरू करने की ख्वाहिश जन्म लेती है. अब दोनों क्राफ्ट बियर कंपनी खोलना चाहती हैं.

दरअसल दोनों के पास बियर बिजनेस का बैकग्राउंड भी है. तजुर्बा और मेहनती होने के बावजूद स्टार्टअप के लिए उसे फंड की तलाश में हर जगह से निराशा मिलती है. क्योंकि वे लड़कियां हैं. हर जगह से यही जवाब मिलता है- बियर का कारोबार लड़कियों के लिए ठीक नहीं. लेकिन शिखा अपने पिता के साथ हुए धोखे का बदला लेने की जिद पर अड़ी है. अपने पैरों पर खड़ी होना भी चाहती है. अपने ब्रांड का नाम रखती है-जुगाड़़ू. दरअसल शिखा के पिता संजय रॉय चौधरी (इंद्रनील सेन गुप्ता) एक ऐसे शख्स थे जिन्होंने भारत के पहले क्राफ्ट बियर की रेसिपी बनाई थी, जिसका ब्रांड को पेटेंट भी कराया था. लेकिन उसका दोस्त धोखे से उस पर कब्जा कर लेता है. उसका दोस्त कोई और नहीं, बल्कि शिखा का पूर्व बॉस सिल्वर टस्क स्पिरिट्स का मालिक विक्रम वालिया (नीरज काबी) है, जो हर कदम पर उसका मानसिक उत्पीड़न करता रहता है.

लेडी गैंगस्टर लैला सिंह बनीं श्वेता तिवारी

लेकिन कहानी तब मोड़ लेती है जब दोनों लड़कियां फंड की तलाश में शहर की एक लेडी गैंगस्टर लैला सिंह के पास पहुंच जाती हैं. लैला सिंह के रोल में जानी-मानी टीवी अभिनेत्री श्वेता तिवारी हैं, जिन्होंने सीरीज को एक अलग ही रुतवा प्रदान किया है. वह मोटे ब्याज पर नगद कर्ज पर लगाती हैं. शिखा और अनाहिता को दो करोड़ चाहिए. उसे मिल तो जाता है लेकिन नहीं लौटाने के नतीजे भी मालूम है. शिखा ने खुद देखा कि डिफॉल्टर को लैला सिंह के वसूली गैंग हाथ पैर तोड़ देते हैं. इससे वह भयभीत है लेकिन उस पर पिता का सपना साकार करने और विक्रम वालिया की हर साजिश नाकाम करने का भूत सवार है.

डेविड जोन्स के गेटअप में जमे जावेद जाफरी

दोनों लड़कियों को इस काम में अपनी फैमिली के साथ-साथ दो स्पेशल लोगों का बड़ा सहयोग भी मिलता है. इनमें एक हैं- बॉबी बग्गा (नकुल मेहता) जो कि बियर बनाने का मास्टर है और डायलन थॉमस उर्फ डेविड जोन्स (जावेद जाफरी). सीरीज में जावेद जाफरी का रोल महत्वपूर्ण तो है, उन्होंने रोल भी बेहतरीन तरीके से निभाया है लेकिन उसके डायलन थॉमस से डेविड जोन्स बनने की कहानी बहुत दिलचस्प और फैंटेसिक है. बिजनेस और ब्रांडिंग की दुनिया में टाइटल और कारोबार चमकाने के लिए कई तरह के इवेंट्स तैयार किये जाते हैं-लेकिन डेविड जोन्स का किरदार एकदम फैंटेसीनुमा है. इस किरदार को गैर-जरूरी तरीके से फैलाया गया है. कई बार इनकी कहानी मूल कहानी के इतर हो जाती है. सीरीज में आगे जुगाड़़ू का क्या होता है. दोनों लड़कियां क्या अपनी मंजिल तक पहुंच जाती हैं. मेन विलेन विक्रम वालिया क्या-क्या चालें चलता है, इसे जानने के लिए सीरीज देखें.

सीरीज का मूल मंत्र क्या है?

आठ भागों में बनी इस सीरीज को तीन लोगों ने मिलकर लिखा है; ये हैं-नंदिनी गुप्ता, अर्श वोरा और मिथुन गंगोपाध्याय. इनके संवाद बेहतरीन कहे जा सकते हैं. स्क्रीनप्ले भी काफी चुस्त और मूड के साथ-साथ माहौल को पकड़ पाने में सक्षम हैं. बैकग्राउंड और म्यूजिक महानगर के परिवेश को पकड़ने वाले हैं. संवाद में हिंदी, अंग्रेजी, बांग्ला और पंजाबी की अलग ही रेसिपी है. दोनों लड़कियों के जज्बात, उनके अपने-अपने बॉयफ्रेंड से संबंध, बियर ब्रूअरी के मिशन, बियर बाजार में छाने की बेकरारी, राह में आने वाली दुश्वारियां, कर्ज, टैक्स, क्रिमिनल को हैंडल करने के तरीके, फ्रॉड के दांव और ईमानदारी की मेहनत, प्रोडक्ट की लॉन्चिंग, पर्सनल लाइफ के तनाव, फैमिली के रिश्ते आदि ये सारे इमोशंस वैसे ही घुले मिले हैं, जैसे कि उसके क्राफ्ट बियर की अनोखी रेसिपी है. लिहाजा ये सीरीज केवल रेसिपी का मसला नहीं है, बल्कि सोसायटी की सोच का मसाला भी है. इसमें एक जगह शिखा कहती है- बुली से लड़ने के लिए बुली बनना पड़ता है. माना जा सकता है यही इस सीरीज का मूल मंत्र है.

इन कलाकारों के अलावा शिखा के लिव-इन पार्टनर के रूप में कबीर बने रणविजय सिंह, अनाहिता के भाई सूफी मोतीवाला, शिखा की मां बनीं आयशा रज़ा मिश्रा, पिता बने इंद्रनील सेनगुप्ता आदि कलाकारों के रोल छोटे जरूर हैं लेकिन प्रभावशाली दिखे हैं. हालांकि इनमें रणविजय सिंह का किरदार का छोटा होना खटकता है. उसे थोड़ा और स्पेस मिलना चाहिए था. संभव है रणविजय सिंह के बदले जावेद जाफरी के रोल को बड़ा कर दिया गया हो.

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