February 11, 2026 6:29 am
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पहलगाम हमले से बैकफुट पर मुस्लिम संगठन, क्या कमजोर पड़ जाएगा वक्फ कानून के खिलाफ आंदोलन?

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने मंगलवार को 28 निर्दोष पर्यटकों की बेहरमी से गोली मारकर हत्या कर दी. आतंकियों ने धर्म के बुनियाद को आधार बनाकर हिंदू समुदाय के लोगों को मारा है. आतंकियों ने सैलानियों से उनका धर्म पूछा, कलमा और अजान सुनाने के लिए कहा और फिर उन्हें गोली मार दी. इसे लेकर देशभर में गुस्सा है और मुस्लिम संगठन भी हमले की निंदा कर रहे हैं. इस आतंकी हमले के चलते ही वक्फ कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम संगठन चिंतित हैं.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पहलगाम आतंकी हमले पर शोक जाहिर करते हुए मंगलवार को वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अपने विरोध प्रदर्शन को अगले तीन दिनों के लिए स्थगित करने का फैसला किया. इसके अलावा वक्फ कानून के खिलाफ आंदोलन चला रहे जमियत उलेमा-ए-हिंद भी चिंतित है और उसे लग रहा है कि इस हमले से वक्फ कानून के खिलाफ मुस्लिम संगठनों की लड़ाई कमजोर पड़ सकती है.

AIMIM तीन दिन नहीं करेगा आंदोलन

दक्षिण कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को आतंकवादियों ने हमला किया, जिसमें 28 लोग मारे गए. 2019 में पुलवामा हमले के बाद यह कश्मीर में सबसे बड़ा हमला है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने एक बयान जारी कर कहा कि कश्मीर में पर्यटकों पर आतंकवादी हमले पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड शोक व्यक्त करता है और उसने वर्तमान में जारी अपने विरोध कार्यक्रमों को अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि शोक संतप्त परिवारों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए बोर्ड ने वक्फ अधिनियम में विवादास्पद संशोधनों के खिलाफ अपना अभियान तीन दिनों के लिए निलंबित कर दिया है.

वक्फ कानून के खिलाफ मुस्लिम संगठन

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मुस्लिम संगठनों ने 1985 में जिस तरह शाहबानो मामले को लेकर आंदोलन चलाया था, उसी तरह से वक्फ कानून को लेकर भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अभियान चला रहा है ताकि जन आंदोलन बना सके. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क तक लड़ाई छेड़ रखी है. मुस्लिम संगठन वक्फ कानून के खिलाफ कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रही है तो सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रही. बोर्ड देशभर में ‘वक्फ बचाव अभियान’ चला रहा है, जिसके तहत अलग-अलग राज्यों में जाकर कानून के खिलाफ आवाज उठाई जा सके.

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड वक्फ बचाव अभियान को पहले फेज में 87 दिन तक चलाने की रूपरेखा बनाई है. देशभर में वक्फ कानून के विरोध में एक करोड़ हस्ताक्षर कराने और उसे पीएम मोदी को भेजने की रणनीति बनाई थी. मुस्लिम बोर्ड के मुताबिक वक्फ कानून के खिलाफ उनका आंदोलन तब तक चलता रहे जब तक कानून को पूरी तरह निरस्त नहीं कर दिया जाता. वक्फ कानून के खिलाफ ‘वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ’ अभियान का नाम दिया गया है, क्योंकि बोर्ड इसे संवैधानिक अधिकारों से जोड़ता है.

