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Haryana Dilapidated Buildings Data: हरियाणा में जर्जर और असुरक्षित इमारतों का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं, विभागों में एक-दूसरे पर टल रही जिम्मेदारी

पंचकूला: देश के अलग-अलग राज्यों में पुरानी और जर्जर इमारतें ढहने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं, जिनमें रिहायशी और व्यावसायिक दोनों तरह के भवन शामिल होते हैं. लेकिन हाल ही में दिल्ली में एक हॉस्टल ढहने की घटना के बाद जब हरियाणा में ऐसी इमारतों की सुरक्षा को लेकर पड़ताल की गई, तो एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई. राज्य सरकार या किसी भी प्रमुख विभाग के पास प्रदेशभर की असुरक्षित और जर्जर इमारतों का कोई पुख्ता खाका या समग्र डेटा तैयार ही नहीं है.

🔄 2. पीडब्ल्यूडी, फायर डिपार्टमेंट और टाउन प्लानिंग विभाग—किसी के पास भी नहीं है जर्जर भवनों का रिकॉर्ड

इस गंभीर मुद्दे की तह तक जाने के लिए जब पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) विभाग, टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग, शहरी स्थानीय निकाय और दमकल विभाग से संपर्क किया गया, तो सभी ने चौंकाने वाले जवाब दिए. कोई भी विभाग जर्जर इमारतों का पूरा रिकॉर्ड अपने पास होने की बात स्वीकार नहीं कर पाया. एक विभाग अपनी जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर टालता नजर आया, जिससे साफ हो गया कि प्रशासनिक स्तर पर इन खतरनाक इमारतों की सुध लेने वाला कोई केंद्रीय तंत्र नहीं है.

🚒 3. दमकल विभाग के निदेशक ने स्पष्ट कहा- ‘इमारतों को असुरक्षित घोषित करना हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं’

हरियाणा के डायरेक्टोरेट ऑफ फायर सर्विसेज के डायरेक्टर, आईएएस शेखर विद्यार्थी से जब इस बारे में बातचीत की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि दमकल विभाग के पास जर्जर इमारतों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं होता है. किसी इमारत को असुरक्षित घोषित किया जाना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है. हालांकि, विभाग नई और पुरानी इमारतों को केवल आग से बचाव के संबंध में एनओसी (NOC) जारी करने और नोटिस देने की कार्रवाई जरूर करता है, लेकिन भवनों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांचना उनका काम नहीं है.

🛠️ 4. विभागों का तर्क- हर विभाग अपनी इमारतों की खुद करता है देखभाल, समग्र डेटा मिलना है मुश्किल

पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के इंजीनियर-इन-चीफ अनिल कुमार दहिया ने बताया कि विभिन्न विभागों के पास अपनी-अपनी इमारतों के रख-रखाव की जिम्मेदारी होती है. संबंधित विभाग ही यह तय करते हैं कि उनके अधीन आने वाली इमारत सुरक्षित है या नहीं. वहीं, टाउन एवं कंट्री प्लानिंग विभाग के सीटीपी (आईटी) जितेंदर सिहाग ने भी माना कि उनके पास कोई समग्र डेटा उपलब्ध नहीं है. अधिकारियों के इन बयानों से साफ है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

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