D-Company Terror Module Busted: दाऊद के करीबी मुन्ना झिगाड़ा का भारत में आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़; ISI के इशारे पर हो रही थी भर्ती
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय जांच एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और डी-कंपनी से जुड़े हैं। पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दाऊद इब्राहिम के करीबी मुन्ना झिगाड़ा कराची में बैठकर वीडियो कॉल के जरिए भारत में अंडरवर्ल्ड की एक नई ‘जिहादी ब्रिगेड’ तैयार कर रहा था। जांच एजेंसियों ने वक्त रहते इस नेटवर्क को ध्वस्त कर बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है।
💊 नशे और पैसों का लालच: युवाओं को फंसाने की साजिश
जांच में पता चला है कि मुन्ना झिगाड़ा ने उन युवाओं को निशाना बनाया जो हेरोइन (चिट्टा) की लत से जूझ रहे थे। उनकी इस कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें नशा उपलब्ध कराया गया और फिर बड़ी वारदातों के लिए पैसों का लालच दिया गया। आरोपियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं के बीच हुई चैट से साफ हुआ है कि भारत में आतंकी गतिविधियों के लिए 20 लाख रुपये की मांग की गई थी और पंजाब के गुरदासपुर में हथियारों व ग्रेनेड की खेप भी गिराई गई थी।
💼 अंडरवर्ल्ड की मुंबई में वापसी की कोशिश
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, डी-कंपनी का कमजोर होता नेटवर्क अब फिर से अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा है। इसी रणनीति के तहत पुराने और भरोसेमंद सहयोगी मुन्ना झिगाड़ा को कमान सौंपी गई थी। हुफैजा जैसे लोग सीधे झिगाड़ा के संपर्क में थे, जिनकी तलाश में मुंबई में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक कड़ियों को खंगालने में जुटी हैं।
🚀 सुरक्षा तंत्र की बड़ी कामयाबी
दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील की उम्र बढ़ने के साथ, डी-कंपनी अपने अस्तित्व को बचाने के लिए नए लड़कों को जोड़कर एक नई आपराधिक ब्रिगेड खड़ी करना चाहती थी। लेकिन भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता ने इस मॉड्यूल को समय रहते ही पकड़ लिया। वर्तमान में इस अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क के वित्तीय और लॉजिस्टिक लिंक की गहन जांच जारी है ताकि इसके हर एक मददगार को कानून के दायरे में लाया जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: सीमाओं के पार से संचालित ऐसे मॉड्यूल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। क्या आपको लगता है कि अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद का यह गठजोड़ भविष्य में और अधिक घातक रूप ले सकता है, या सुरक्षा एजेंसियों की यह कार्रवाई इनके हौसले पस्त करने के लिए काफी है? अपने विचार नीचे साझा करें।
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