GPM News: छत्तीसगढ़ के जीपीएम में मिलीं दुर्लभ पांडुलिपियां; संस्कृति मंत्रालय ने शुरू किया डिजिटलाइजेशन का काम
गौरेला पेंड्रा मरवाही: जीपीएम में संस्कृति मंत्रालय की ओर से संचालित ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान चलाया जा रहा है. इस सर्वेक्षण अभियान के तहत प्राचीन और दुर्लभ पांडुलिपियों के सुरक्षित संरक्षण के प्रयास का काम तेजी से चलाया जा रहा है. इस अभियान का एकमात्र मकसद विरासत को सहेजना है. इसके साथ ही देशभर में बिखरी ऐतिहासिक एवं धार्मिक पांडुलिपियों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण, डिजिटल संरक्षण एवं भावी पीढ़ियों के लिए उनको सुरक्षित करना है.
‘ज्ञानभारतम’ एप
सर्वेक्षण अभियान के तहत ही बीते दिनों पेंड्रा के पुरानी बस्ती, वार्ड नंबर 4 में पंडित मोहन दत्त शर्मा और जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घरों से करीब 200 से 500 साल पुरानी दुर्लभ और हस्तलिखित पांडुलिपियां मिली थीं. इन पांडुलिपियों को कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन के सामने डिजिटल संरक्षण प्रक्रिया के माध्यम से सुरक्षित किया गया था.
पांडुलिपियों की जियो टैगिंग
जीपीएम जिला प्रशासन के दिशा निर्देशन और ‘ज्ञानभारतम’ अभियान के जिला समन्वयक डॉ. राहुल गौतम के नेतृत्व में सर्वे टीम ने पंडित मोहन दत्त शर्मा के निवास से लगभग 500 वर्ष पुरानी हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद भागवत गीता’ सहित कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ खोजे हैं. हस्तलिखित ‘अथ श्रीमद भागवत गीता’ सहित कई दुर्लभ पांडुलिपियों को देख कलेक्टर डॉ. देवांगन ने उसपर श्रीफल एवं दक्षिणा अर्पित कर मत्था भी टेका था. कलेक्टर ने इसे जिले की अमूल्य सांस्कृतिक विरासत बताया. पांडुलिपियों की जियो टैगिंग कर ‘ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से डिजिटल रूप से सुरक्षित किया गया.
ये पांडुलिपियां पाई गईं
- ‘लग्न चन्द्रिका’
- ‘अथश्रीभागवतमहात्यं’
- ‘यद्वादशमहावाक्य’
- ‘रामचंद्राय नमः’
1925 की कई हस्तलिखित धार्मिक पांडुलिपियां मिली
इन पांडुलिपियों के अलावा संवत 1925 की कई हस्तलिखित धार्मिक पांडुलिपियां भी मिली हैं. वहीं, राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह के घर से लगभग 200 वर्ष पुरानी जमींदारी वंशावली एवं पेंड्रागढ़ क्षेत्र के राजस्व और वन विभाग के पुराने नक्शे भी मिले, जिन्हें डिजिटल संरक्षण के तहत सुरक्षित किया गया है. शासन की कोशिश है कि जो भी दुर्लभ और प्राचीन पांडुलिपियां मौजूद हैं उनको जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से संरक्षित किया जाए. ताकि आने वाले वक्त हमारी पीढ़ियां उनको देख और समझ सके.
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