Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Mann Ki Baat: 'हरगिला चिड़िया' बनी असम के गांवों की पहचान; PM मोदी ने की 'हरगिला सेना' की जमकर तारीफ स्वच्छ यमुना अभियान: सीएम रेखा गुप्ता का श्रमदान, कहा- "अब यमुना में नहीं गिरेगा बिना ट्रीटमेंट वाला... PM Modi Seychelles Visit: सेशेल्स की नेशनल असेंबली में बोले पीएम मोदी; 'भारत और सेशेल्स को जोड़ता है... Waqf Amendment Act: वक्फ संपत्तियों को कानूनी दर्जा दिलाने की प्रक्रिया तेज; 30 जून तक पूरा करें रिक... Amarnath Yatra 2026: सुरक्षा के कड़े इंतजाम; अमरनाथ यात्रा से पहले जम्मू-कश्मीर पुलिस ने की बड़ी मॉक र... हरिद्वार: बीमार पत्नी की संदिग्ध मौत का खुलासा, दवा के नाम पर जहर देकर की पति ने हत्या Jabalpur Crime News: फेसबुक पर हिंदू नाम रखकर की दोस्ती, फिर धर्म परिवर्तन और तस्करी की कोशिश; मामला... खंडवा: अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम पर हमला, 8 वनकर्मी घायल; वर्दी फाड़ने और पथराव का वीडियो वा... Muzaffarpur Crime News: अवैध संबंध के शक में छोटे भाई ने की बड़े भाई की हत्या, जांता से कुचलकर उतारा... Delhi E-Office System: दिल्ली सरकार में ई-ऑफिस का एक साल पूरा; फाइलों का निस्तारण हुआ तेज और पारदर्श...

Allahabad High Court News: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी; सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को डिवीजन बेंच के आदेशों का उल्लंघन और अदालत की अवमानना की श्रेणी में माना है।

📋 सरकार को अंतिम अवसर, 13 जुलाई को अगली सुनवाई

याचिकाकर्ता अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर के रूप में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाए और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की समय-सीमा भी स्पष्ट करे। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को दोपहर 2:00 बजे निर्धारित की गई है।

🔍 पंचायत चुनाव में देरी का कारण

यूपी में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया है। चुनाव में देरी के प्रमुख कारणों में 12 जून तक मतदाता सूची का प्रकाशित न हो पाना और ओबीसी आरक्षण निर्धारित करने के लिए नए सिरे से पिछड़ा आयोग का गठन शामिल है। सरकार ने इन स्थितियों के मद्देनजर जब तक आयोग की रिपोर्ट नहीं आती, तब तक ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक की जिम्मेदारी सौंप दी थी।

🗳️ याचिका का मुख्य उद्देश्य

याचिका में मांग की गई है कि प्रशासकों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू की जाए। सरकार द्वारा नियुक्त प्रशासकों की वैधता को चुनौती देते हुए यह तर्क दिया गया है कि संवैधानिक प्रावधानों के तहत चुनाव समय पर होना अनिवार्य है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.