US-Iran Peace Talks: स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच ट्रंप के बयान से बवाल; ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक छोड़कर निकला बाहर
जिनेवा: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का पहला दौर रविवार को उस समय अचानक रोक दिया गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सख्त बयान पर ईरानी डेलिगेशन ने कड़ा विरोध जताया। वार्ता के दौरान लेबनान में युद्धविराम और आर्थिक प्रतिबंधों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हो रही थी, लेकिन ट्रंप की चेतावनी ने पूरे माहौल को तल्ख कर दिया।
⚔️ ट्रंप की चेतावनी और ईरानी डेलिगेशन का विरोध
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया या लेबनान में अपने समर्थित समूहों की गतिविधियां नहीं रोकीं, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने यहाँ तक कहा कि “ईरानी अधिकारी अपने देश वापस भी नहीं पहुंच पाएंगे।” इस तीखी टिप्पणी के विरोध में ईरानी प्रतिनिधिमंडल कुछ समय के लिए बैठक छोड़कर बाहर चला गया। बाद में मोहम्मद बघेर गालिबाफ ने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी प्रकार के जवाब देने के लिए तैयार है।
📝 वार्ता के मुख्य बिंदु: युद्धविराम और प्रतिबंध
लगभग 80 मिनट तक चली इस बैठक में निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हुई:
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लेबनान युद्ध: ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने समझौते के अनुसार लेबनान में इजराइली हमलों को रुकवाने की अपनी पहली शर्त पूरी नहीं की है।
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आर्थिक प्रतिबंध: ईरान ने दावा किया कि उसके तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने का मसौदा लगभग तैयार है।
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फ्रीज की गई संपत्ति: कतर की मध्यस्थता से विदेशों में फंसी ईरानी संपत्तियों को मुक्त कराने पर बातचीत जारी है।
⚖️ क्या बातचीत पूरी तरह विफल है?
ईरानी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि बातचीत खत्म नहीं हुई है, बल्कि इसे कुछ समय के लिए रोका गया है। वहीं, अमेरिका की ओर से वार्ता में शामिल उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे ‘कठिन बातचीत’ का हिस्सा बताया और कहा कि मतभेद होना सामान्य है। विवाद इतना बढ़ गया कि बैठक के बाद का प्रस्तावित ‘जॉइंट फोटो’ और ‘हैंडशेक’ कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया।
🌍 इजराइल का स्टैंड
एक तरफ जहाँ वार्ता में लेबनान युद्ध पर चर्चा हो रही है, वहीं इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कर दिया है कि दक्षिणी लेबनान में बनाई गई सुरक्षा पट्टी (Security Strip) को इजराइल फिलहाल हटाने के मूड में नहीं है। इससे क्षेत्र में शांति बहाली की प्रक्रिया और अधिक जटिल होती जा रही है।
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