Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
ISBT Dehradun Accident: बंद कमरे में जनरेटर चलाकर सोए थे कर्मचारी, कार्बन मोनोऑक्साइड गैस से गई जान पारण और उद्यापन में क्या है अंतर? व्रत के विधान को सही तरह से समझना है जरूरी Rajasthan Wildlife News: खेत में काम कर रहे मजदूरों के बीच मचा हड़कंप, वन विभाग ने लगाए ट्रैप कैमरे Peritoneal Cancer Symptoms: पेट फूलना और गैस को न समझें सामान्य, पेरिटोनियल कैंसर के शुरुआती लक्षण औ... Jalandhar RTO News: ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट सेंटर में सर्वर ठप, लाइसेंस रिन्यूअल समेत कई सेवाएं 3 घ... Jaipur Legal News: रिटायरमेंट से पहले चर्चा में आए जज दिनेश गुप्ता, बार-बार ट्रांसफर और स्वास्थ्य का... पंजाब में 108 एम्बुलेंस कर्मचारियों का फूटा गुस्सा: मांगों को लेकर लुधियाना डीसी को सौंपा ज्ञापन Jaipur Crime News: 5-7 बदमाशों ने लोहे की रॉड से उचकाया शटर, चंद मिनटों में दिया वारदात को अंजाम Jagraon Crime News: गांव कोठेआल में घर में घुसकर 2 युवकों पर जानलेवा हमला, तलवारों से वार कर लुधियान... Kharar Maharaja Ajj Sarovar: खरड़ के ऐतिहासिक 'महाराजा अज सरोवर' के लिए केंद्र से ₹93.94 करोड़ मंजूर...

कुर्ला लैंडस्लाइड हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 8 हुई, GSI की 8 साल पुरानी चेतावनी आई सामने

मुंबई (महाराष्ट्र): मुंबई के उपनगरीय इलाके कुर्ला (साकीनाका) में दो दिन पूर्व हुए भीषण लैंडस्लाइड (भूस्खलन) हादसे के बाद एक अत्यंत चौंकाने वाली प्रशासनिक रिपोर्ट उजागर हुई है, जिससे स्पष्ट हुआ है कि इस त्रासदी को लेकर वर्षों पूर्व ही सचेत कर दिया गया था।

इस दुखद हादसे में जान गंवाने वालों की कुल संख्या अब बढ़कर 8 हो गई है। सरकारी दस्तावेजों और अभिलेखों से यह प्रमाणित हुआ है कि देश की नोडल एजेंसी ‘जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (GSI) ने करीब आठ वर्ष पूर्व ही बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) को स्पष्ट अलर्ट जारी कर दिया था कि कुर्ला की पहाड़ी का यह हिस्सा किसी भी समय ढह सकता है। GSI ने बचाव हेतु विस्तृत तकनीकी अनुशंसाएं भी प्रेषित की थीं, किंतु धरातल पर उन पर कोई ठोस अमल नहीं किया गया।

📑 अंग्रेजी दैनिक की रिपोर्ट में खुलासा: 2005 और 2008 में भी हो चुका था हादसा, तब गई थी 16 जानें

अंग्रेजी समाचार पत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ द्वारा प्रकाशित एक खोजी रिपोर्ट में आधिकारिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए उल्लेख किया गया है कि GSI ने साकीनाका स्थित ‘हिल नंबर 3’ पर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का कड़ा सुझाव दिया था।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2005 से 2008 के मध्य भी इसी पहाड़ी पर तीन बार भूस्खलन की गंभीर घटनाएं घटित हुई थीं, जिनमें 16 मासूम नागरिकों की अकाल मृत्यु हो गई थी और कम से कम 26 मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए थे। इसके बावजूद वर्षों तक सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी की जाती रही।

🔬 2 साल के फील्ड सर्वे के बाद 2018 में बनी थी 435 पन्नों की रिस्क असेसमेंट रिपोर्ट

भूस्खलन के वैज्ञानिक अध्ययन हेतु केंद्र सरकार की अधिकृत संस्था GSI ने मुंबई के 74 अति-संवेदनशील व भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का लगातार दो वर्षों तक स्थलीय निरीक्षण एवं तकनीकी अध्ययन किया था।

