धमतरी के बरारी गांव में हर घर में सीताफल का पेड़, गंगरेल के चट्टानी क्षेत्र के कस्टर्ड एप्पल की मिठास है खास
धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में कई तरह के फल-फूल, सब्जी का उत्पादन होता है. वनांचल क्षेत्र होने के चलते यहां अनेकों औषधीय और मौसमी फल उगाए जाते हैं. गंगरेल का किनारा होने के कारण यहां के फल हो या फिर सब्जी, उनमें अलग ही स्वाद होता है. इस समय बारिश का मौसम है. ऐसे में धमतरी और उसके आसपास के क्षेत्रों में सीताफल काफी मात्रा में दिख रहा है. सड़क के किनारे महिलाएं छोटी छोटी टोकरी में सीतफल लेकर बेचती नजर आ रही है. ये महिलाएं बरारी गांव की है. इस गांव की खासबात ये है कि यहां के हर घर में सीताफल के 10 से 12 पेड़ लगे हुए हैं.
बरारी गांव के लगभग हर घर में सीताफल का पेड़: धमतरी जिला मुख्यालय से 8 किलोमीटर दूर बरारी ग्राम पंचायत है. इस गांव में लगभग 400 घर है. यहां की जनसंख्या 1500 के करीब है. गांव के ज्यादातर घरों में सीताफल के पेड़ है. किसी किसी घर में 30 से 40 सीताफल के पेड़ लगे हैं. बारिश के ठंड में ये सीताफल यहां के लोगों की आय का मुख्य जरिया है. गांव की महिलाएं और पुरुष टोकरी भर भरकर सीताफल लेकर सड़क किनारे, बाजार और गलियों में बेचते हैं. बरारी गांव की महिलाएं लक्ष्मी निवास चौक पर करीब 2 से 3 घंटे बैठती है. अगर यहां बिक्री नहीं होती तो शहर की ओर चल पड़ती है. पैदल ही बरारी से धमतरी पहुंचती है.
सीताफल की पैदावार पर मौसम की मार: बरारी के ग्रामीण बताते हैं कि इस बार मौसम की मार और अगस्त सितंबर में ज्यादा बारिश की वजह से सीताफल के उत्पादन में कमी आई है. जिससे सीताफल का रेट कुछ ज्यादा है. इस वजह से लोग पहले से कम सीताफल खरीद रहे हैं.
बरारी के सीताफल की डिमांड ज्यादा: कृषि विभाग के उप परियोजना संचालक फत्तेलाल पटेल बताते हैं – “गंगरेल बांध से लगा हुआ क्षेत्र, बरारी, तुमनाबहार, केतीटोला में सीताफल का उत्पादन काफी मात्रा में होता है. यहां के सीताफल की खास बात ये है कि ये उच्च क्वॉलिटी का होता है. यहां के सीताफल की डिमांड, दुर्ग भिलाई, रायपुर तक भेजा जाता है. बरारी के सीताफल की डिमांड काफी ज्यादा है. उच्च क्वॉलिटी का सीताफल होने के कारण यहां के व्यापारी दूर दूर तक भेजते हैं.”
उप परियोजना संचालक बताते हैं कि बरारी का सीताफल काफी बड़ा होता है. एक सीताफल 100 से 150 ग्राम तक होता है. यहां के सीताफल में मिठास काफी ज्यादा होती है. चट्टानी क्षेत्र होने के कारण यहां के सीताफल में कैल्शियम भी ज्यादा होता है. गर्भवती महिलाएं और कुपोषित बच्चों के लिए सीताफल वरदान के जैसे हैं.
बरारी का सीताफल बहुत मीठा रहता है, आसपास के क्षेत्र में शायद ही ऐसा सीताफल मिलता होगा. रायपुर में हमारे परिवार के लोग रहते हैं, हम यहां से उनके लिए सीताफल लेकर जा रहे हैं. यहां का सीताफल बाहर भी भेजा जाता है -विजय साहू, ग्राहक
बरारी गांव का सीताफल क्यों खास
बरारी गांव गंगरेल बांध क्षेत्र से लगा हुआ है
सीताफल का उत्पादन यहां काफी मात्रा में होता है
उच्च क्वॉलिटी का होता है बरारी का सीताफल
बरारी के सीताफल का वजन काफी बड़ा
एक सीताफल 100 से 150 ग्राम तक
बरारी के सीताफल में मिठास ज्यादा
चट्टानी क्षेत्र होने के कारण यहां के सीताफल में कैल्शियम भी ज्यादा
सेहत के लिए फायदेमंद है सीताफल: सीताफल को कई नामों से जाना जाता है. जैसे कस्टर्ड एप्पल, शुगर एप्पल, चेरिमोया, शरीफा आदि. सीताफल हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है. यह फल विटामिन सी, मैग्नीशियम, विटामिन बी6 और आयरन से भरपूर होता है.
सीताफल में कई पोषक तत्व है
आयरन, विटामिन ए, विटामिन सी, पोटेशियम, फाइबर और मैग्नीशियम
सीताफल में ल्यूटिन पाया जाता है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है, आंखों को फ्री रेडिकल डैमेज से बचाती है
सीताफल विटामिन C का अछा स्रोत होता है, जो इम्यूनिटी को बूस्ट करने का काम करता है
पोटैशियम, आयरन और कैल्शियम से भरपूर सीताफल मांसपेशियों के दर्द को कम कर सकता है
सीताफल खाने से फेफड़ों में सूजन कम होती है एलर्जी भी धीरे धीरे कम होती है
सीताफल के रोजाना सेवन से शरीर हेल्दी रहता है
सीताफल में फाइबर भरपूर मात्रा में होता है. इससे डाइजेस्टिव सिस्टम सही रहता है