Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष नियुक्त होने के बाद पहली बार धमतरी पहुंचीं डॉ. ममता साहू, व्यवस्थाओं का ... बिलासपुर केंद्रीय जेल में बंदी की मौत पर 2 साल बाद बड़ा एक्शन: PM रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट का खु... कोरबा में ₹402 करोड़ पहुंचा कुल बिजली बिल बकाया! ग्राम पंचायतों और शिक्षा विभाग पर सबसे ज्यादा उधारी... कांकेर में दिल दहला देने वाला हादसा: नल-जल योजना के गड्ढे में जिंदा दफन हुआ मजदूर, 4 दिन बाद बैठी हु... बिजली दरों में बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर के खिलाफ छत्तीसगढ़ कांग्रेस का हल्ला बोल: 4 चरणों में होगा प्... कोरबा के बांगो बांध ने तोड़ा 3 साल का रिकॉर्ड: 83% से अधिक भरा जलाशय, जल्द खुल सकते हैं गेट जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में कायराना आतंकी हमला! छत्तीसगढ़ के दो युवाओं ने तोड़ा दम, सीएम साय ने दी श्... कांकेर में कलयुगी बेटे ने मां को लट्ठ से मार उतारा था मौत के घाट: शव को फांसी पर लटकाया, अदालत ने दी... एमपी सरकार ने किसानों के हित में लिए 2 बड़े फैसले, खाद वितरण में 'हाइब्रिड मोड' लागू व मूंग-उड़द खरी... एमपी में मूंग-उड़द की सरकारी खरीद की अंतिम तिथि बढ़ी! 10 अगस्त तक स्लॉट बुकिंग, खाद वितरण का बदला नि...

Delhi Tribal Samagam: दिल्ली के लाल किले पर जुटेगा 1 लाख आदिवासियों का महासैलाब; RSS का बड़ा सांस्कृतिक शक्ति प्रदर्शन

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और ऐतिहासिक लाल किले के प्रांगण पर आगामी 24 मई को आदिवासी समाज का एक अभूतपूर्व महासैलाब जुटने जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम के बैनर तले आयोजित होने वाले इस ‘जनजातीय सामाजिक समागम’ में देशभर से एक लाख से अधिक आदिवासियों के शामिल होने का दावा किया गया है। सुदूर वनांचल क्षेत्रों से आदिवासी समुदाय के लोगों का दिल्ली पहुंचना भी शुरू हो चुका है। हालांकि, आयोजक इसे विशुद्ध रूप से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे साल 2027 के विभिन्न राज्यों के विधानसभा और 2029 के आगामी लोकसभा चुनावों से पहले देश के विशाल आदिवासी वोट बैंक में गहरी पैठ बनाने और उन्हें वैचारिक रूप से लामबंद करने की एक बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

इस विशाल और ऐतिहासिक आयोजन की पूरी रूपरेखा आरएसएस से जुड़े वनवासी कल्याण आश्रम और जनजाति सुरक्षा मंच ने मिलकर तैयार की है। आयोजकों की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, करीब एक लाख लोग इस समागम का हिस्सा बनेंगे, जिनमें से लगभग 75 हजार लोग देश के विभिन्न कोनों से विशेष ट्रेनों के जरिए दिल्ली पहुंच रहे हैं, जबकि दिल्ली के आसपास के राज्यों (हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश) से करीब 200 लग्जरी बसों के माध्यम से लोगों को दिल्ली लाने की व्यापक प्रशासनिक तैयारी की गई है।

🏹 भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष पर भव्य समागम: पारंपरिक वेशभूषा में निकलेगी विशाल शोभायात्रा

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती वर्ष के पावन अवसर पर आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग दिल्ली के पांच अलग-अलग चिन्हित विशाल शिविरों में ठहराए गए हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार, इन पांचों केंद्रों से आदिवासी समाज के लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों, तीरों-कमानों और अद्भुत लोक संस्कृति के साथ भव्य शोभायात्रा निकालते हुए सामूहिक रूप से लाल किला मैदान पहुंचेंगे।

भले ही आयोजन से जुड़े मंच इसे पूरी तरह गैर-राजनैतिक और सांस्कृतिक आयोजन करार दे रहे हों, लेकिन 2027 और 2029 के चुनावी चक्र से पहले देश के आदिवासी समाज को राष्ट्रीय मुख्यधारा और एक विशेष वैचारिक छतरी के नीचे साधने की इन कोशिशों के चलते इसके कई तरह के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।

