Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
International Yoga Day 2026 Kolkata: हुगली नदी में 500+ बोट्स पर एक साथ योग; पीएम मोदी करेंगे कोलकात... Abhishek Banerjee vs NCPI: टीएमसी सांसदों के विलय को अभिषेक बनर्जी ने दी लोकसभा स्पीकर के सामने चुनौ... Shiv Sena Foundation Day: शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ; दो गुटों में बंटी पार्टी, उद्धव और शिंदे का अलग... Chronic Kidney Disease and Diabetes: डायबिटीज और हाई बीपी कैसे बढ़ाते हैं किडनी फेलियर का खतरा? जानें... Rahul Gandhi Politics Analysis: राहुल गांधी का मिशन 2029; मोदी के करिश्मे और गठबंधन की राजनीति के बी... Uttarakhand Corruption News: भ्रष्टाचार के खिलाफ CM धामी की बड़ी कार्रवाई; हरिद्वार के पूर्व अधिकारिय... Deoria Medical Negligence: मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही; टूटे दाहिने हाथ की जगह बाएं हाथ में चढ़ाया प... Varanasi Elevated Corridor: वाराणसी में 25 हजार करोड़ से बनेगा वरुणा और गंगा एलिवेटेड रोड; जाम से मि... Andhra Pradesh Crime News: पारिवारिक विवाद में पिता का खौफनाक कदम; तीन बेटियों की हत्या के बाद खुद द... Telangana Hospital Negligence: महिला की अस्थियों में मिली कैंची; सरकारी अस्पताल की लापरवाही से मां-ब...

Shiv Sena Foundation Day: शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ; दो गुटों में बंटी पार्टी, उद्धव और शिंदे का अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन

मुंबई: बालासाहब ठाकरे द्वारा स्थापित शिवसेना आज अपने 60वें स्थापना दिवस पर एक कठिन दौर से गुजर रही है। जिस पार्टी की पहचान कभी बालासाहब की प्रखर आवाज हुआ करती थी, वह आज उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के दो धड़ों में विभाजित है। स्थापना दिवस के मौके पर दोनों गुट मुंबई में अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे सियासी पारा गरमा गया है।

⚖️ दो गुटों की जंग और उद्धव गुट की चुनौती

एकनाथ शिंदे गुट ने गोरेगांव के नेस्को ग्राउंड में स्थापना दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया है, तो वहीं उद्धव ठाकरे गुट सायन में अपना कार्यक्रम मना रहा है। उद्धव गुट के लिए यह समय विशेष चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पार्टी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। अब केवल 3 लोकसभा सांसद ही उद्धव ठाकरे के साथ बचे हैं, जिससे पार्टी दूसरी बार टूटने के कगार पर खड़ी नजर आ रही है।

📢 ‘गद्दार’ बनाम ‘निष्ठा’: पोस्टर युद्ध

शिवसेना (यूबीटी) ने बागी सांसदों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। मुंबई में लगाए गए बैनर-पोस्टर में बागियों को ‘गद्दार’ बताते हुए समर्थकों से कहा गया है- “जो पार्टी छोड़कर जाए, उसे वहीं तोड़ो।” इसके विपरीत, एकनाथ शिंदे गुट ने भी पूरे मुंबई में पोस्टर लगाए हैं, जिनमें बालासाहब ठाकरे और आनंद दिघे की तस्वीरों के साथ खुद को असली शिवसेना साबित करने का प्रयास किया गया है।

📜 शिवसेना के इतिहास में टूट की कड़वी यादें

शिवसेना के 60 साल के सफर में यह पहला बिखराव नहीं है। पार्टी को अतीत में भी कई बड़े झटके लगे हैं:

  • 1991: छगन भुजबल का पार्टी से अलग होना।

  • 1999: गणेश नायक का एनसीपी में शामिल होना।

  • 2004: नारायण राणे का शिवसेना छोड़ना।

  • 2007: राज ठाकरे द्वारा अलग पार्टी (मनसे) का गठन।

  • 2022: एकनाथ शिंदे का बगावत कर अलग होना।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.