दिल्ली सरकार का बड़ा एक्शन: रोहिणी के प्राइवेट स्कूल को ‘टेकओवर’ का नोटिस, ₹15.60 करोड़ की वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशालय (DoE) ने रोहिणी स्थित एक नामी प्राइवेट ‘ग्लोबल स्कूल’ के प्रबंधन को औपचारिक रूप से कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है।
निदेशालय ने स्पष्टीकरण मांगा है कि नियमों के गंभीर उल्लंघन के चलते विद्यालय का प्रबंधन प्रशासक (Administrator) के अधीन क्यों न ले लिया जाए। यह कड़ा कदम शिक्षा निदेशालय, राजस्व विभाग तथा दिल्ली सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा किए गए औचक निरीक्षण (Joint Surprise Inspection) के बाद उठाया गया है। निरीक्षण के दौरान स्कूल द्वारा प्रस्तुत जवाब भ्रामक, असंतोषजनक और लगातार नियमों की अवहेलना करने वाला पाया गया।
📢 “शिक्षा के मंदिर हैं स्कूल, व्यावसायिक केंद्र नहीं”: दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद की सख्त चेतावनी
इस बड़ी कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने दोटूक शब्दों में कहा कि, “विद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, व्यावसायिक कमाई के केंद्र नहीं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकारों और भविष्य से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून की अवहेलना करने वाले और अभिभावकों व छात्रों का शोषण करने वाले किसी भी स्कूल प्रबंधन को बख्शा नहीं जाएगा। वित्तीय अनियमितताएं, परिसर का अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल और बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर दिल्ली सरकार पूर्ण जवाबदेही तय करने के लिए प्रतिबद्ध है।
⚠️ कारण बताओ नोटिस में उजागर हुईं 8 गंभीर अनियमितताएं और बड़े उल्लंघन
शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी नोटिस में स्कूल प्रबंधन की निम्नलिखित प्रमुख गंभीर कमियों को उजागर किया गया है—
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🏢 सरकारी कार्य में बाधा: निरीक्षण टीम के साथ अभद्र व असहयोगपूर्ण व्यवहार किया गया, भूमि व भवन सुरक्षा स्वीकृतियां छिपाने का प्रयास किया गया और अधिकारियों को छात्रों से बातचीत करने से रोका गया।
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🔥 गंभीर अग्नि व सुरक्षा खामियां: स्कूल बिना वैध फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (NOC) के चल रहा था। अग्निशामक यंत्र एक्सपायर हो चुके थे, लैब में खतरनाक सल्फ्यूरिक एसिड असुरक्षित मिला और फर्स्ट-एड का सामान भी एक्सपायर था।
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🧱 बेसमेंट का अवैध व जानलेवा इस्तेमाल: पार्किंग के लिए स्वीकृत भूमिगत बेसमेंट (Basement) में अवैध रूप से 18 कक्षाएं, म्यूजिक/डांस क्लास, रोबोटिक्स लैब और सीबीएसई परीक्षा केंद्र तक संचालित किया जा रहा था।
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💰 ₹15.60 करोड़ का घाटा व फंड की धांधली: ₹15.60 करोड़ से अधिक का घाटा दिखाने के बावजूद संदिग्ध कंपनियों को भुगतान किया गया, डेवलपमेंट फंड से ₹22.23 लाख के लग्जरी मोबाइल फोन खरीदे गए और ₹3.25 करोड़ के अनवेरिफाइड लोन चुकाए गए।
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🏊 परिसर का व्यावसायिक दुरुपयोग: बिना अग्नि सुरक्षा अनुमति के बाहरी लोगों के लिए कमर्शियल स्विमिंग पूल चलाया जा रहा था और छत पर आईजीएल गैस पाइपलाइन के साथ अवैध व्यावसायिक रसोईघर (Commercial Kitchen) संचालित हो रहा था।
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💸 अनधिकृत 15% फीस वृद्धि: बिना पूर्व अनुमति के 15% फीस बढ़ाई गई तथा 31 मार्च 2025 तक ₹1.98 करोड़ से अधिक की अवैध अग्रिम व कैपिटेशन फीस वसूली गई।
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👨🏫 शिक्षकों का शोषण: कुल 170 शिक्षकों में से लगभग 80 (करीब 50%) को संविदा (Contract) पर रखा गया, जिससे पारदर्शी चयन और वैधानिक भर्ती नियमों का उल्लंघन हुआ।
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🚰 सुविधाओं की घोर उपेक्षा: खेल परिसर बदहाल था, पुस्तकालय की स्थिति खराब थी, शौचालय अस्वच्छ थे, पीने का पानी खारा था और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए सुगम्यता का अभाव पाया गया।
⚖️ दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम (DSEA 1973) के तहत कानूनी प्रावधान
सरकार ने यह नोटिस दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम एवं नियम, 1973 (Delhi School Education Act & Rules, 1973) के तहत जारी किया है—
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धारा 20(1): यदि प्रबंध समिति वैधानिक दायित्वों की उपेक्षा करती है, तो सरकार 3 वर्ष (जरूरत पड़ने पर 5 वर्ष) के लिए स्कूल प्रबंधन अपने हाथ में ले सकती है।
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धारा 24(4): सरकारी निर्देशों का पालन न करने पर अनुदान रोकने, मान्यता रद्द करने या धारा 20 के तहत टेकओवर की शक्ति देती है।
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धारा 10(1) व 17(3): शिक्षकों के समान वेतन/सेवा शर्तों तथा अवैध कैपिटेशन फीस व व्यावसायिक मुनाफे पर रोक से संबंधित।
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नियम 50 व 50(ix): मान्यता की शर्तों, परिसर के व्यावसायिक उपयोग पर प्रतिबंध और अग्नि व स्वास्थ्य मानकों का अनुपालन।
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नियम 96 से 104: शिक्षकों व स्टाफ की पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित।
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