श्रीनगर: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और नेशनल जनरल सेक्रेटरी तरुण चुघ ने मंगलवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 125वीं जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रीनगर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए चुघ ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का बलिदान जम्मू-कश्मीर को भारत के साथ पूरी तरह एकीकृत करने के संघर्ष का एक गौरवशाली अध्याय है। उन्होंने कहा कि देश के लिए उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
📜 गिरफ्तारी और मौत के दस्तावेजों पर उठाई मांग
तरुण चुघ ने भारत सरकार से अपील की कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े ऐतिहासिक आर्काइवल रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने प्रश्न उठाए कि आखिर उन्हें किन कानूनी परिस्थितियों में गिरफ्तार किया गया था? साथ ही, उनकी मौत के समय का मेडिकल रिकॉर्ड और जांच समिति की रिपोर्ट अब तक जनता के सामने क्यों नहीं लाई गई? चुघ ने कहा कि देश को उस घटना के पीछे की सच्चाई जानने का पूरा हक है।
⚔️ 1947 के कबायली हमले का जिक्र
अपने संबोधन में तरुण चुघ ने 1947 में जम्मू-कश्मीर पर हुए कबायली हमले की याद दिलाई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस हमले को पाकिस्तान का सीधा समर्थन प्राप्त था, जिसके कारण हजारों निर्दोष लोगों को जान गंवानी पड़ी, घरों को लूटा गया और महिलाओं पर अत्याचार हुए। उन्होंने मांग की कि इस त्रासदी से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों को सार्वजनिक किया जाए ताकि नई पीढ़ी को उस दुखद कालखंड की वास्तविकता का पता चल सके।
🍎 युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली का संदेश
राजनीतिक मुद्दों के साथ-साथ चुघ ने युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने ड्रग्स जैसी कुरीतियों से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह दी। युवाओं को दूध, घी और लस्सी जैसे पारंपरिक पौष्टिक आहार के सेवन के लिए प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने कहा कि एक स्वस्थ युवा पीढ़ी ही देश के भविष्य को सशक्त बना सकती है।
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