March 7, 2026 7:53 pm
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कोरबा के पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विभाग का प्रभार संस्कृत के प्राध्यापक को, रिसर्च सेंटर भी बंद होने के कगार पर

कोरबा: लगभग 4-5 साल पहले जिले के लीड कॉलेज शासकीय ईवीपीजी को इंग्लिश विषय के लिए रिसर्च सेंटर बनाया गया था. लेकिन 2014 के बाद से विश्वविद्यालय ने पीएचडी की कोई वैकेंसी ही नहीं निकाली. पिछले साल 2024-25 में वैकेंसी निकली, लेकिन अब यहां अंग्रेजी का कोई भी नियमित प्राध्यापक ही नहीं रहा. जिसके कारण कोई शोधार्थी यहां से रिसर्च करता, इसके पहले ही रिसर्च सेंटर बंद होने के कगार पर है.

इतना ही नहीं, कॉलेज के अंग्रेजी विभाग का प्रभार संस्कृत विषय के सहायक प्राध्यापक को सौंप दिया गया है. हालांकि एचओडी छात्रों को वे नहीं पढ़ाते लेकिन फिर भी संस्कृत विषय के प्राध्यापक को अंग्रेजी विषय की जिम्मेदारी सौंपना, थोड़ा अटपटा सा लगता है. बुद्धिजीवियों की संस्था में इस तरह के निर्णय, जानकारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.

पिछले साल रिटायर हो गई गाइड: अंग्रेजी विषय के लिए पीजी कॉलेज में मौजूद गाइड डॉ माधवीलता अग्रवाल पिछले साल रिटायर हो गई. इसके बाद अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी एक संस्कृत विषय के प्राध्यापक को सौंप दी गई है. पहले तो वैकेंसी नहीं निकलने के कारण विश्वविद्यालय की उदासीनता से कोई छात्र पीएचडी नहीं कर सका. अब कॉलेज स्तर पर किए गए अजीबोगरीब फैसले से अंग्रेजी विभाग का बुरा हाल है. इस साल अंग्रेजी विषय में मास्टर्स (MA) में एडमिशन भी काफी कम हुआ है.

फीस दोगुनी, एडमिशन हुए कम: पीजी कॉलेज में अंग्रेजी विषय में MA का पाठ्यक्रम स्ववित्तीय कोष से संचालित है. विभाग में एक भी नियमित प्राध्यापक या सहायक प्राध्यापक नहीं है. जिसके कारण अध्यापन का कार्य अतिथि और स्ववितीय शिक्षकों के भरोसे करवाया जा रहा है. स्ववित्तीय मद से चलने वाले एमए अंग्रेजी की फीस को दोगुना भी कर दिया गया है. इस वर्ष फीस को 5 से 10 हजार कर दिया गया है. इसके कारण कुल 40 सीटों पर इस साल सिर्फ 13 छात्रों ने एडमिशन लिया है.

क्या है स्ववित्तीय: उच्च शिक्षा विभाग में संकायों के संचालन के लिए कई व्यवस्थाएं हैं. अगर किसी विषय के कोर्स को शासन से मान्यता मिलती है, तब उसके लिए नियमित नियुक्ति होती है. खर्च भी शासन से ही मिलते हैं लेकिन यदि कोई कॉलेज शासन के स्वीकृति के बिना अलग-अलग विषयों और रोजगारपरक कोर्सेस का संचालन अपने खर्चे पर करना चाहता है, तब ऐसे पाठ्यक्रमों को स्ववित्तीय कहा जाता है. इसके लिए छात्रों से फीस ली जाती है और उसे पाठ्यक्रम को कॉलेज के स्ववित्तीय कोष से संचालित किया जाता है.

वर्तमान में हमारे कॉलेज में अंग्रेजी विषय का कोई भी रेगुलर फैकल्टी नहीं है. रिसर्च करने के लिए रेगुलर फैकल्टी का होना जरूरी है और उसका गाइड होना भी जरूरी है इसके नहीं होने से अभी कोई भी रिसर्च स्कॉलर नहीं है. जब रेगुलर फैकल्टी की नियुक्ति होगी, तब फिर से यहां रिसर्च शुरू किया जा सकता है. फिलहाल रिसर्च सेंटर बंद ही माना जाए. वर्तमान में अंग्रेजी विभाग का प्रभार संस्कृत विभाग के एचओडी कन्हैया सिंह कंवर को सौंपा गया है. इसके अलावा अन्य संकायों में भी एडमिशन बढ़ाने के लिए प्रचार प्रसार किया जाता है. -डॉ शिखा शर्मा, प्राचार्य, शासकीय ईवीपीजी लीड कॉलेज

इकलौती नियमित प्राध्यापक भी आत्मानंद में अटैच: रिसर्च सेंटर से गाइड मिलने पर ही कोई छात्र विश्वविद्यालय में खुद को पंजीकृत कर पीएचडी की डिग्री प्राप्त कर सकता है. रिसर्च सेंटर से पीएचडी करने के लिए नियमित प्राध्यापक को पीएचडी की अर्हता रखने के साथ गाइड के तौर पर मान्यता विश्वविद्यालय की ओर से दी जाती है. पीजी कॉलेज में फिलहाल एक प्राध्यापक और दो सहायक प्राध्यापक के पद स्वीकृत हैं, लेकिन यह तीनों पद अभी भी खाली हैं.

एक सहायक अध्यापक यहां थी, लेकिन उन्हें भी स्वामी आत्मानंद कॉलेज में अटैच कर दिया गया है. जिसके कारण जिले के लीड कॉलेज के अंग्रेजी विभाग में सहायक प्राध्यापक और प्राध्यापक की नियुक्ति शून्य हो चुकी है. अब इस विभाग का संचालन पूरी तरह से अतिथि और स्ववितीय शिक्षकों की ओर से किया जा रहा है. इस विभाग के विभागाध्यक्ष की जिम्मेदारी कॉलेज प्रबंधन में संस्कृत विषय के प्राध्यापक को सौंप दी है.

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