Chhindwara Coal Mine: छिंदवाड़ा का कोयला ‘सोना’ से कम नहीं! मोआरी खदान फिर से शुरू, WCL को मिली जिम्मेदारी; हजारों को मिलेगा रोजगार
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक बार फिर काला सोना लोगों की किस्मत चमकाने वाला है. केंद्रीय वन मंत्रालय ने मोआरी में कोयला खदान खोलने के लिए 600 एकड़ जमीन वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड को अलॉट की है, ताकि इलाके में कोयला उत्पादन से रोजगार के अवसर बढ़ सकें.
मोआरी खदान खुलने से कोयलांचल में फिर लौटेगी रौनक
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से डब्ल्यूसीएल को मोआरी कोयला खदान खोलने के लिए 255.177 हेक्टेयर वन भूमि मिल गई है. मोआरी कोयला खदान खुलते ही कोयलांचल क्षेत्र में फिर से रौनक लौट सकेगी. कोयलांचल क्षेत्र में बेरोजगारी की समस्या भी कुछ हद तक दूर होने की संभावना है.
रोजगार की समस्या होगी खत्म
पिछले दिनों मंत्रालय के प्रमुख विभाग कंज्यूमर अफेयर फूड एंड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन और कोयला मंत्रालय संसदीय सलाहकार समिति के सदस्य और सांसद बंटी विवेक साहू ने दिल्ली में केन्द्रीय कोयला मंत्री जी किशन रेड्डी एवं केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव से मुलाकात कर नई खदानों को मंजूरी दिलाने का आग्रह किया था. सांसद ने भोपाल प्रवास के दौरान भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से नई खदानों को मंजूरी दिलाने के लिए मुलाकात की थी.
सांसद बंटी साहू ने कमलनाथ पर साधा निशाना
सांसद विवेक बंटी साहू ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा “नौ बार वे सांसद रहे, पत्नी सांसद रही, बेटा भी सांसद रहा, लेकिन कभी भी नई कोयला खदानों को खोलने के लिए प्रयास नही किए गए. इनके कार्यकाल में सिर्फ कोयला खदानें बंद हुईं. उनका कार्यकाल 45 साल बनाम दो साल का है.”
कोयलांचल की चमक लौटाने का दावा
उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा की चमक कोयले से है. इसकी खोई चमक वे वापस लाकर देंगे. आगे भी कोयला खदानें खोली जाएगी. जिले में सबसे ज्यादा सीएम राईज स्कूल और उप स्वास्थ्य केंद्र स्वीकृत हुए है. सावनेर से छिंदवाड़ा और छिंदवाड़ा से सिवनी फोरलेन का काम भी चल्द ही शीघ्र होगा, जिसमें पहली बार ढाई हजार करोड के काम होंगे.
कोयलांचल के व्यवसाय में आएगी नई जान
छिंदवाड़ा की पहचान कोयलांचल के कारण होती है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कोयलांचल में निरंतर कोयला खदानें बंद होने से छिंदवाड़ा अपनी पहचान खो रहा था. खदान खुलने से जहां कोयलांचल का व्यवसाय फिर से जीवित हो सकेगा. वहीं नए व्यवसाय भी शुरू होंगे.
लंबे समय से उठ रही थी खदान खोलने की मांग
सांसद बंटी विवेक साहू ने कहा “पूर्व सांसदों के कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में सिर्फ कोयला खदाने बंद हुए है. कोयला खदानें बंद होने से कोयलांचल की रौनक चली गई थी. मोआरी कोयला खदान खुल जाने से ऊर्जा क्षेत्र को बल मिल सकेगा. कोयलांचल क्षेत्र में लंबे समय से नई खदान खोलने की मांग उठ रही थी. इसे अपनी प्राथमिकताओं में लेकर इसे पूरा कराया है. अब डब्ल्यूसीएल द्वारा मोआरी कोयला खदान को खोलने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी.”
67 खदानों में से 12 चालू
डब्ल्यूसीएल के रिटायर्ड माइनिंग सरदार नैनसुख रॉय ने बताया, “वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के अंतर्गत पेंच और कन्हान घाटी क्षेत्र में 67 खदानों से कोयला उत्पादन होता था. अब मात्र 12 सक्रिय कोयला खदानें हैं. इनमें न्यूटन, चिकली, बोरकुही, रावनवाड़ा, इकलेहरा, भमोड़ी, चांदामेटा, दतला, शिवपुरी पेंच घाटी और राखीखोल, कन्हान, कालीछापर, नंदन प्रमुख हैं. हाल ही में मोआरी खदान को चालू करने की मंजूरी मिली है.”
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