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Ratlam Train Fire: रतलाम के पास नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस में लगी भीषण आग, बाल-बाल बचे 68 वीआईपी यात्री

रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम रेलवे डिवीजन के अंतर्गत रविवार की सुबह एक बहुत बड़ा रेल हादसा होते-होते रह गया। तिरुवनंतपुरम से मध्य प्रदेश के रास्ते नई दिल्ली की ओर जा रही देश की प्रीमियम ‘तिरुवनंतपुरम-दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस’ में सुबह करीब 5 बजे अचानक भीषण आग लग गई। यह पूरी घटना विक्रमगढ़ आलोट और लूनी रिच्छा रेलवे स्टेशनों के बीच की बताई जा रही है। घने अंधेरे और तेज रफ्तार से चलती ट्रेन में आग लगते ही प्रभावित बोगी में सवार 68 यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया और चीख-पुकार शुरू हो गई। हालांकि, ट्रेन में तैनात मुस्तैद रेलवे स्टाफ और सुरक्षा बलों ने त्वरित सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर गाड़ी को रोका और सभी यात्रियों को बोगी से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

🛠️ कर्मचारियों के बेहतरीन तालमेल से टला महा-हादसा: बोगी को काटकर ट्रेन से किया अलग, किसी यात्री को नहीं आई आंच

रविवार तड़के हुए इस हादसे के दौरान आग लगने की भनक लगते ही ऑन-ड्यूटी रेलवे कर्मचारियों ने बेहतरीन तालमेल, मुस्तैदी और अद्वितीय प्रशासनिक सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने बिना एक पल का समय गंवाए प्रभावित जलती हुई बोगी को मुख्य ट्रेन के कपलिंग लॉक्स खोलकर तुरंत अलग कर दिया। स्टाफ की इस अत्यधिक तत्परता और जांबाजी की वजह से विकराल आग मुख्य ट्रेन के दूसरे डिब्बों में नहीं फैल सकी और एक बहुत बड़ा राष्ट्रीय रेल हादसा समय रहते टल गया। पश्चिम रेलवे प्रशासन के लिए सबसे बड़ी राहत और संतोष की बात यह रही कि इस भयानक दुर्घटना में किसी भी रेल यात्री को मामूली आंच तक नहीं आई है।

⏳ रतलाम में ताजा हुआ 15 साल पुराना खौफनाक मंजर: 18 अप्रैल 2011 को भी इसी ट्रैक पर धू-धू कर जली थी राजधानी

इस रविवार के हादसे ने रतलाम के स्थानीय लोगों और रेलकर्मियों के जेहन में 15 साल पुराने एक बेहद डरावने और खौफनाक रेल हादसे की यादें एक बार फिर ताजा कर दी हैं। ठीक इसी तरह 18 अप्रैल 2011 को मुंबई से दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस में रतलाम डिवीजन के ही आलोट और थुरिया स्टेशनों के बीच रात 2 बजे भीषण आग लग गई थी। उस वक्त आग पैंट्री कार (रसोई यान) से भड़की थी और उसने देखते ही देखते तीन यात्री डिब्बों को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया था। उस समय उस वीआईपी ट्रेन में 1,100 यात्री सवार थे। करीब 15 साल बाद लगभग उसी भौगोलिक जगह पर दोबारा देश की सबसे प्रीमियम राजधानी एक्सप्रेस का इस तरह आग की चपेट में आना रेलवे के आधुनिक सेफ्टी सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।

📊 राजधानी ट्रेनों में आग लगने का इतिहास: वीआईपी ट्रेनों में कब-कब मंडराया आग का साया, देखें पूरी टाइमलाइन

भारतीय रेलवे की सबसे सुरक्षित, हाई-स्पीड और वीआईपी मानी जाने वाली राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों में आग लगने का यह कोई पहला और इकलौता मामला नहीं है। नीचे दी गई विस्तृत तालिका से समझिए कि देश में कब-कब इस प्रीमियम वीआईपी ट्रेन श्रृंखला पर आग का साया मंडराया है:

तारीख ट्रेन और स्थान हादसे का विवरण
18 अप्रैल 2011 मुंबई-दिल्ली राजधानी (रतलाम) रात 2 बजे पैंट्री कार से फैली आग, 3 डिब्बे जलकर खाक, 1100 यात्री सुरक्षित बचाए गए।
22 अप्रैल 2015 दिल्ली रेलवे यार्ड वाशिंग यार्ड में खड़ी भुवनेश्वर और सीलदह राजधानी की 6 खाली बोगियां जलकर राख हुईं।
11 मई 2019 भुवनेश्वर राजधानी (बालासोर) बालासोर के पास चलती ट्रेन में अचानक आग भड़की, मुस्तैदी से बड़ा नुकसान टला।
17 मई 2026 तिरुवनंतपुरम-दिल्ली राजधानी सुबह 5 बजे रतलाम के पास एक कोच में आग, 68 यात्रियों को सूझबूझ से सुरक्षित निकाला गया।

📌 रतलाम डिवीजन के नाम दर्ज हुआ अनचाहा रिकॉर्ड: उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच के आदेश, रेलवे ट्रैक किया गया बहाल

इन तमाम ऐतिहासिक हादसों के बीच अब मध्य प्रदेश के रतलाम रेल डिवीजन के नाम एक ऐसा अनचाहा और संदेहास्पद रिकॉर्ड दर्ज हो गया है, जहाँ इतिहास में दो बार देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली राजधानी ट्रेनें भीषण आग का शिकार हुईं। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों के लिए राहत की बात यह है कि दोनों ही बार भारतीय रेल को कोई जनहानि या जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं उठाना पड़ा। घटना के बाद डीडीयू और रतलाम मंडल के वरिष्ठ रेल प्रबंधक (DRM) सहित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। आग लगने के प्राथमिक कारणों (जैसे शॉर्ट सर्किट या ब्रेक बाइंडिंग) का पता लगाने के लिए एक उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्रभावित कोच को हटाने के बाद दिल्ली रूट को पुनः बहाल कर दिया गया है।

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