छतरपुर में करोड़ों की जमीन का फर्जीवाड़ा: फर्जी पहचान-पत्र बनाकर कराई रजिस्ट्री, तत्कालीन सरपंच व सचिव समेत 12 पर FIR दर्ज
छतरपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की नौगांव तहसील अंतर्गत हरपालपुर से लगे रानीपुरा क्षेत्र में करोड़ों रुपये की बेशकीमती कृषि भूमि की कूटरचित (फर्जी) दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्री कराने का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है।
पुलिस ने मामले पर त्वरित संज्ञान लेते हुए धोखाधड़ी और कूटरचना की धाराओं के तहत 12 आरोपियों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी (FIR) पंजीकृत की है। संपूर्ण प्रकरण ग्राम रानीपुरा स्थित कृषि भूमि का है, जो एक महिला के नाम पर दर्ज थी। शातिर आरोपियों ने तत्कालीन सरपंच एवं सचिव की मिलीभगत से पहले महिला के नाम से फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार कराए और तत्पश्चात उप पंजीयक कार्यालय से रजिस्ट्री निष्पादित करा ली।
📄 पहचान-पत्र में बदला पति का नाम, इसके बावजूद नौगांव उप पंजीयक कार्यालय में हो गई रजिस्ट्री
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले (अजनर थाना क्षेत्र) की निवासी पीड़िता सरोज राजपूत ने हरपालपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के अनुसार, उनकी स्वामित्व वाली भूमि हड़पने के उद्देश्य से भू-माफियाओं ने पहले पहचान दस्तावेज में नाम परिवर्तित करवाकर ‘सरोज देवी उर्फ सुनीता’ कराया। इसके उपरांत इसी फर्जी पहचान के आधार पर 2 मार्च और 10 अप्रैल 2026 को नौगांव उप पंजीयक (Sub-Registrar) कार्यालय में 3 विक्रय पत्र (Sale Deeds) निष्पादित करा लिए गए। हरपालपुर थाना प्रभारी (TI) राजेश सिकरवार ने बताया कि जांच में पाया गया कि वास्तविक भू-स्वामी सरोज राजपूत के पति का नाम बलराम राजपूत है, जबकि फर्जी दस्तावेज में पति का नाम ओमप्रकाश राजपूत दर्ज था। इस बड़ी असमानता के बावजूद उप पंजीयक कार्यालय द्वारा रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी कर दी गई।
⚖️ सेवा प्रदाता की पत्नी भी खरीदारों में शामिल, 3 अलग-अलग विक्रय पत्रों का हुआ निष्पादन
थाना प्रभारी राजेश सिकरवार द्वारा की गई प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया कि रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया सेवा प्रदाता (Service Provider) अशोक राजपूत के माध्यम से संचालित की गई थी।
2 मार्च 2026 को निष्पादित एक विक्रय पत्र में खरीदार के रूप में माया देवी नायक, कमला देवी रिछारिया और तारा राजपूत के नाम दर्ज कराए गए। उल्लेखनीय है कि तारा राजपूत स्वयं सेवा प्रदाता अशोक राजपूत की पत्नी है। इसके अतिरिक्त दो अन्य विक्रय पत्र अमीना खान तथा परवेज खान के नाम पर निष्पादित किए गए थे।
🤝 ग्राम पंचायत रानीपुरा के तत्कालीन सरपंच व सचिव की मिलीभगत, जांच के घेरे में जारी प्रमाण-पत्र
थाना प्रभारी ने आगे बताया कि शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि पहचान दस्तावेज में नाम परिवर्तन की प्रक्रिया ग्राम पंचायत रानीपुरा के तत्कालीन सरपंच और सचिव द्वारा जारी किए गए प्रमाण-पत्र के आधार पर संपन्न कराई गई थी।
इसी आपराधिक सांठगांठ के कारण पुलिस ने तत्कालीन सरपंच और सचिव दोनों को इस मुकदमे में सह-आरोपी बनाया है। अब पुलिस की विशेष जांच टीम इस बात की बारीकी से पड़ताल कर रही है कि पंचायत द्वारा यह प्रमाण-पत्र किस आधार पर निर्गत किया गया था और क्या इसमें निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं।
🚓 एसपी रचत सकलेचा ने की 12 आरोपियों पर केस दर्ज होने की पुष्टि, पुलिस खंगाल रही है रिकॉर्ड
छतरपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) रचत सकलेचा ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि कुल 12 आरोपियों के खिलाफ बीएनएस (BNS) की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज कर लिया गया है।
हरपालपुर थाने में दर्ज एफआईआर में सुनीता उर्फ सरोज राजपूत (निवासी भदर्रा), तारा राजपूत, माया देवी नायक, कमला देवी रिछारिया (निवासी नौगांव), अमीना खान, परवेज खान, गफूर खान, जयप्रकाश राजपूत, मुन्नालाल प्रजापति, ग्राम पंचायत रानीपुरा के तत्कालीन सरपंच, तत्कालीन सचिव तथा सेवा प्रदाता अशोक राजपूत को अभियुक्त बनाया गया है। पुलिस अब पहचान-पत्र रिकॉर्ड, पंचायत प्रमाण-पत्र, उप पंजीयक कार्यालय के अभिलेख, बायोमेट्रिक सत्यापन, अंगूठे के निशान, फोटो और गवाहों की भूमिका की वैज्ञानिक जांच कर रही है।
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