लुधियाना नगर निगम F&CC विवाद में बड़ा मोड़: हाईकोर्ट के नोटिस के बाद AAP विधायकों के बेटों ने दिया इस्तीफा
लुधियाना (पंजाब): लुधियाना नगर निगम की शक्तिशाली फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (F&CC) के पुनर्गठन को लेकर जारी सियासी और कानूनी घमासान अब एक नया मोड़ ले चुका है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई और मेयर को जारी कारण बताओ नोटिस के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक मदन लाल बग्गा तथा विधायक कुलवंत सिंह सिद्धू के बेटों ने F&CC की सदस्यता से त्यागपत्र (इस्तीफा) दे दिया है। दोनों नवयुक्त सदस्यों ने अपने इस्तीफे की जानकारी सार्वजनिक रूप से सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की है।
🏛️ 24 जून को हुई थी मनोनयन की घोषणा, कांग्रेस पार्षदों ने हाईकोर्ट में दी थी सीधी चुनौती
उल्लेखनीय है कि गत 24 जून को लुधियाना की मेयर ने दोनों विधायकों के बेटों को F&CC का सदस्य मनोनीत करने का आधिकारिक आदेश जारी किया था।
इस निर्णय के पश्चात न केवल विपक्षी दलों, बल्कि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के भी कई स्थानीय पार्षदों ने तीव्र असंतोष व्यक्त किया था। पार्षदों का आरोप था कि पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के किसी भी निर्वाचित पार्षद को कमेटी में स्थान नहीं दिया गया, जबकि विधायकों के परिजनों को सीधे शामिल कर लिया गया। तत्पश्चात, कांग्रेस पार्षदों ने इस नियुक्ति की वैधानिकता को हाईकोर्ट में चुनौती दी और तर्क दिया कि ‘पंजाब नगर निगम एक्ट’ के प्रावधानों के अनुसार F&CC सदस्यों का चयन पार्षदों के बहुमत से होता है, मेयर सीधे नियुक्ति नहीं कर सकतीं।
📜 जनरल हाउस के अधिकार पर उठा सवाल, विपक्षी पार्षदों ने हाईकोर्ट में दाखिल किए शपथ पत्र
दूसरी ओर, मेयर का पक्ष था कि 24 मार्च को आयोजित जनरल हाउस (सामान्य सदन) की बैठक में उन्हें F&CC के सदस्यों के चयन का सर्वसम्मति से सर्वाधिकार दिया गया था।
हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष दावा किया कि बैठक में ऐसा कोई आधिकारिक एजेंडा प्रस्तुत ही नहीं किया गया था और न ही इस संबंध में कोई मतदान हुआ। कांग्रेस पार्षदों के साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल (SAD), भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा निर्दलीय पार्षदों ने भी इस दावे के समर्थन में शपथ पत्र (Affidavits) अदालत में प्रस्तुत किए।
⚖️ हाईकोर्ट ने F&CC की कार्यवाही पर लगाई रोक, जवाब तलब के बाद शुरू हुई डैमेज कंट्रोल की कवायद
मामले की सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने F&CC की समस्त कार्यवाहियों और फैसलों पर अंतरिम रोक लगा दी थी।
इसके बावजूद यह आरोप सामने आया कि संभावित स्वीकृति (Anticipation) के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण फाइलों को क्लीयरेंस दी गई। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए मेयर को नोटिस जारी कर लिखित जवाब तलब किया। सूत्रों के अनुसार, अदालत के सख्त रुख और बढ़ते राजनीतिक विवाद को देखते हुए सत्ताधारी दल द्वारा डैमेज कंट्रोल (Damage Control) की कवायद शुरू की गई, जिसके परिणामस्वरूप दोनों विधायकों के बेटों ने इस्तीफा सौंप दिया। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर नगर निगम प्रशासन या आम आदमी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी जारी नहीं की गई है।


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