Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
Delhi Political News: नई दिल्ली विधानसभा चुनाव हारने के डेढ़ साल बाद फिर उठा वोटर लिस्ट का मुद्दा, ज... DUSU Election 2026 Violence: डूसू चुनाव में हिंसा और तोड़फोड़ पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, दिए कड़ी कार्... Sudivya Kumar Sonu Shradh: 'जेएमएम के लिए अपूरणीय क्षति'; सुदिव्य सोनू के श्राद्ध कर्म में भावुक हुए... Chhattisgarh Shramik Yojana: ई-बाइक और ई-रिक्शा पर मिलेगी बड़ी सब्सिडी; सीएम विष्णुदेव साय ने की 3 ब... Chhattisgarh Wild Bear Terror: लकड़ी बीनने गए ग्रामीणों पर टूट पड़े भालू; धमतरी में फैली दहशत, वन वि... Dhamtari Ganeshotsav: धमतरी में बप्पा का अलौकिक रूप! 20 फीट लंबी 'शयन मुद्रा' में विराजे लेटे हुए गण... PM Modi Birthday CG: जीपीएम से लेकर सुकमा तक हलचल! छत्तीसगढ़ में बीजेपी के सेवा कार्यों पर कांग्रेस ... Bastar News Update: बस्तर में दीपोत्सव बना सियासी अखाड़ा, जगदलपुर में कांग्रेस-भाजपा के बीच धक्का-मु... Durg Chunav News: जामुल नगर पालिका के किस वार्ड से कौन लड़ सकेगा चुनाव? आरक्षण के बाद भाजपा-कांग्रेस... Durg Jail Search Operation: कैदियों तक कैसे पहुंचे मोबाइल और कैंची? दुर्ग जेल रेड के बाद कॉल डिटेल ज...

Buy House vs Rent and Invest: ₹1 करोड़ का घर खरीदें या ₹40 हजार के किराए पर रहकर करें निवेश? जानिए कौन सा विकल्प है बेहतर

घर खरीदना ज्यादातर लोगों के लिए जिंदगी का एक बहुत बड़ा फैसला होता है. लेकिन जब पैसों की बात आती है, तो अक्सर यह सवाल सामने आता है कि ₹1 करोड़ का घर खरीदना बेहतर है या ₹40,000 महीने के किराए पर रहकर बाकी पैसों का निवेश करना? ‘फाइनेंशियल एक्सप्रेस’ (Financial Express) की एक गणना में 20 साल की लंबी अवधि के लिए इन दोनों विकल्पों की तुलना की गई है, जिससे यह समझना आसान हो जाता है कि कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है.

💰 2. ₹1 करोड़ का घर खरीदने पर कितना आएगा खर्च? जानिए डाउन पेमेंट और 20 साल की कुल EMI का हिसाब

मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास हर महीने घर के लिए करीब ₹70,000 का बजट है और वह ₹1 करोड़ का घर खरीदता है. इसके लिए वह 20% यानी ₹20 लाख डाउन पेमेंट देता है और बाकी ₹80 लाख का होम लोन 8% ब्याज दर पर 20 साल के लिए लेता है. इस हिसाब से उसकी मासिक EMI करीब ₹66,900 होगी और 20 साल में कुल भुगतान ₹1.61 करोड़ (जिसमें ₹80.6 लाख ब्याज शामिल है) तक पहुंच जाएगा. डाउन पेमेंट मिलाकर शुरुआती खर्च करीब ₹1.81 करोड़ बैठता है, जिसमें स्टांप ड्यूटी और मेंटेनेंस जैसे अन्य खर्च शामिल नहीं हैं.

📈 3. किराए पर रहकर ₹30,000 की SIP करने पर कितना बनेगा फंड? जानिए 20 साल बाद का पूरा समीकरण

दूसरा व्यक्ति यदि यही घर ₹40,000 महीने के किराए पर लेता है, तो ₹70,000 के बजट में से किराया चुकाने के बाद हर महीने ₹30,000 निवेश के लिए बचते हैं. यदि वह इस रकम की 20 साल तक SIP करे और 12% सालाना रिटर्न मिले, तो यह फंड करीब ₹2.97 करोड़ हो सकता है. इसके अलावा, घर खरीदने वाले का जो ₹20 लाख डाउन पेमेंट बचा है, उसे भी 12% रिटर्न पर निवेश करने पर 20 साल में करीब ₹1.93 करोड़ बन सकते हैं. इस तरह दोनों निवेश मिलकर किराएदार का कुल कॉर्पस करीब ₹4.90 करोड़ तक पहुंच सकता है.

⚖️ 4. सिर्फ कागजी गणित नहीं, बल्कि किराए में बढ़ोतरी और अन्य खर्चों को भी समझें

कागज पर किराएदार का कॉर्पस भले ही ₹4.90 करोड़ और घर खरीदार की प्रॉपर्टी की कीमत ₹4.66 करोड़ (8% सालाना वृद्धि पर) दिखाई दे, लेकिन असली कहानी अलग है. इस गणना में किराया स्थिर माना गया है, जबकि असलियत में 5% सालाना बढ़ोतरी होने पर 20 साल में किराया ₹1.06 लाख तक पहुंच सकता है, जिससे निवेश राशि कम हो जाएगी. इसके अलावा घर खरीदने पर स्टांप ड्यूटी, टैक्स और मेंटेनेंस जैसे खर्च भी होते हैं, इसलिए यह फैसला सिर्फ 20 साल की रकम देखकर नहीं, बल्कि अपनी वित्तीय स्थिति और जरूरतों को देखकर ही करना चाहिए.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.