🗣️ जानिए लाल किले के समागम में कौन-कौन से संवेदनशील मुद्दे उठाए जाएंगे: डी-लिस्टिंग और धर्मांतरण पर होगी मुख्य बहस

वनवासी कल्याण आश्रम के इस राष्ट्रीय समागम में केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं होंगी, बल्कि जनजातीय समाज से जुड़े कई बेहद संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों को भी प्रखरता से उठाने की तैयारी है। इनमें से कुछ मुख्य विषय निम्नलिखित हैं:

  • धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग (De-listing): समागम का सबसे बड़ा मुद्दा देश में चल रहा अवैध धर्मांतरण और डी-लिस्टिंग का है। आयोजकों का सीधा आरोप है कि जो आदिवासी धर्म परिवर्तन कर चुके हैं, वे अब भी अनुचित रूप से मूल आदिवासियों के कोटे से अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण का दोहरा लाभ ले रहे हैं, जिससे वनांचल में रहने वाला मूल सनातनी जनजातीय समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। मांग की जाएगी कि धर्म बदलने वालों को एसटी सूची से बाहर (डी-लिस्ट) किया जाए।

  • फर्जी ST सर्टिफिकेट की बाढ़: देश के विभिन्न राज्यों में गैर-आदिवासियों द्वारा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बनवाए जा रहे एसटी सर्टिफिकेट और उसके जरिए हासिल की जा रही सरकारी नौकरियों व जमीनों के घपले पर भी कड़ा विरोध जताया जाएगा।

  • लव जिहाद और लैंड जिहाद: जनजातीय बहुल इलाकों में तथाकथित लव जिहाद और सोची-समझी रणनीति के तहत आदिवासियों की जमीनों पर किए जा रहे अवैध कब्जों (लैंड जिहाद) के खिलाफ मंच से हुंकार भरी जाएगी। आयोजकों का सीधा आरोप है कि कुछ विदेशी ताकतें और मिशनरी संगठन देश के भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनकी मूल सांस्कृतिक पहचान, परंपरा और जड़ों से अलग करने की गहरी साजिश रच रहे हैं।

🛡️ नक्सलवाद के खात्मे के बाद आदिवासी समाज में विश्वास बहाली की कवायद: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी दे सकते हैं संदेश

सुरक्षा सूत्रों और आंतरिक कूटनीति के मुताबिक, केंद्रीय भारत के वनों में नक्सली आंदोलन के तेजी से कमजोर पड़ने और हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह के बस्तर संभाग के ऐतिहासिक दौरों के बाद, सरकार और संघ इस मेगा कार्यक्रम के जरिए संपूर्ण आदिवासी समाज में देश के प्रति अटूट विश्वास, सुरक्षा और आत्मगौरव का एक मजबूत संदेश देना चाहते हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होकर आदिवासी कल्याण के लिए चलाई जा रही केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का खाका देश के सामने रख सकते हैं और आगे की लोक-कल्याणकारी रणनीति पर भी बड़ी बात कर सकते हैं।

🧭 सांस्कृतिक विरासत बनाम राजनीतिक किलाबंदी: क्या 2027 और 2029 की राजनीति की दिशा तय करेगा यह समागम?

लाल किले के ऐतिहासिक प्रांगण पर होने वाला यह जनजातीय सामाजिक समागम फिलहाल देश की प्राचीन संस्कृति, लोक कला और अमर परंपरा के नाम पर आयोजित किया जा रहा है, लेकिन इसके गर्भ में छिपे आदिवासी अस्मिता, धर्मांतरण विरोधी कानून, आरक्षण संरक्षण और पहचान जैसे गंभीर मुद्दों ने इसे देश की राजनीति के केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है।

आरएसएस और उससे जुड़े अनुषांगिक संगठनों की सुदूर आदिवासी समाज के बीच पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी जमीनी सक्रियता के बीच अब पूरे देश के राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी है कि लाल किले का यह समागम सिर्फ एक सांस्कृतिक शक्ति प्रदर्शन बनकर रह जाएगा या फिर यह वास्तव में साल 2027 और 2029 की चुनावी राजनीति की दिशा और दशा को बदलने में एक निर्णायक भूमिका निभाएगा।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.