Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश में 'ई-प्रवेश' प्रणाली ने बनाया रिकॉर्ड: डॉ. मोहन यादव के विजन से 4.89 लाख छात्रों ने लि... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता “मेरा बेटा राह भर तड़पता रहा...”, मंडला में 108 एंबुलेंस की घोर लापरवाही से 21 साल के युवक की तड़पकर... उज्जैन बनेगी देश की पहली 'सर्प मित्र नगरी': 15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्नेक पार्क, जानें खूबि... नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अगले 5 सालों के लिए बढ़ी 'पीएम-किसान' योजना, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को म... भारत में गूगल ने लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट! आपके बिना ऑनलाइन रहे भी करेगा सारे काम, जानें खास... सावन में करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ: दूर होंगे सभी कष्ट, जानें श्रीराम से जुड़ी कथा, सही स... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु...

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सब-रजिस्ट्रार मौखिक रूप से नहीं रोक सकते रजिस्ट्री, देना होगा लिखित आदेश

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने संपत्ति और दस्तावेजों के पंजीकरण से जुड़े एक बेहद अहम फैसले में स्थिति स्पष्ट की है।

अदालत ने कहा कि किसी भी दस्तावेज को पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किए जाने पर सब-रजिस्ट्रार केवल मौखिक रूप से इनकार नहीं कर सकता। कानूनन सब-रजिस्ट्रार को या तो संबंधित दस्तावेज का नियमानुसार पंजीकरण करना होगा या फिर पंजीकरण से इनकार करने का ठोस और कारणयुक्त लिखित आदेश पारित करना होगा। अदालत ने इसे सब-रजिस्ट्रार की अनिवार्य कानूनी जिम्मेदारी करार दिया है।

⚖️ गुरुग्राम निवासी की याचिका पर सुनवाई, 2014 में खरीदे गए 9.28 लाख के स्टांप पत्रों से जुड़ा है मामला

हाईकोर्ट के जस्टिस कुलदीप तिवारी की एकल पीठ ने यह महत्वपूर्ण आदेश गुरुग्राम निवासी ओसी कंवर की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।

याचिकाकर्ता ने वर्ष 2014 में खरीदे गए स्टांप पत्रों के आधार पर अपनी संपत्ति के बिक्री विलेख (Sale Deed) का पंजीकरण कराने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में उन्होंने बताया था कि गुरुग्राम के चक्करपुर और सुखराली गांव स्थित संपत्ति की खरीद के लिए उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) से 9.28 लाख रुपये मूल्य के वैध स्टांप पत्र खरीदे थे।

💻 जीआरएन पेंडिंग और फेल्ड का तकनीकी पेंच, चेक से किया गया था पूरा भुगतान

याचिका के अनुसार, 4 अक्टूबर 2017 को जब मूल स्टांप पत्रों के साथ बिक्री विलेख सब-रजिस्ट्रार के समक्ष पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किया गया, तो सब-रजिस्ट्रार ने मौखिक रूप से इनकार कर दिया।

अधिकारी का तर्क था कि संबंधित जीआरएन (सरकारी रसीद संख्या) का उपयोग पहले ही हो चुका है। वहीं, ट्रेजरी अधिकारी ने अदालत को बताया कि ई-ग्रास (e-GRAS) पोर्टल पर लेन-देन की स्थिति “पेंडिंग” (Pending) दर्शा रही थी, जबकि सब-रजिस्ट्रार के रिकॉर्ड में वही जीआरएन “फेल्ड” (Failed) दिख रहा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्होंने स्टांप शुल्क का पूरा भुगतान चेक के माध्यम से किया था और सभी दस्तावेज दुरुस्त थे।

📜 3 साल बाद दस्तावेज पेश करने पर सरकार का तर्क, कोर्ट ने कहा- निर्णय का अधिकार सब-रजिस्ट्रार का ही

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के पक्ष रखते हुए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की धारा 49 और 50 का हवाला दिया गया।

सरकारी वकील ने तर्क दिया कि स्टांप पत्र खरीदने के लगभग तीन वर्ष बाद दस्तावेज पंजीकरण के लिए प्रस्तुत किया गया, जिससे उसकी वैधता पर सवाल खड़ा होता है। हालांकि, राज्य सरकार ने भी अदालत के समक्ष स्वीकार किया कि इस पूरे विवाद की विस्तृत जांच करने और लिखित निर्णय पारित करने का वैधानिक अधिकार क्षेत्र संबंधित सब-रजिस्ट्रार के पास ही निहित है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.