किसान आंदोलन के तर्ज पर वक्फ आंदोलन

वक्फ कानून को पूरी तरह निरस्त करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हैदराबाद और दिल्ली के बाद देश के अहम शहरों में आंदोलन करने का प्लान बनाया था. 30 अप्रैल को रात 9 बजे देशभर में लोग अपने घरों, दफ्तरों, और फैक्ट्रियों में आधे घंटे के लिए लाइट बंद कर ‘ब्लैकआउट’ के जरिए प्रतीकात्मक विरोध करेंगे. सात मई को दिल्ली के रामलीला मैदान में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अगुवाई में रैली रखी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह वक्फ कानून को लेकर टिप्पणी की थी और उसके बाद सरकार को जवाब के लिए 7 दिन का समय दिया, उससे मुस्लिम संगठनों के हौसले बुलंद हो गए थे. मुस्लिम संगठन इसे अपने पक्ष में मान रहे हैं. मुस्लिम संगठनों को मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि देश के दूसरे समाज का भी समर्थन मिल रहा था. ऐसे में मुस्लिम संगठनों का कहना है कि वक्फ कानून को निरस्त करने तक विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के मंच पर विपक्षी नेताओं के साथ-साथ हिंदू बुद्धजीवी भी शिरकत कर रहे थे. मुस्लिम संगठनों ने वक्फ कानून के खिलाफ आंदोलन को किसान आंदोलन के तर्ज पर ले जाने और सरकार पर वापस लेने का दबाव बना रहे थे, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले के बाद मुस्लिम संगठन बैकफुट पर खड़े नजर आ रहे हैं.

आतंकी हमले से बैकफुट पर खड़े मुस्लिम

पहलगाम आतंकी हमले में जिस तरह धर्म का पैटर्न दिखा है, उसे लेकर देश में अलग तरीके से माहौल बन गया है. आतंकियों ने पहलगाम में एक खास धर्म के लोगों को टारगेट किया है. दहशतगर्दों ने पर्यटकों से पहले उनका धर्म और नाम पूछा और उनके परिचय पत्र देखा. यही नहीं कलमा और अजान सुनाने के लिए कहा और फिर हिंदू हो कहकर गोली मार दी. आतंकियों ने जिस तरह से धार्मिक एंगल का इस्तेमाल किया है, उससे कश्मीर ही नहीं बल्कि देश के मुस्लिम भी चिंतित हैं.

आतंकियों ने जिस तरह धर्म और नाम के बुनियाद पर लोगों को मारा है, उसके जरिए अब सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा. मुस्लिम संगठन मान रहे हैं कि देश के माहौल को बिगाड़ने की गहरी साजिश नजर आ रही. इंडियन मुस्लिम फॉर प्रोग्रेसिव एंड रिफॉर्म के एमजे खान ने कहा कि आतंकियों के धार्मिक एंगल से हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत पैदा करने की कोशिश है,जिसमें आम मुसमलानों का कोई रोल ही नहीं है. इसके बाद भी मुस्लिम निशाने पर आ गए हैं.

वक्फ के खिलाफ कमजोर पड़ेगी लड़ाई

देश के मुस्लिम उलेमाओं और मिल्ली संगठन भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि जिस तरह से आतंकियों ने धर्म के आधार पर लोगों को मारा है, उसका असर समाज पर भी पड़ रहा है. इसके चलते वक्फ कानून के खिलाफ उनकी लड़ाई कमजोर पड़ सकती है. जमियत उलेमा-ए-हिंद के एक अहम सदस्य ने टीवी-9 को बताया कि पहलगाम का आतंकी हमला ऐसे समय हुआ है, जब वक्फ कानून के खिलाफ उनकी लड़ाई पूरे उफान पर थी. अदालत से लेकर समाज तक का रुख मुस्लिम पक्ष की तरफ दिख रहा था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले से उस पर असर पड़ेगा.

मुस्लिम संगठनों का मानना है कि वक्फ कानून के खिलाफ लड़ाई अब पूरी तरह कमजोर पड़ सकती है, क्योंकि कुछ लोग उसे अब अलग ही रंग देने की कोशिश कर सकते हैं. इसके अलावा वक्फ कानून के खिलाफ जिस तरह से हिंदू समुदाय का समर्थन मिल रहा था, वो अब मिलना मुश्किल हैं. आतंकी हमले के बाद देश का माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है. यही वजह है कि ऑल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक्फ कानून के खिलाफ अपनी लड़ाई को तीन दिन के लिए रोक दिया है. इसके अलावा मुस्लिम संगठन और उलेमाओं ने पहलगाम हमले की निंदा करते हुए देश के साथ खड़े होने का ऐलान कर दिया.

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