SpiceJet Acquisition: स्पाइसजेट को खरीदेगी गल्फ एयरलाइन? निवेश और अधिग्रहण को लेकर शुरुआती बातचीत शुरू
नई दिल्ली: आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही भारतीय एयरलाइन स्पाइसजेट (SpiceJet) में एक गल्फ आधारित एयरलाइन ने संभावित निवेश या अधिग्रहण (Acquisition) की संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं। मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ महीने पहले एक एडवाइजरी फर्म के माध्यम से एयरलाइन की शुरुआती ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि, यह पूरी प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है और अब तक कोई औपचारिक प्रस्ताव (Formal Proposal) पेश नहीं किया गया है।
कंट्रोलिंग स्टेक या पूरी कंपनी खरीदने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि गल्फ एयरलाइन स्पाइसजेट में ‘कंट्रोलिंग स्टेक’ (Controlling Stake) खरीदने की योजना बना रही है या फिर वह पूरी कंपनी के अधिग्रहण पर विचार कर रही है। इस संभावित डील के संबंध में स्पाइसजेट प्रबंधन से भी संपर्क किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
भारत-गल्फ रूट्स बने हैं सबसे बड़ा आकर्षण
एविएशन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस संभावित निवेश के पीछे सबसे बड़ी वजह भारत और खाड़ी देशों (Gulf Countries) के बीच मौजूद द्विपक्षीय उड़ान अधिकार (Bilateral Flying Rights) हैं। यदि किसी विदेशी एयरलाइन के पास भारतीय एयरलाइन का मालिकाना हक आ जाता है, तो उसे इन महत्वपूर्ण और लाभदायक अंतरराष्ट्रीय रूट्स तक रणनीतिक पहुंच आसानी से मिल सकती है।
बोइंग 737 फ्लीट से मिलेगा शानदार ऑपरेशनल फायदा
सूत्रों के अनुसार, संभावित निवेशक गल्फ एयरलाइन भी बोइंग 737 (Boeing 737) विमान ही संचालित करती है, ठीक वैसे ही जैसे स्पाइसजेट करती है। ऐसे में दोनों कंपनियों के बेड़े की समानता से परिचालन, रखरखाव और लागत के स्तर पर काफी बेहतर तालमेल (Operational Synergy) देखने को मिल सकता है। एक एविएशन विशेषज्ञ का कहना है कि गल्फ एयरलाइंस लंबे समय से भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना चाहती हैं, लेकिन द्विपक्षीय एयर सर्विस समझौतों के कारण उनके अतिरिक्त उड़ान अधिकार सीमित हैं। ऐसे में किसी भारतीय एयरलाइन का अधिग्रहण उनके लिए रणनीतिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।
9,000 करोड़ के घाटे से उबरने की कोशिश में स्पाइसजेट
गौरतलब है कि स्पाइसजेट की बैलेंस शीट पर करीब 9,000 करोड़ रुपये के संचयी घाटे (Accumulated Losses) और बड़ी देनदारियों का भारी दबाव बना हुआ है। हालांकि, राहत की बात यह है कि कंपनी ने हाल के महीनों में क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) और कई सर्विस एग्रीमेंट्स के सेटलमेंट के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति में काफी सुधार किया है। इन मजबूत कदमों के बाद कंपनी की नेट वर्थ (Net Worth) एक बार फिर सकारात्मक (Positive) स्तर पर पहुंचने में सफल रही है।
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