दुर्ग: दुर्ग जिले के पूर्व जनपद पंचायत सीईओ रुपेश पांडेय को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी निराशा हाथ लगी है। अदालत ने उनके निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि संभागायुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश पूरी तरह से नियमसंगत है। इस फैसले के बाद अब रुपेश पांडेय का निलंबन प्रभावी रहेगा और उन्हें विभागीय जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा।
📜 कोर्ट ने याचिका को बताया निराधार
याचिकाकर्ता रुपेश पांडेय ने अपने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों का बारीकी से अध्ययन किया। अदालत ने अपने तर्क में कहा कि संबंधित प्राधिकारी को निलंबन करने का पूरा अधिकार प्राप्त था और निर्धारित विभागीय नियमों का पालन करते हुए ही यह कार्रवाई की गई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कों को अस्वीकार करते हुए इसे कानूनी रूप से त्रुटिहीन माना।
🔍 क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब ‘सुशासन तिहार’ के दौरान एक बीजेपी कार्यकर्ता के साथ रुपेश पांडेय की तीखी बहस हुई थी। इस घटना ने उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल मचा दी थी, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
🚦 प्रशासनिक कार्रवाई को मजबूती
हाईकोर्ट का यह फैसला प्रशासनिक कार्रवाई के समर्थन में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। याचिका खारिज होने के बाद अब न केवल उनका निलंबन जारी रहेगा, बल्कि उनके विरुद्ध चल रही विभागीय जांच की प्रक्रिया भी गति पकड़ेगी। यह निर्णय भविष्य के लिए स्पष्ट संदेश है कि प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में नियमों का उल्लंघन करने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित है।
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