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Muzaffarpur Hospital Fire: प्रसाद हॉस्पिटल के आईसीयू में लगी भीषण आग, 4 मरीजों की मौत; प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप

बिहार के मुजफ्फरपुर से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है। ब्रह्मपुरा स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर बने आईसीयू (ICU) में अचानक शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस हादसे में झुलसने और दम घुटने के कारण अब तक 4 मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड और पुलिस प्रशासन की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला। अस्पताल के बाहर मरीजों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और इस हादसे ने पूरे शहर में हड़कंप मचा दिया है।

🔍 परिजनों का गंभीर आरोप: स्टाफ मरीजों को छोड़कर भागा

चश्मदीदों और परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। एक परिजन धर्मेंद्र कुमार ने रोते हुए बताया कि उनकी चाची गीता देवी आईसीयू में भर्ती थीं। आग रात के करीब 3 बजे लगी और उस वक्त आईसीयू में लगभग 20 मरीज थे। हैरान करने वाली बात यह है कि हादसे के समय वहां कोई अटेंडेंट मौजूद नहीं था और पूरा स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर छोड़कर फरार हो गया। धर्मेंद्र ने दावा किया कि उनकी चाची की बॉडी को अस्पताल के बाहर फेंक दिया गया था, जिसे उन्होंने खुद ढूंढकर निकाला। यह अस्पताल प्रशासन की घोर असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है।

⚠️ प्रशासनिक चूक: क्षमता से अधिक मरीजों की भर्ती

डीएम सुब्रत कुमार सेन ने पुष्टि की है कि अस्पताल प्रबंधन ने नियमों को ताक पर रखा था। वार्ड में केवल 13 बेड लगे हुए थे, लेकिन वहां 15 मरीज भर्ती थे। आग की घटना के चलते आईसीयू वार्ड के इंचार्ज भी गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिन्हें पास के ही एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय लोगों और परिजनों का कहना है कि अस्पताल का फायर कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से ‘शोपीस’ बना हुआ था, जो जरूरत के समय काम नहीं आया।

🚒 राहत-बचाव कार्य और जांच के आदेश

अग्निशमन विभाग के अधिकारी राम निवास पांडेय ने बताया कि पूरी स्थिति का आकलन किया जा रहा है। घटना के बाद प्रशासन ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिया है। रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए कई अन्य मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में रेफर किया गया है। घटनास्थल पर चारों तरफ चीख-पुकार मची हुई है और यह हादसा निजी अस्पतालों के सुरक्षा मानकों की पोल खोलकर रख गया है।

संपादकीय टिप्पणी: अस्पतालों में आग की घटनाएं सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी को दर्शाती हैं। क्या आपको लगता है कि प्रशासन को निजी अस्पतालों के फायर ऑडिट और मैनपावर की अचानक जांच को अनिवार्य कर देना चाहिए? अपने विचार नीचे साझा करें।

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