West Bengal Election 2026: बंगाल में दूसरे चरण में 91.66% वोटिंग, हिंसा और बवाल के बीच ‘दीदी’ या ‘दादा’? 4 मई को आएगा फैसला
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा और आखिरी चरण मंगलवार को भारी मतदान और छिटपुट हिंसा के साथ संपन्न हुआ। चुनाव आयोग के अनुसार, शाम 7:45 बजे तक 91.66% वोटिंग दर्ज की गई है। पहले और दूसरे चरण को मिलाकर कुल मतदान का औसत 92.47% रहा, जो बंगाल की जागरूक जनता और कड़े चुनावी संघर्ष को दर्शाता है।
जिलों में मतदान का हाल: पूर्वी बर्धमान सबसे आगे
राज्य के विभिन्न हिस्सों में बंपर वोटिंग देखने को मिली:
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सबसे ज्यादा: पूर्वी बर्धमान में 92.46% मतदान हुआ।
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कोलकाता: दक्षिण कोलकाता में 86.11% और उत्तर कोलकाता में 87.77% वोट पड़े।
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अन्य जिले: हुगली (90.34%), नदिया (90.28%), और हावड़ा (89.44%) में भी कड़ी टक्कर दिखी।
बूथ पर तकरार: ममता बनाम शुभेंदु
भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में उस समय तनाव बढ़ गया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी एक ही बूथ क्षेत्र में आमने-सामने आ गए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर चुनावी धांधली और गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए। कालीघाट में शुभेंदु अधिकारी के पहुंचने पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की, जिसे हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
हिंसा, तोड़फोड़ और मौत का साया
दूसरे चरण के दौरान कई जिलों से अप्रिय घटनाएं सामने आईं:
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हमला: नदिया के छपरा और शांतिपुर में बीजेपी एजेंटों और कार्यालयों पर हमले हुए। दक्षिण 24 परगना के बसंती में बीजेपी उम्मीदवार की कार पर हमला किया गया।
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अभिषेक बनर्जी का पलटवार: टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्रीय बलों को ‘बीजेपी की प्राइवेट आर्मी’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि उदयनारायणपुर में केंद्रीय बल की धक्का-मुक्की के कारण एक बुजुर्ग की मौत हो गई।
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आरजी कर केस की गूंज: पानीहाटी में बीजेपी उम्मीदवार एवं आरजी कर पीड़िता की मां की कार को टीएमसी कार्यकर्ताओं ने रोककर विरोध प्रदर्शन किया।
4 मई को होगा फैसला: ‘खेला’ किसका?
चुनाव खत्म होने के बाद बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि “खेला खत्म हो गया है, 4 मई को दीदी की विदाई निश्चित है।” वहीं, टीएमसी ने भी अपनी भारी जीत का दावा किया है।
राजनीतिक समीकरण: इस चरण की 142 सीटों में से 123 पर पिछले चुनाव में टीएमसी का कब्जा था। बीजेपी के लिए कोलकाता, हावड़ा और नदिया जैसे गढ़ों में सेंध लगाना सरकार बनाने के लिए अनिवार्य है। अब सबकी नजरें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं।
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