केरल में बारिश का कहर! भूस्खलन और फ्लैश फ्लड में 8 की मौत, 8 लापता; 200 से अधिक राहत शिविरों में भेजे गए लोग
तिरुवनंतपुरम (केरल): केरल राज्य में 31 जुलाई की रात से 1 अगस्त तक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। इस भयंकर प्राकृतिक आपदा से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में कम से कम आठ लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। भीषण बारिश के चलते राज्य के कई हिस्सों, विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूस्खलन (Landslides) और फ्लैश फ्लड (आकस्मिक बाढ़) की स्थिति निर्मित हो गई है। यह तबाही वायनाड में टनल निर्माण स्थल पर ठीक एक महीने पहले हुई उस घटना के बाद आई है, जिसमें बारिश के मलबे में दबने से आठ लोगों की जान चली गई थी।
🏠 209 राहत शिविरों में 5,792 लोग स्थानांतरित, 27 घर पूरी तरह से जमींदोज
केरल मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक आपदा में आठ मौतों की आधिकारिक पुष्टि हुई है, 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और आठ लोग लापता हैं।
राज्य भर में त्वरित राहत एवं बचाव कार्य चलाते हुए कुल 5,792 प्रभावित लोगों को 209 सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। इस दौरान 27 मकान पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं, जबकि 196 घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार ने आपदा में जान गंवाने वाले मृतकों के आश्रितों तथा जिनके घर व रोजगार छिन गए हैं, उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
⛈️ नदियां उफान पर, उत्तर के जिलों में बाढ़ का खतरा; जानें कब मिलेगी बारिश से राहत
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, रविवार से राज्य में बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।
तिरुवनंतपुरम तथा कोल्लम जैसे दक्षिणी जिले अब खतरे के क्षेत्र से बाहर हैं क्योंकि बादलों का मुख्य घेरा उत्तर दिशा की ओर स्थानांतरित हो गया है। हालांकि, त्रिशूर के उत्तरी भाग में स्थित जिलों में रविवार को भी बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी रहेगी, क्योंकि बीते दो दिनों की अतिवृष्टि से प्रमुख नदियां और जलस्रोत उफान पर हैं।
🛠️ आपदा प्रबंधन तंत्र हाई अलर्ट पर, मंत्रियों को प्रभावित जिलों में कैंप करने के निर्देश
विपरीत परिस्थितियों के बीच मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने स्थिति पर निरंतर नजर बनाई हुई है। उन्होंने राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव और सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टर्स के साथ समीक्षा बैठक की।
मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है और आपदा प्रबंधन नेटवर्क (SDRF/NDRF) को सक्रिय कर दिया गया है। राज्य सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों को सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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