Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
West Bengal Politics: क्या है 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया'? बागी TMC सांसदों के बीच पुरानी ... INS Sharda Colombo Visit: भारत-श्रीलंका के बीच मजबूत हुआ समुद्री सहयोग; INS शारदा ने सफलतापूर्वक पूर... Indian Army Uniform Policy 2026: भारतीय सेना में बड़े बदलाव; गुलामी की निशानियाँ होंगी खत्म, नई गाइडल... Malviya Nagar Fire Case: कुक केशव नेगी की गिरफ्तारी पर उठे सवाल; जंतर-मंतर पर उत्तराखंड लोक मंच का व... TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस में बगावत पर अभिषेक बनर्जी का बड़ा कदम; स्पीकर से की अलग गुट को मान्यता न... Jharkhand Monsoon Update: मानसून के दस्तक देते ही वज्रपात का कहर; झारखंड में आकाशीय बिजली से 8 लोगों... UP Politics: 2027 में सपा-बसपा-कांग्रेस साथ भी आ जाएं तो नहीं रोक पाएंगे भाजपा की जीत - केशव प्रसाद ... Patna Coaching Dispute: खान सर की कोचिंग के बाहर पुलिस का नोटिस; मैनेजर सहित 3 स्टाफ को पूछताछ के लि... Solapur Road Accident: सोलापुर में पिकअप वाहन कुएं में गिरा; 14 लोगों की दर्दनाक मौत, प्रशासन की राह... TMC Political Crisis: टीएमसी के 20 बागी सांसदों का 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी' में विलय; एनडीए को दे...

West Bengal Politics: क्या है ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’? बागी TMC सांसदों के बीच पुरानी चर्चाओं का दौर तेज

पश्चिम बंगाल: टीएमसी के बागी सांसदों द्वारा नए राजनीतिक मंच से जुड़ने या विलय करने की खबरों के बीच, ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) नाम की एक पार्टी का पुराना नोटिस राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह नोटिस भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के नियमों के तहत अक्टूबर 2022 में जारी किया गया था।

📜 क्या कहता है निर्वाचन आयोग का पुराना नोटिस?

दस्तावेजों के अनुसार, 13 अक्टूबर 2022 को ‘मिलेनियम पोस्ट’ और ‘समीक्षा’ अखबारों में प्रकाशित सार्वजनिक नोटिस में इस नई पार्टी के रजिस्ट्रेशन का प्रस्ताव दिया गया था। इस नोटिस के जरिए आम जनता से किसी भी प्रकार की आपत्ति आमंत्रित की गई थी। पार्टी का पंजीकृत कार्यालय हावड़ा (पश्चिम बंगाल) के बांकरा क्षेत्र में दर्शाया गया था और आपत्तियां दर्ज करने की अंतिम तिथि 13 दिसंबर 2022 निर्धारित की गई थी।

🔄 टीएमसी बगावत और बढ़ती अटकलें

हाल ही में टीएमसी के बागी सांसदों के दिल्ली में सक्रिय होने और एनडीए के साथ गठबंधन के कयासों के बाद, इस पुरानी राजनीतिक इकाई का नाम फिर से सामने आया है। विश्लेषकों का मानना है कि बागी सांसदों के लिए एक नया मंच तलाशना कानूनी रूप से एक सुरक्षित कदम हो सकता है, लेकिन फिलहाल इस बारे में किसी भी पक्ष से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

⚖️ भविष्य पर क्या होगा असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोई प्रमुख नेता या सांसद भविष्य में इस पार्टी से जुड़ता है, तो यह पश्चिम बंगाल के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को बदल सकता है। हालांकि, अभी यह केवल अटकलों का दौर है। आधिकारिक घोषणा और संबंधित पक्षों के रुख के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि क्या वाकई ये बागी सांसद ‘नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी’ को अपनी नई राजनीतिक पहचान बनाएंगे।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.