इसके पश्चात वर्ष 2018 में 435 पन्नों की एक विस्तृत ‘जोखिम मूल्यांकन रिपोर्ट’ (Risk Assessment Report) तैयार कर BMC को सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में GSI ने मुंबई के संवेदनशील पहाड़ी इलाकों के लिए एक समग्र ‘भूमि उपयोग नीति’ (Land-Use Policy) लागू करने का स्पष्ट निर्देश दिया था। रिपोर्ट में कुर्ला, भांडुप, घाटकोपर, विक्रोली और चेंबूर को मुंबई के 5 प्रमुख ‘लैंडस्लाइड रिस्क जोन’ में शामिल किया गया था, जिसमें ‘हिल नंबर 3’ शीर्ष पर थी।

⚠️ नेताजी नगर और मिलिंद नगर को रखा था ‘हाई रिस्क जोन’ में, पीपल का पेड़ उखड़ने से गिरीं चट्टानें

पहाड़ी की ढलानों पर सघन रूप से बसी दो बस्तियों—नेताजी नगर और मिलिंद नगर का भौतिक मूल्यांकन करने के पश्चात GSI ने चिन्हित किया था कि यहाँ जन-धन का जोखिम राज्य के अन्य भागों की तुलना में कई गुना अधिक है।

विदित हो कि बुधवार को कुर्ला में यह जानलेवा लैंडस्लाइड तब घटित हुआ जब लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ी की ढलान पर लगा एक विशाल पीपल का पेड़ जड़ सहित उखड़ गया, जिसके प्रभाव से भारी भरकम चट्टानें और विशाल पत्थर सीधे नीचे स्थित झुग्गियों पर काल बनकर आ गिरे। वर्ष 2018 की रिपोर्ट में पूर्व में ही आगाह किया गया था कि चट्टानों के जोड़ों (Joint Planes) में बारिश का पानी रिसने और पेड़ों की जड़ों के फैलने से पहाड़ी ढहने का खतरा चरम पर पहुँच जाता है।

🧱 रिटेनिंग वॉल, ड्रेनेज सिस्टम और निर्माण पर रोक की दी गई थी सलाह; 8 साल तक ठंडे बस्ते में रही रिपोर्ट

GSI ने ‘हिल नंबर 3’ को ‘क्लास-II’ यानी अति-उच्च जोखिम श्रेणी में रखते हुए कई अनिवार्य तकनीकी सुझाव दिए थे:

  • अवैध कटाई व निर्माण पर पूर्ण रोक: ढलान की और अधिक कटाई तथा नए आवासों के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए।

  • रिटेनिंग वॉल का निर्माण: बस्तियों के पीछे खुली ढलान पर ‘वीप होल्स’ (जल निकासी छिद्र) और ‘टो ड्रेन’ (निचली नाली) से युक्त सुदृढ़ कंक्रीट रिटेनिंग वॉल बनाई जाए।

  • वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था: पहाड़ी से उतरने वाले गंदे व बरसाती पानी के सुरक्षित निकास हेतु पक्का ड्रेनेज सिस्टम स्थापित हो, क्योंकि क्षेत्र में कोई मुख्य नाला मौजूद नहीं था।

GSI के अधिकारियों का दोटूक कहना है कि बस्तियां बसाने हेतु पहाड़ियों को अवैज्ञानिक ढंग से काटना और प्राकृतिक जल निकास तंत्र को अवरुद्ध करना ही ऐसे हादसों का मुख्य कारक है। लेकिन 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी नगर निकाय द्वारा इन सुरक्षा उपायों को क्रियान्वित नहीं किया गया।

🗣️ “3 महीने पहले BMC हाउस में दी थी चेतावनी, नहीं लगाई गईं मेटल जालियां”— शिवसेना पार्षद विजेंद्र शिंदे

यद्यपि BMC के आधिकारिक रिकॉर्ड यह दर्शाते हैं कि वर्ष 2023 में ‘हिल नंबर 3’ को भूस्खलन-संभावित क्षेत्रों की प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया था, जहाँ रिटेनिंग वॉल बनाई जानी थी।

वहीं कुर्ला क्षेत्र से शिवसेना पार्षद विजेंद्र शिंदे ने नगर निगम प्रशासन पर घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मात्र 3 माह पूर्व (मई माह में) BMC हाउस की बैठक में इस गंभीर खतरे को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने प्रशासन से पहाड़ी की ढलानों पर मजबूत ‘मेटल प्रोटेक्टिव नेट’ (लोहे की जाली) लगाने का आग्रह किया था, ताकि चट्टानों को नीचे गिरने से रोका जा सके, किंतु प्रशासनिक उदासीनता के चलते कोई कदम नहीं उठाया गया और अंततः 8 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.